प्रॉपर्टी बेचने पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स से बचें! जानें सेक्शन 54, 54EC, 54F के नियम, 12.5% टैक्स ऑप्शन, CII 376 इंडेक्सेशन चार्ट और CGAS प्रक्रिया। REC/NHAI बॉन्ड में ₹50 लाख निवेश का मौका।

जब प्रॉपर्टी बेचना ही मुनाफा और मुनाफा ही टैक्स बन जाए
दोस्तों, अक्सर ऐसा होता है कि हम अपनी जमीन-जायदाद, मकान या दुकान को मजबूरी में या फिर अच्छा रिटर्न देखकर बेच देते हैं। आपने ₹1 करोड़ में प्रॉपर्टी बेची, जो आपने कभी ₹50 लाख में ली थी। बधाई हो! ₹50 लाख का मुनाफा तो हुआ, लेकिन अब सवाल उठता है कि इस मुनाफे पर टैक्स का क्या?
कई लोग सोचते हैं, “पैसा तो हाथ में आया, अब सरकार को क्या देना?” लेकिन दोस्तों, इनकम टैक्स एक्ट की नजर में यह कैपिटल गेन है, और इसे छिपाना न पड़े भारी । अगर आपने बिना प्लानिंग के पैसा बैंक में डाल दिया या कहीं और इन्वेस्ट कर दिया, तो आईटीआर भरते वक्त सेक्शन 234B और 234C का ब्याज आपको परेशान कर सकता है।
आज इस ब्लॉग में बताई गई तीनों एक्सक्लूसिव डिडक्शन्स (धारा 54, 54EC और 54F) को डीटेल में समझेंगे। साथ ही, हम 23 जुलाई 2024 के बजट के बाद लागू हुए 12.5% टैक्स रेट और इंडेक्सेशन के ऑप्शन का पूरा गणित आपके सामने रखेंगे ।
भाग 1: कैपिटल गेन की बेसिक समझ – शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म (नियम 2026)
सबसे पहली बात, टैक्स बचाने का रास्ता तभी खुलेगा जब आपकी प्रॉपर्टी लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट हो। पीरियड ऑफ होल्डिंग यानी आपने प्रॉपर्टी को कितने दिन अपने पास रखा, यह डिसाइड करता है कि आपको कितना टैक्स देना है।
नियम (वित्त वर्ष 2025-26 के लिए):
- शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर आपने प्रॉपर्टी खरीदने के 24 महीने (2 साल) के अंदर बेच दी। इसे आपकी सामान्य आय में जोड़ा जाएगा और आपके इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा (सबसे ज्यादा 30% तक)। इस पर कोई इंडेक्सेशन या सेक्शन 54/54EC की छूट नहीं मिलती ।
- लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): अगर आपने प्रॉपर्टी 24 महीने से ज्यादा अपने पास रखने के बाद बेची। इसी पर टैक्स सेविंग का पूरा खेल है ।
भाग 2: LTCG पर कैलकुलेशन का नया गणित (2024 बजट के बाद)
23 जुलाई 2024 का दिन याद रखिए। इस दिन सरकार ने बड़ा बदलाव किया। अब प्रॉपर्टी सेल पर LTCG टैक्स की दो व्यवस्थाएं हैं, जिसमें से आपको जो फायदेमंद लगे, वो चुन सकते हैं :
- विकल्प 1 (नई व्यवस्था): 12.5% टैक्स बिना इंडेक्सेशन के।
- विकल्प 2 (पुरानी व्यवस्था): 20% टैक्स इंडेक्सेशन के साथ।
लेकिन क्या है ये इंडेक्सेशन? (CII चार्ट के साथ)
इंडेक्सेशन यानि महंगाई की मार को टैक्स से अलग करना। सरकार हर साल कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स (CII) जारी करती है। मान लीजिए आपने 2014-15 में प्रॉपर्टी खरीदी, तो उस वक्त की कीमत को 2025-26 के CII से गुणा करके आज की लागत बढ़ा दी जाती है, जिससे मुनाफा कम दिखता है और टैक्स घट जाता है .
