बच्चों के भविष्य के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने की पूरी गाइड। जानें नाबालिग का अकाउंट कैसे खोलें, आवश्यक दस्तावेज, टैक्स नियम, और बालिग होने पर क्या करें। SIP के जरिए लंबी अवधि में धन निर्माण की रणनीति।

हर माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता होती है अपने बच्चे का सुरक्षित भविष्य। आज के दौर में, जहां शिक्षा, कौशल विकास और करियर की लागत लगातार बढ़ रही है, केवल पारंपरिक बचत बैंक खाते पर्याप्त नहीं रह गए हैं। ऐसे में, नाबालिग बच्चों के नाम पर म्यूचुअल फंड में निवेश एक रणनीतिक और स्मार्ट विकल्प के रूप में उभरा है। यह न केवल दीर्घकालिक धन निर्माण करता है, बल्कि बच्चे के प्रमुख जीवन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक वित्तीय आधार भी तैयार करता है।
भारत में नाबालिग के नाम पर म्यूचुअल फंड: कानूनी ढांचा और संभावनाएं
भारतीय कानून के अनुसार, 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को ‘नाबालिग’ माना जाता है। हालांकि, नाबालिग भी वित्तीय संपत्ति के स्वामी हो सकते हैं, और म्यूचुअल फंड इसका एक प्रमुख उदाहरण है। सेबी (SEBI) के नियमों के तहत, एक नाबालिग अपने नाम पर म्यूचुअल फंड यूनिटों का पूर्ण स्वामित्व रख सकता है, भले ही लेनदेन एक कानूनी अभिभावक द्वारा किए जाते हों।
प्रमुख विशेषताएं:
– एकल स्वामित्व: नाबालिग का खाता केवल एकल धारक (सिंगल होल्डर) के रूप में ही खोला जा सकता है। संयुक्त खाते (जॉइंट अकाउंट) की अनुमति नहीं है।
– अभिभावक की भूमिका: खाते का संचालन माता, पिता या कानूनी अदालत द्वारा नियुक्त अभिभावक (गार्जियन) द्वारा किया जाता है।
– स्वामित्व हस्तांतरण: जैसे ही बच्चा 18 वर्ष का होता है, खाते का पूर्ण नियंत्रण और स्वामित्व स्वतः ही उसके पास चला जाता है। इसके बाद अभिभावक का कोई अधिकार नहीं रहता।
नाबालिग म्यूचुअल फंड अकाउंट खोलने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
चरण 1: फंड हाउस/दलाल (ब्रोकर) का चयन
एक विश्वसनीय म्यूचुअल फंड कंपनी या रजिस्ट्रार (जैसे CAMS, KFinTech) या एक पंजीकृत निवेश सलाहकार (RIA) चुनें।
चरण 2: आवश्यक दस्तावेजों का संग्रह
दस्तावेज दो श्रेणियों में आवश्यक हैं:
A. नाबालिग बच्चे के लिए:
1. पहचान प्रमाण: आधार कार्ड (सबसे आम), पासपोर्ट, या पैन कार्ड (यदि आवंटित हो)।
2. आयु प्रमाण: जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, या पासपोर्ट।
3. पता प्रमाण: आधार कार्ड या अभिभावक के पते का प्रमाण जिसमें बच्चे का नाम शामिल हो (यदि आधार उपलब्ध न हो)।
B. अभिभावक (गार्जियन) के लिए:
1. पहचान प्रमाण: पैन कार्ड (अनिवार्य), आधार कार्ड।
2. पता प्रमाण: आधार, पासपोर्ट, बिजली बिल, बैंक स्टेटमेंट (हाल के 3 महीने के भीतर)।
3. अभिभावकत्व प्रमाण:
– माता-पिता के लिए: बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र जिसमें माता-पिता के नाम हों।
– कानूनी अभिभावक के लिए: संबंधित अदालत का आदेश।
4. पासपोर्ट आकार की तस्वीरें (बच्चे और अभिभावक की)।
5. रद्द किया गया चेक या बैंक पासबुक की प्रति (निवेश/रिडेम्पशन के लिए बैंक खाते से लिंक करने हेतु)।
चरण 3: केवाईसी (KYC) प्रक्रिया पूरी करना
– अभिभावक को अपनी केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी (यदि पहले से नहीं की है)।
