पहली बार घर खरीद रहे हैं? जानें 8 गंभीर गलतियाँ जो वित्तीय परेशानी खड़ी कर सकती हैं। वित्तीय आकलन, सही लोन चुनाव, दस्तावेज़ जाँच, और RERA व CIBIL स्कोर जैसे महत्वपूर्ण टिप्स हिंदी में। घर खरीदने से पहले यह ज़रूर पढ़ें।

घर खरीदना किसी के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है। यह सिर्फ एक वित्तीय लेन-देन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा है जो सालों की बचत, सपनों और उम्मीदों से जुड़ी होती है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, आवास ऋण (Housing Loans) 2023-24 की पहली तिमाही में 34.2% बढ़े हैं, जो दर्शाता है कि घर खरीदने की इच्छा रखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
लेकिन पहली बार घर खरीदने वाले (First Time Home Buyers) अक्सर उत्साह और अनुभव की कमी के कारण ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें सालों तक भुगतना पड़ता है। आज के इस टैक्स समाचार ब्लॉग में, हम आपको ऐसी ही 8 महत्वपूर्ण गलतियों से अवगत कराएंगे और उनसे बचने के व्यावहारिक उपाय सुझाएंगे।
1. वित्तीय स्थिति का सही आकलन न करना: सपना न बने सिरदर्द
सभी का सपना एक आलीशान घर होता है, लेकिन उसे हकीकत में बदलने के लिए अपनी वित्तीय स्थिति (Financial Health) की ईमानदारी से समीक्षा करना पहला कदम है।
क्या करें:
- आय-व्यय विश्लेषण: अपनी मासिक आय, नियमित खर्चे (बीमा, म्यूचुअल फंड SIP, मौजूदा ऋण आदि), और बचत का स्पष्ट बजट बनाएं।
- उधार क्षमता जानें: एक सामान्य नियम के अनुसार, आपकी सभी ऋण ईएमआई (Existing + New Home Loan EMI) आपकी मासिक आय के 40-50% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- अग्रिम राशि (Down Payment): ज्यादातर बैंक प्रॉपर्टी की कीमत का 80-90% तक ही ऋण देते हैं। बाकी 10-20% अग्रिम राशि के रूप में आपको खुद जुटानी होती है। सुनिश्चित करें कि यह राशि आपकी बचत से आए, न कि अन्य ऋण लेकर।
सरकारी पहल व संसाधन:
- Pradhan Mantri Awas Yojana (PMAY): सब्सिडी वाले होम लोन के लिए पात्रता जांचें। आधिकारिक पोर्टल: http://pmaymis.gov.in/
- RBI का ऋण कैलकुलेटर: अपनी क्षमता के अनुसार ईएमआई की गणना करें। लिंक: RBI EMI Calculator
2. लोन की अवधि और ईएमआई का गलत चुनाव: जल्दबाजी में न लें फैसला
कम ब्याज देने के चक्कर में कम अवधि का और ऊंची ईएमआई वाला लोन लेना एक बड़ी गलती हो सकती है।
क्या करें:
- लंबी अवधि चुनें: शुरुआत में 20-25 साल के लोन की अवधि चुनने में संकोच न करें। इससे ईएमआई कम रहेगी और मासिक बोझ नहीं बनेगी। भविष्य में आय बढ़ने पर आप प्री-पेमेंट कर अवधि घटा सकते हैं।
- ब्याज दर का प्रकार: फिक्स्ड रेट (स्थिर ब्याज दर) और फ्लोटिंग रेट (परिवर्तनशील ब्याज दर) के फायदे-नुकसान समझें। वर्तमान में, अधिकतर बैंक फ्लोटिंग रेट पर ही ऋण देते हैं।
- क्लोजिंग कॉस्ट: लोन स्वीकृत होने पर प्रोसेसिंग फीस, टेक्निकल और लीगल चार्जेस, स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्जेस आदि का अलग से बजट बनाएं। यह प्रॉपर्टी की लागत का 5-8% तक हो सकता है।
3. इमरजेंसी फंड की अनदेखी: अप्रत्याशित के लिए तैयार रहें
घर और लोन के बीच इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) की अवधारणा को नजरअंदाज करना खतरनाक है।
क्या करें:
- कम से कम 6-12 महीने का खर्च जमा करें: अपने परिवार के मासिक खर्च के हिसाब से एक अलग तरल फंड (Liquid Fund या सावधि जमा) बनाए रखें।
- घर की मरम्मत व रखरखाव: नया घर लेने के बाद भी छोटी-मोटी मरम्मत, पेंटिंग, फर्निशिंग आदि पर खर्च आता रहता है। इसके लिए भी कुछ राशि अलग रखें।
4. प्रॉपर्टी चुनते समय केवल कीमत पर ध्यान देना
सस्ता घर हमेशा अच्छा सौदा नहीं होता। लोकेशन (Location) और जरूरतें (Needs) प्राथमिकता होनी चाहिए।
क्या करें:
- कनेक्टिविटी: ऑफिस, स्कूल, हॉस्पिटल, बाजार और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूरी जांचें।
- भविष्य की योजनाएं: उस इलाके में मेट्रो, हाइवे, कॉमर्शियल हब आदि के भविष्य के प्रोजेक्ट्स के बारे में पता करें। इससे प्रॉपर्टी के भविष्य के मूल्य (Appreciation) का अंदाजा लगेगा।
- बुनियादी सुविधाएं: 24×7 पानी, बिजली, सीवेज लाइन, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और सुरक्षा की स्थिति जांचें।
संसाधन:
- नगर निगम/विकास प्राधिकरण (जैसे DDA, MMRDA) की आधिकारिक वेबसाइट पर मास्टर प्लान देखें।
