
फाइनेंसियल प्लानिंग का सही फ्रेमवर्क: इन 6 स्टेप्स से बन जाएंगे टॉप 1% में शामिल
फाइनेंसियल प्लानिंग कहां से शुरू करें? यहां हैं वो 6 जरूरी स्टेप्स जिनसे 90% फाइनेंशियल प्लानिंग हो जाएगी। इमरजेंसी फंड, इंश्योरेंस, निवेश, रीट्स और विल प्लानिंग का पूरा फ्रेमवर्क समझें। Tax Samachar पर पढ़ें कैसे बनें फाइनेंशियली फ्री।
आजकल हर कोई फाइनेंस पर सलाह दे रहा है – क्रिप्टो करें, पी2पी लेंडिंग करें, बाय नाउ पे लेटर कर लो। लेकिन असली और टिकाऊ फाइनेंशियल सिक्योरिटी इन ‘क्विक रिच’ स्कीम्स से नहीं, बल्कि एक साधारण, अनुशासित और चरणबद्ध फ्रेमवर्क से मिलती है। यहां वो 6 मूलभूत स्टेप्स हैं जिन पर अमल करके आप 90% फाइनेंशियल प्लानिंग पूरी कर लेंगे और उन टॉप 1% लोगों में शामिल हो जाएंगे जो वित्तीय रूप से सुरक्षित और तनावमुक्त जीवन जीते हैं।
स्टेप 1: सबसे पहले बनाएं अपना सेफ्टी नेट – इमरजेंसी फंड
निवेश से पहले की सबसे बड़ी गलती जो ज्यादातर लोग करते हैं, वह है इमरजेंसी फंड की अनदेखी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 71% भारतीय किसी अस्पताल में भर्ती होने का खर्च अपनी जेब से उठाते हैं, जिससे उनकी पूरी बचत खत्म हो जाती है। इमरजेंसी सिर्फ मेडिकल नहीं, नौकरी जाना, कार खराब होना या घर की मरम्मत भी हो सकती है।
* कितना बनाएं? पारंपरिक सलाह 6 महीने के खर्च की होती है, लेकिन बेहतर है आपके बेसिक जरूरतों के खर्च (किराया, राशन, बिल – शॉपिंग, मनोरंजन नहीं) को आधार बनाएं। अगर आपका कुल खर्च ₹50,000 है और बेसिक ₹30,000, तो फंड ₹30,000 x 6-12 महीने के हिसाब से बनाएं। आपकी मानसिक शांति के लिए जितना जरूरी लगे।
* कहां रखें? तीन मापदंड हैं: स्टेबिलिटी, लिक्विडिटी और इन्फ्लेशन को मात देने वाला रिटर्न। इसे इस तरह आवंटित करें:
* 50-60%: ऑटो-स्वीप फीचर वाले सेविंग्स अकाउंट में (FD जैसा रिटर्न + सेविंग्स जैसी तुरंत उपलब्धता)।
* 30-35%: लो-रिस्क लिक्विड फंड्स में।
* 10%: नकद और गोल्ड कॉइन्स में (उस 1% एक्सट्रीम स्थिति के लिए जब बैंकिंग सिस्टम डाउन हो)।
स्टेप 2: अपने आप को ‘शील्ड’ करें – हेल्थ इंश्योरेंस
कंपनी के हेल्थ इंश्योरेंस पर भरोसा करना बड़ी गलती है। नौकरी बदलने, छूटने या रिटायरमेंट पर यह कवर खत्म हो जाता है। एक व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस नॉन-नेगोशिएबल है।
* कितना कवर? 5-7 लाख का कवर अब पुराना है। मेट्रो शहरों में 20-25 लाख और टियर-2 शहरों में 10-15 लाख का कवर लें। यह कवर प्रति व्यक्ति होना चाहिए।
* फैमिली फ्लोटर या इंडिविजुअल अगर परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ और 60 वर्ष से कम उम्र के हैं, तो फ्लोटर लें। अगर किसी की पहले से बीमारी है, तो उसके लिए अलग पॉलिसी लें।
* कौन सी पॉलिसी?हेल्थ पॉलिसी चुनते समय क्लेम सेटलमेंट रेशियो, नेटवर्क हॉस्पिटल्स, को-पेमेंट जैसे फैक्टर्स देखें। कुछ अच्छे विकल्पों में HDFC Ergo Optima Secure, Aditya Birla Activ Health Platinum, और ICICI Lombard Health Booster शामिल हैं।
स्टेप 3: अपने परिवार का ‘प्रोटेक्टर’ बनाएं – टर्म लाइफ इंश्योरेंस
25-40 की उम्र वह समय है जब शादी-बच्चे होते हैं और परिवार आप पर निर्भर होता है। टर्म इंश्योरेंस इस निर्भरता की सुरक्षा करता है।
* कितना कवर? साधारण नियम: अपनी वार्षिक आय का 15-20 गुना। अगर सालाना आय ₹10 लाख है, तो ₹1.5-2 करोड़ का कवर लें।
* क्या लें? सिर्फ प्लेन टर्म इंश्योरेंस लें (सबसे कम प्रीमियम, सबसे ज्यादा कवर)। यूलिप या अन्य मिक्स्ड प्लान से बचें। जितनी जल्दी लेंगे, प्रीमियम उतना ही सस्ता मिलेगा।