– नाबालिग के लिए अलग से केवाईसी आवश्यक नहीं है, लेकिन उसके दस्तावेज सत्यापित किए जाते हैं।
– केवाईसी ऑनलाइन (वीडियो केवाईसी) या ऑफलाइन (फॉर्म जमा करके) पूरी की जा सकती है।
चरण 4: आवेदन पत्र भरना और जमा करना
– नाबालिग के नाम पर विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया आवेदन पत्र भरें।
– ‘फर्स्ट/सोल होल्डर’ के रूप में बच्चे का नाम दर्ज करें।
– ‘गार्जियन’ के रूप में अभिभावक का विवरण दर्ज करें।
– नॉमिनी (नामांकित व्यक्ति) नियुक्त करना अनिवार्य है। यह माता-पिता में से कोई एक या कोई अन्य विश्वसनीय व्यक्ति हो सकता है।
चरण 5: प्रारंभिक निवेश करना
– अकाउंट सक्रिय होने के बाद, आप बच्चे के बैंक खाते या अभिभावक के बैंक खाते के माध्यम से निवेश शुरू कर सकते हैं।
– एकमुश्त निवेश (Lumpsum) या एसआईपी (SIP – Systematic Investment Plan) दोनों में से चुनाव करें।
निवेश के विकल्प और रणनीति: बुद्धिमानी से चुनाव करें
नाबालिग के खाते के लिए निवेश के सभी विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन रणनीति लक्ष्य और समय सीमा पर निर्भर करती है।
उपलब्ध निवेश मोड:
– SIP (मासिक/त्रैमासिक निवेश): अनुशासित निवेश के लिए आदर्श।
– लम्पसम निवेश: जैसे बचत हुई राशि, उपहार की राशि, आदि।
– STP (सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान): एक फंड से दूसरे फंड में धनराशि स्थानांतरित करने के लिए।
– SWP (सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान): बच्चे की नियमित जरूरतों (जैसे स्कूल फीस) के लिए।
लक्ष्य-आधारित फंड चयन:
अलग-अलग वित्तीय लक्ष्यों के लिए, निवेश की रणनीति भी भिन्न होनी चाहिए। यदि आपके बच्चे की उच्च शिक्षा जैसे इंजीनियरिंग या मेडिकल का लक्ष्य है, जिसका निवेश क्षितिज 10 से 15 वर्ष है, तो लार्ज-कैप या फ्लेक्सी-कैप फंड तथा इंडेक्स फंड जैसे मध्यम से उच्च जोखिम वाले विकल्प उपयुक्त रहते हैं। वहीं, विदेश में पढ़ाई जैसे लक्ष्य, जिसमें 12 से 18 वर्ष का लंबा समय होता है, के लिए एग्रेसिव हाइब्रिड या इक्विटी फंड जैसे उच्च जोखिम वाले उत्पादों पर विचार किया जा सकता है। शादी या पहला घर जैसे 15-20 वर्ष या उससे अधिक अवधि के लक्ष्यों के लिए मल्टी-कैप फंड या इक्विटी ओरिएंटेड फंड उच्च जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की संभावना प्रदान कर सकते हैं। सामान्य भविष्य निधि के लिए, जहाँ निवेश क्षितिज 10 वर्ष से अधिक है, वहाँ बैलेंस्ड एडवांटेज या डायनेमिक एसेट अलोकेशन फंड जैसे मध्यम जोखिम वाले फंड उपयुक्त हो सकते हैं। सामान्य सलाह यह है कि सात वर्ष से अधिक की लंबी अवधि के लिए इक्विटी-ओरिएंटेड फंड चुनने चाहिए, ताकि कंपाउंडिंग के फायदे और बाजार के विभिन्न चक्रों का पूरा लाभ मिल सके।
वित्तीय एवं कर (टैक्स) निहितार्थ: एक गहन विश्लेषण
A. नाबालिग अवस्था के दौरान:
– कर दायित्व: नाबालिग द्वारा अर्जित कोई भी आय (डिविडेंड या कैपिटल गेन) उसके माता-पिता की आय में जोड़ दी जाती है (जो अभिभावक है उसकी), और उन्हीं के कर स्लैब के अनुसार कर लगता है।
– छूट का प्रावधान: प्रति बच्चे प्रति वर्ष ₹1,500 तक की आय (धारा 10(32) के तहत) माता-पिता की आय में नहीं जोड़ी जाती। यह राशि नगण्य है।
– अपवाद: यदि बच्चे की अपनी कोई आय है (जैसे मॉडलिंग, अभिनय से), तो उस आय पर अलग से कर लगेगा।
B. बालिग होने के बाद (18 वर्ष की आयु):