5. मार्केट रिसर्च और तुलनात्मक विश्लेषण न करना
केवल बिल्डर या ब्रोकर की बातों पर भरोसा कर लेना महंगा पड़ सकता है।
क्या करें:
- कम्पेरेटिव मार्केट एनालिसिस (CMA): आसपास की समान प्रॉपर्टीज की कीमत, उनकी बिक्री दर (स्पीड), और सुविधाओं की तुलना करें।
- ऑनलाइन पोर्टल्स का उपयोग: Magicbricks, 99acres, Housing.com जैसी वेबसाइट्स पर रेट ट्रेंड और प्राइसिंग इंसाइट्स देखें।
- बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड: बिल्डर के पिछले प्रोजेक्ट्स, डिलीवरी का समय और ग्राहक शिकायतों के बारे में शोध करें। RERA वेबसाइट इसके लिए एक बेहतरीन स्रोत है।
महत्वपूर्ण लिंक:
- RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) राज्यवार पोर्टल: प्रोजेक्ट की अथेंटिसिटी और बिल्डर के डिटेल्स चेक करें। उदा. महाराष्ट्र RERA: https://maharera.mahaonline.gov.in/
6. क्रेडिट स्कोर को नजरअंदाज करना
क्रेडिट स्कोर (Credit Score/CIBIL Score) आपकी ऋण लेने की क्षमता का पासपोर्ट है। खराब स्कोर ऋण अस्वीकृति या उच्च ब्याज दर का कारण बन सकता है।
क्या करें:
- घर देखने से पहले स्कोर चेक करें: नियमित रूप से अपना क्रेडिट रिपोर्ट मुफ्त में देखें।
- 750+ का स्कोर लक्ष्य: अच्छी ब्याज दर पाने के लिए 750 या उससे ऊपर का स्कोर आदर्श माना जाता है।
- सुधार के उपाय: समय पर बिल भरें, क्रेडिट कार्ड लिमिट का 30% से कम उपयोग करें, बार-बार नए क्रेडिट के लिए आवेदन न करें।
मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट के स्रोत:
- CIBIL: https://www.cibil.com/freecibilscore
- Experian: https://www.experian.in/
- अन्य: OneScore, BankBazaar आदि ऐप्स।
7. कानूनी और दस्तावेजी जांच में कोताही
यह सबसे गंभीर और महंगी गलती हो सकती है, जिससे प्रॉपर्टी पर आपका कानूनी हक भी चला जा सकता है।
क्या करें (दस्तावेजों की सूची):
- टाइटल डीड (Title Deed): यह सुनिश्चित करें कि विक्रेता के पास संपत्ति का स्पष्ट और मुक्त स्वामित्व (Clear and Marketable Title) है।
- मकान नक्शा/ब्लू प्रिंट (Building Plan): यह लोकल अथॉरिटी (म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन) द्वारा अनुमोदित हो।
- ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate): निर्माण पूरा होने के बाद बिल्डर से यह सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। बिना OC के प्रॉपर्टी में रहना कानूनन गलत है।
- नॉन-एग्रीकल्चर (NA) पर्मिशन: यदि जमीन कृषि योग्य थी, तो उसे NA में बदलने का प्रमाण हो।
- लोकल अथॉरिटी के टैक्स रसीद: सभी पिछले प्रॉपर्टी टैक्स और बिल भरे गए हों।
- RERA रजिस्ट्रेशन: नए प्रोजेक्ट्स के लिए RERA वेबसाइट पर प्रोजेक्ट और एजेंट के रजिस्ट्रेशन नंबर वेरिफाई करें।
सलाह: इन सभी दस्तावेजों की जांच के लिए एक विश्वसनीय वकील (Real Estate Lawyer) की सेवा अवश्य लें। यह खर्च बचाने की चीज नहीं है।
8. फिजिकल इन्स्पेक्शन और बिल्डर की रिप्यूटेशन न जांचना
ऑनलाइन फोटो और सैंपल फ्लैट देखकर सौदा पक्का कर लेना जोखिम भरा है।
क्या करें:
- अलग-अलग समय पर जाएं: प्रॉपर्टी का निरीक्षण दिन के समय, शाम को और यदि संभव हो तो बारिश के मौसम में भी करें। इससे प्राकृतिक रोशनी, आसपास का शोर, पानी भरने जैसी समस्याओं का पता चलेगा।
- कंस्ट्रक्शन क्वालिटी: दीवारों, फर्श, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल फिटिंग्स की गुणवत्ता जांचें।
- बिल्डर का पिछला रिकॉर्ड: बिल्डर के पुराने प्रोजेक्ट्स में रहने वाले लोगों से बात करें। पूछें कि डिलीवरी में देरी हुई या नहीं, पोस्ट-पोज़ेशन सर्विस कैसी है, क्या कोई मुकदमेबाजी चल रही है।
निष्कर्ष: सावधानी ही सफलता की कुंजी है
पहली बार घर खरीदने की प्रक्रिया जटिल जरूर है, लेकिन सूचित निर्णय (Informed Decision) लेकर और इन 8 आम गलतियों से बचकर आप इसे एक सुखद और सुरक्षित अनुभव बना सकते हैं। याद रखें, “खरीदने में जितनी देर लगाएंगे, पछताने के उतने ही कम मौके मिलेंगे।”
थोड़ा अतिरिक्त समय शोध में लगाएं, विशेषज्ञों से सलाह लें और अपने दिल के बजाय दिमाग से फैसला करें। यह घर न सिर्फ आपका निवेश है, बल्कि आपके परिवार के सुखद भविष्य की नींव भी है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। प्रॉपर्टी खरीदने से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार और रियल एस्टेट वकील से परामर्श अवश्य लें।
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