* कौन सी पॉलिसी? Max Life Smart Secure Plus Plan, SBI Life eShield, और ICICI Pru iProtect Smart जैसी पॉलिसियों पर विचार कर सकते हैं।
स्टेप 4: अपनी वेल्थ का ‘ग्रोथ इंजन’ शुरू करें – निवेश
इमरजेंसी फंड और इंश्योरेंस के बाद ही निवेश की शुरुआत करें। सुनहरा नियम: जितनी जल्दी शुरुआत करें, उतना बेहतर।
* कैसे शुरू करें? “पे योरसेल्फ फर्स्ट” का नियम अपनाएं। जैसे ही सैलरी आए, अपनी हाथ में आई रकम का 25-30% SIP के जरिए ऑटो-डेबिट से निवेश में लगा दें। बचे हुए पैसे से महीने का खर्च चलाएं।
* कहां निवेश करें? ‘कोर-सैटेलाइट’ अप्रोच अपनाएं
* कोर पोर्टफोलियो (60-70%): स्थिरता और लगातार वृद्धि के लिए।
* लार्ज कैप: Nifty 50 इंडेक्स फंड।
* फ्लेक्सी कैप फंड: फंड मैनेजर को मार्केट के हिसाब से निवेश की आजादी।
* मिड कैप फंड:लार्ज कैप से ज्यादा रिटर्न की संभावना (जोखिम भी अधिक)।
* सैटेलाइट पोर्टफोलियो (30-40%): अतिरिक्त रिटर्न (अल्फा) के लिए, थोड़ा जोखिम भरा।
* स्मॉल कैप फंड: हाई रिस्क, हाई रिटर्न।
* इंटरनेशनल फंड (जैसे NASDAQ 100): भौगोलिक विविधता और डॉलर में मजबूती का फायदा।
* थीमेटिक/सेक्टोरल फंड: केवल तभी, जब आप उस सेक्टर को अच्छी तरह समझते हों।
स्टेप 5: अपनी ‘आकांक्षा’ को समझदारी से पूरा करें – रियल एस्टेट
* रहने के लिए घर (होम टू लिव इन): यह ज्यादातर एक भावनात्मक निर्णय है, शुद्ध निवेश नहीं। इसमें स्थिरता और सुरक्षा की भावना आती है। इस बड़े लक्ष्य के लिए तब तक इंतजार करें जब तक आप जीवन में स्थिर न हो जाएं (शादी, बच्चे, स्थायी शहर)।
* निवेश के लिए प्रॉपर्टी: इसमें दो बड़ी चुनौतियां हैं – बड़ी पूंजी (हाई टिकट साइज) और कम तरलता (इलिक्विडिटी)।
* स्मार्ट विकल्प – REITs (रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट): यह आधुनिक तरीका है। आप बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टी (मॉल, ऑफिस) के पोर्टफोलियो में छोटा हिस्सा खरीदते हैं। इसके दो फायदे:
1. नियमित आय: किराए के रूप में डिविडेंड (सालाना 4-7%)।
2. उच्च तरलता: शेयर बाजार में खरीद-बिक्री आसान।
स्टेप 6: अपनी ‘जिम्मेदारी’ निभाएं – विल (वसीयत) प्लानिंग
विल प्लानिंग सिर्फ बुजुर्गों के लिए नहीं है। जीवन अनिश्चित है। एक विल यह सुनिश्चित करती है कि आपकी मेहनत की कमाई आपकी इच्छा के अनुसार, बिना किसी कानूनी उलझन के सही व्यक्ति तक पहुंचे। नॉमिनी सिर्फ एक कस्टोडियन होता है, कानूनी उत्तराधिकारी नहीं। आजकल ऑनलाइन सरल और सस्ती विल बनाने की सेवाएं उपलब्ध हैं।
अंतिम और निरंतर स्टेप: रिव्यू एंड रिबैलेंस
* रिबैलेंसिंग: साल में एक बार अपने निवेश पोर्टफोलियो (जैसे 70% इक्विटी-30% डेट) को चेक करें। अगर इक्विटी बढ़कर 80% हो गई है, तो कुछ बेचकर डेट खरीदें और अनुपात वापस लाएं। इससे जोखिम नियंत्रित रहता है।
* रिव्यू: हर 1-2 साल में अपने सभी लक्ष्यों, आय और जीवनशैली में बदलाव के आधार पर पूरी फाइनेंशियल प्लान की समीक्षा करें और अपडेट करें।
निष्कर्ष
इस 6-स्टेप फ्रेमवर्क को अगले 10 सालों के लिए अपनाएं। हम गारंटी देते हैं कि आप 99% आबादी से आगे निकल जाएंगे और उस टॉप 1% में शामिल होने का रास्ता तय कर लेंगे जो वास्तव में वित्तीय रूप से सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन जीते हैं। याद रखें, यह रेस नहीं, एक यात्रा है। नियमितता और अनुशासन ही सफलता की कुंजी है।

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