– बच्चा एक स्वतंत्र करदाता बन जाता है।
– अब उसे व्यक्तिगत करदाता की सभी छूटों का लाभ मिलता है:
1. मूल कर छूट: वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनुसार ₹3 लाख तक की आय पर कोई कर नहीं।
2. दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) छूट: इक्विटी-ओरिएंटेड फंड से होने वाले LTCG पर ₹1,25,000 प्रति वर्ष तक कर मुक्त।
3. अलग स्लैब: अक्सर छात्रों की आय नहीं होती या कम होती है, जिससे उनका कर दायित्व शून्य या न्यूनतम रह जाता है।
टैक्स प्लानिंग टिप: बड़ी रिडेम्पशन (निकासी) बच्चे के बालिग होने के बाद करवाने से कर बचत हो सकती है।
18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर: महत्वपूर्ण संक्रमण (Transition)
यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है जिसके लिए अग्रिम तैयारी जरूरी है।
1. स्वतः रुक जाती हैं सभी SIP/STP: फोलियो फ्रीज हो जाता है। नई SIP नहीं शुरू की जा सकती और पुरानी SIP पर डेबिट नहीं होगा।
2. फोलियो स्थिति परिवर्तन: बच्चे को “नाबालिग से प्रमुख” (Minor to Major) में फोलियो स्थिति बदलने के लिए आवेदन देना होगा।
3. बच्चे की केवाईसी: बच्चे को अपनी स्वतंत्र केवाईसी पूरी करनी होगी (पैन और आधार से लिंक)।
4. बैंक विवरण: खाते को बच्चे के स्वयं के बैंक खाते से लिंक करना होगा।
5. अभिभावक का अधिकार समाप्त: इसके बाद अभिभावक खाते में कोई लेनदेन नहीं कर सकता। सभी अधिकार बच्चे को मिल जाते हैं।
अभिभावकों के लिए सलाह: बच्चे को 17-18 वर्ष की आयु में ही वित्तीय साक्षरता देना शुरू कर दें, ताकि वह इस जिम्मेदारी के लिए तैयार हो सके।
लाभ और सावधानियाँ
लाभ:
– दीर्घकालिक धन निर्माण: लंबी अवधि के कारण कंपाउंडिंग का शानदार लाभ।
– वित्तीय अनुशासन: लक्ष्य-आधारित निवेश से फंड का दुरुपयोग रुकता है।
– भावनात्मक लगाव से मुक्त निर्णय: अभिभावक बच्चे के लिए निवेश करते समय भावनाओं से अलग रहकर बेहतर वित्तीय निर्णय ले सकते हैं।
– बच्चे को वित्तीय शिक्षा: यह बच्चे के लिए निवेश और वित्त प्रबंधन सीखने का एक व्यावहारिक उपकरण बन सकता है।
सावधानियाँ एवं सलाह:
1. नियमित समीक्षा: साल में कम से कम एक बार पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और लक्ष्य के अनुसार समायोजन करें।2. बीमा का अलग से प्रबंध: बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अभिभावक का पर्याप्त जीवन बीमा होना चाहिए। म्यूचुअल फंड बीमा नहीं है।
3. नॉमिनेशन अनिवार्य है: हमेशा नॉमिनी नियुक्त करें।
4. जोखिम में विविधता (डायवर्सिफिकेशन): सभी अंडे एक टोकरी में न रखें। अलग-अलग फंड हाउस और श्रेणियों में निवेश करें।
5. दस्तावेजों की सुरक्षा: सभी स्टेटमेंट और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
निष्कर्ष
बच्चों के नाम पर म्यूचुअल फंड में निवेश करना आज का एक छोटा कदम, कल के एक विशाल सपने की नींव है। यह केवल धन जमा करने का तरीका नहीं, बल्कि अपने बच्चे के प्रति प्रेम, देखभाल और दूरदर्शिता का एक स्थायी प्रतीक है। सही योजना, अनुशासित निवेश और समय रहते शुरुआत करके, आप अपने बच्चे को न केवल एक सुरक्षित भविष्य, बल्कि एक मजबूत वित्तीय विरासत भी दे सकते हैं। आज ही एक एसआईपी शुरू करें, और समय को आपके बच्चे के पक्ष में काम करने दें।
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