एक सिविल इंजिनियर की सच्ची कहानी – बिना OTP, लिंक या कॉल दिए, 10 मिनट में 5.2 लाख रुपये कैसे गायब हुए? जानिए UPI फ्रॉड के 5 नए तरीके और बचाव के सुनहरे नियम। साइबर फ्रॉड से बचने के लिए अभी पढ़ें।

मैं आज आपको एक ऐसी सच्ची घटना (फ्रॉड)के बारे में बताने जा रहा हूँ, जिसे सुनकर आपकी रूह काँप जाएगी। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हमारे आसपास की एक कड़वी हकीकत है।
कुछ दिन पहले, 20 जनवरी 2026 की शाम को, कर्नाटक में रहने वाले एक सिविल इंजीनियर चेतन कुमार के साथ कुछ ऐसा हुआ जो उनकी ज़िंदगी का सबसे डरावना अनुभव था। शाम के लगभग साढ़े सात बजे, उनके फोन पर एक एसएमएस आया – उनके बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से ₹48,000 निकाले गए थे।
चेतन को लगा शायद कोई गलती हुई है। लेकिन उन्हें सोचने का मौका भी नहीं मिला। कुछ ही सेकंड बाद दूसरा एसएमएस – अब ₹52,000 और निकाले गए। और फिर तीसरा – ₹64,000 का।
यह सिलसिला अगले 10 मिनट तक बिना रुके चलता रहा। आखिरकार, जब यह बारिश थमी, तो चेतन के दोनों बैंक खातों (बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ कर्नाटक) से कुल ₹5.2 लाख गायब हो चुके थे।
सबसे हैरानी की बात यह थी कि चेतन ने कुछ भी गलत नहीं किया था। उन्होंने न तो कहीं ओटीपी डाला था, न किसी लिंक पर क्लिक किया था, न क्यूआर कोड स्कैन किया था, और न ही किसी अजनबी कॉल को उठाया था। फिर भी, उनकी मेहनत की कमाई पलक झपकते हवा हो गई।
आप सोच रहे होंगे – “पुलिस शिकायत कर दी होगी, पैसे वापस आ गए होंगे।” लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसे 90% मामलों में पैसा कभी वापस नहीं आता।
यूपीआई फ्रॉड : कुछ चौंकाने वाले आँकड़े
2025-26 के दौरान, भारत में हर रोज़ 70 करोड़ से ज़्यादा यूपीआई लेनदेन होते हैं। इसी दौरान 6.32 लाख यूपीआई फ्रॉड के मामले सामने आए, जिससे लोगों का लगभग 485 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। डरावनी बात यह है कि इन चोरी हुए पैसों में से सिर्फ 6 से 10% ही वापस मिल पाते हैं।
सीधे शब्दों में कहूँ तो, अगर आप ऐसे किसी घोटाले के शिकार हो जाते हैं, तो 93% संभावना है कि आपका पैसा हमेशा के लिए गया समझिए।
पैसे कहाँ गायब होते हैं? एक जटिल नेटवर्क
हम अक्सर सोचते हैं कि स्कैमर सीधा कॉल करके पैसे माँगते होंगे। पर असलियत बिल्कुल अलग है। यह एक पूरी तरह संगठित नेटवर्क है, जैसे कोई पार्सल डिलीवरी सिस्टम हो।
समझिए ऐसे: जब आपका पैसा आपके खाते से निकलता है, तो वह सीधे स्कैमर के पास नहीं जाता। पहले वह “म्यूल अकाउंट्स” में जाता है – ये वे खाते होते हैं जो अक्सर छात्रों या गरीब लोगों के नाम पर खुलवाए जाते हैं और किराए पर दिए जाते हैं।
फिर यह पैसा कई अलग-अलग खातों में बँट जाता है। कुछ से गिफ्ट कार्ड खरीदे जाते हैं, कुछ से क्रिप्टोकरेंसी, कुछ विदेश भेजे जाते हैं। यह सब इसलिए किया जाता है ताकि पैसे की असल राह ढूँढना पुलिस के लिए नामुमकिन हो जाए। आप चोर को शायद पकड़ भी लें, पर पैसे को नहीं पकड़ पाएँगे।