नवीनतम CII इंडेक्स (वित्त वर्ष 2025-26 के लिए):
| वित्त वर्ष | CII (लागत मूल्य सूचकांक) |
|---|---|
| 2001-02 | 100 |
| 2010-11 | 167 |
| 2015-16 | 254 |
| 2020-21 | 301 |
| 2023-24 | 348 |
| 2024-25 | 363 |
| 2025-26 | 376 (अनुमोदित) |
(नोट: वीडियो में 148 और 376 का जो अंतर बताया गया, वह अलग-अलग वर्षों के संदर्भ में था। ऊपर दिया गया CII 2025-26 का 376 सबसे लेटेस्ट है)
👉 केस स्टडी: कौन-सा ऑप्शन देता है ज्यादा फायदा? (₹1 करोड़ की सेल पर)
मान लीजिए:
- खरीद: अप्रैल 2015 में ₹30,00,000 (CII 254)
- बिक्री: अप्रैल 2025 में ₹1,00,00,000 (CII 363)
- इंप्रूवमेंट: ₹5,00,000 (2018 में, CII 280)
टैक्स कैलकुलेशन चार्ट:
| विवरण | 12.5% (बिना इंडेक्सेशन) | 20% (इंडेक्सेशन के साथ) |
|---|---|---|
| बिक्री मूल्य | ₹1,00,00,000 | ₹1,00,00,000 |
| कम: ट्रांसफर खर्च | (माना ₹0) | (माना ₹0) |
| कम: अधिग्रहण लागत | ₹30,00,000 | ₹42,87,402 (30L × 363/254) |
| कम: इंप्रूवमेंट लागत | ₹5,00,000 | ₹6,48,214 (5L × 363/280) |
| करयोग्य LTCG | ₹65,00,000 | ₹50,64,384 |
| लागू टैक्स दर | 12.5% | 20% |
| टैक्स राशि | ₹8,12,500 | ₹10,12,877 |
| फैसला | ✅ बेहतर (कम टैक्स) | ❌ |
निष्कर्ष: ज्यादातर मामलों में अब 12.5% वाला ऑप्शन फायदेमंद है, जब तक कि आपने प्रॉपर्टी बहुत पुरानी (20-30 साल पहले) न ली हो ।
भाग 3: टैक्स जीरो करने की तीन तलवारें – Section 54, 54EC, 54F
वीडियो में आपने तीन सेक्शन के बारे में सुना। आइए, सर्च रिजल्ट से क्रॉस वेरिफाई करके हर एक का सटीक अंतर और नियम जान लें।
1. सेक्शन 54: पुराना घर बेचा, नया घर लिया
- किसे मिलेगा? केवल व्यक्ति (Individual) और HUF को ।
- क्या बेचा? केवल आवासीय संपत्ति (Residential House) .
- कहां निवेश? दूसरी आवासीय संपत्ति में।
- लिमिट: पूरे जीवनकाल में एक बार अगर LTCG ₹2 करोड़ से कम है तो दो घर खरीद सकते हैं, वरना सिर्फ एक। अधिकतम छूट सीमा ₹10 करोड़ ।
- समय सीमा:
- खरीदना: बिक्री के 1 साल पहले से 2 साल बाद तक।
- बनवाना: बिक्री के 3 साल के अंदर।
- CGAS: अगर समय सीमा में नहीं खरीद पा रहे, तो आईटीआर भरने से पहले पैसा कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम (CGAS) में जमा कराएं ।
2. सेक्शन 54EC: बिना घर लिए बॉन्ड में पैसा लगाकर बचाएं टैक्स
- किसे मिलेगा? सभी को (Individual, HUF, Company, LLP)। यह वीडियो का स्पेशल पॉइंट है ।
- क्या बेचा? कोई भी लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट (लैंड या बिल्डिंग) – चाहे कमर्शियल हो या रेजिडेंशियल ।
- कहां निवेश? सरकार द्वारा नोटिफाइड बॉन्ड्स में।
- लिमिट: अधिकतम ₹50 लाख प्रति वित्तीय वर्ष।
- समय सीमा: प्रॉपर्टी बेचने के 6 महीने के अंदर निवेश करना होगा ।
- लॉक-इन: 5 साल तक बेचा या ट्रांसफर नहीं कर सकते ।
📌 आधिकारिक लिंक (सीधे REC और HDFCsec से):
- REC 54EC Bonds: https://recindia.nic.in/54EC
- PFC / IRFC / REC बॉन्ड फॉर्म: https://www.hdfcsec.com/productpage/54-ec
- ब्याज दर: लगभग 5.25% सालाना (टैक्सेबल) .