स्कैमर्स के 5 पसंदीदा तरीके
- कलेक्ट रिक्वेस्ट स्कैम (चेतन के साथ यही हुआ): स्कैमर आपको “रिसीव मनी” का रिक्वेस्ट भेजता है और कहता है कि पिन डालने से पैसे आ जाएँगे। आप पिन डालते हैं और पैसे चले जाते हैं।
- क्यूआर कोड फ्रॉड: कोई फेक क्यूआर कोड स्कैन करवाकर आपको नकली पेमेंट पेज पर ले जाता है, जहाँ आपकी पिन चोरी हो जाती है।
- फिशिंग लिंक: “आपका KYC अपूर्ण है” या “अकाउंट ब्लॉक होगा” जैसे एसएमएस के ज़रिए आपको नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है, जहाँ आप अपनी सारी जानकारी डाल देते हैं।
- स्क्रीन शेयरिंग: AnyDesk जैसे ऐप इंस्टॉल करवाकर स्कैमर आपके फोन पर कंट्रोल ले लेता है और आपके ओटीपी तक पहुँच जाता है।
- फेक कस्टमर केयर: “आपको रिफंड मिला है, ओटीपी बताइए” – ऐसे कॉल पर ओटीपी बताते ही पैसे गायब।
2026 का नया खतरा: AI वॉइस स्कैम
अब तो स्कैमर्स ने AI तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। वे AI से जेनरेट की गई पुलिस अधिकारी की आवाज़ में फोन करते हैं: “मैं कर्नाटक पुलिस से बोल रहा हूँ, आपका बैंक खाता खतरे में है…” और फिर आपको डराकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। इसी तरीके से एक आईटी प्रोफेशनल के ₹31.83 करोड़ चोरी हुए!
आपका बचाव: याद रखें ये 5 सुनहरे नियम
- पैसे आने के लिए कभी पिन न दें: कोई भी आपको पैसा भेजने के लिए आपकी UPI पिन नहीं माँगता। अगर कोई माँगे, तो समझ जाइए कि यह धोखाधड़ी है।
- कभी भी लिंक पर क्लिक करके पेमेंट न करें: हमेशा सीधे PhonePe, Google Pay या अपने बैंक ऐप में जाकर ही पेमेंट करें।
- WhatsApp से ऐप न डाउनलोड करें: कोई भी “बिजली बिल भरने का ऐप” या ऐसा ही कुछ WhatsApp पर भेजे, तो बिल्कुल न डाउनलोड करें। सिर्फ Play Store से ही ऐप डाउनलोड करें।
- UPI लिमिट सेट करें: अपने बैंक ऐप में जाकर दैनिक लेनदेन सीमा कम कर दें (जैसे ₹2000 प्रति दिन)। इससे नुकसान सीमित रहेगा।
- स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स से दूर रहें: किसी अजनबी के कहने पर AnyDesk जैसा कोई भी ऐप कभी न इंस्टॉल करें।
अगर फ्रॉड हो ही जाए, तो क्या करें?
- तुरंत बैंक को कॉल करें: अपना खाता फ़ौरन ब्लॉक करवाएँ।
- हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें: यह साइबर क्राइम की राष्ट्रीय हेल्पलाइन है।
- cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- पुलिस में रिपोर्ट करें: सभी ट्रांजैक्शन डिटेल्स के साथ।
याद रखें, पहले 1-2 घंटे सबसे अहम हैं। जितनी जल्दी कार्रवाई करेंगे, पैसे वापस मिलने की उम्मीद उतनी ही बढ़ जाएगी।
आखिरी बात
हमारे देश में डिजिटल भुगतान का चलन बढ़ रहा है, जो एक अच्छी बात है। लेकिन साथ ही, हमें सजग भी रहना होगा। यह कोई मुश्किल बात नहीं है – बस थोड़ी सी सावधानी की आदत डालनी है।
अपने परिवार और दोस्तों के साथ यह जानकारी ज़रूर शेयर करें। आपका एक शेयर किसी को बड़े नुकसान से बचा सकता है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

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