3. सेक्शन 54F: प्लॉट, फ्लैट, कमर्शियल प्रॉपर्टी बेचकर घर लेना
- किसे मिलेगा? केवल व्यक्ति (Individual) और HUF (वीडियो में बताए अनुसार) ।
- क्या बेचा? कोई भी लॉन्ग टर्म एसेट, लेकिन आवासीय मकान नहीं। (अगर आपने कोई प्लॉट या जूलरी बेचा और मकान लिया)।
- नियम: बिक्री की पूरी बिक्री राशि (Net Sale Consideration) नए घर में लगानी होगी, सिर्फ प्रॉफिट नहीं ।
- शर्त: बेचने की तारीख पर आपके पास एक से ज्यादा घर नहीं होना चाहिए (नया घर खरीदने के बाद सिर्फ 1 ही घर हो सकता है, बेचे हुए को छोड़कर)।
भाग 4: कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम (CGAS) – वीडियो का सबसे जरूरी सेविंग टूल
दोस्तों, वीडियो में जिस कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम की बात हुई, यह बहुत कम लोग इस्तेमाल करते हैं। अगर आपने 1 दिसंबर 2025 को प्रॉपर्टी बेची और अप्रैल-मई 2026 तक आपको सही प्रॉपर्टी नहीं मिली, तो 31 जुलाई 2026 (आईटीआर की डेडलाइन) से पहले यह पैसा सरकारी बैंक में CGAS अकाउंट में जमा करा दीजिए ।
CGAS के दो प्रकार:
- टाइप A (सेविंग्स): धीरे-धीरे पैसा निकालना हो तो।
- टाइप B (टर्म डिपॉजिट): लंपसम पैसा रखना हो तो।
पेनाल्टी: अगर 2 साल (खरीदने के लिए) या 3 साल (बनवाने के लिए) में पैसा यूज़ नहीं किया, तो जितना पैसा यूज़ नहीं हुआ, वह उस साल की आपकी इनकम में जुड़ जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा ।
भाग 5: स्पेशल केस – गिफ्टेड प्रॉपर्टी और पुरानी प्रॉपर्टी (2001 से पहले की)
वीडियो में एक्सपर्ट ने बहुत अच्छा सवाल उठाया था कि अगर प्रॉपर्टी गिफ्ट में मिली या 1990 में खरीदी थी तो क्या होगा?
- गिफ्ट/विरासत: पूर्व मालिक के खरीद की तारीख और लागत ही आपकी लागत मानी जाएगी। होल्डिंग पीरियड भी पूर्व मालिक के समय से गिना जाएगा ।
- 1 अप्रैल 2001 से पहले की प्रॉपर्टी: अगर आपके पास खरीद के कागजात नहीं हैं, तो आप 1 अप्रैल 2001 की फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) को कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन मान सकते हैं। यह वैल्यू रजिस्टर्ड वैल्यूअर से प्रमाणित करानी होगी ।
निष्कर्ष: ITR भरना न भूलें, एक्सपर्ट की मदद लें
दोस्तों, लाखों-करोड़ों का ट्रांजैक्शन है। स्टाम्प पेपर पर 50 लाख लिखा है और बाकी कैश लिया है, यह रास्ता टैक्स चोरी है, बचत नहीं। आज के समय में रजिस्ट्रार की रिपोर्ट सीधे इनकम टैक्स के पोर्टल पर आती है। अगर आपकी AIS (Annual Information Statement) में प्रॉपर्टी सेल दिख रही है और ITR में कैपिटल गेन नहीं दिखाया, तो नोटिस पक्का है।
इसलिए:
- सेल डीड, पुरानी रसीदें, CGAS पासबुक और बॉन्ड सर्टिफिकेट संभालकर रखें।
- ITR-2 या ITR-3 (अगर बिजनेस है) में कैपिटल गेन सही-सही भरें।
- किसी प्रोफेशनल CA से सलाह लें।
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