बजट 2026 में Tax Slab नहीं बदले? कोई बात नहीं! इन 4 स्मार्ट तरीकों से घटाएं अपनी टैक्सेबल इनकम, बचाएं हजारों रुपये। NPS, Reimbursement और Salary Restructuring से पाएं राहत।

बजट 2026 का इंतजार कर रहे करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ी राहत न मिलने से मायूसी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि टैक्स बचाने के रास्ते अभी भी खुले हैं? असली गेम टैक्स स्लैब में नहीं, बल्कि आपके सैलरी स्ट्रक्चर और वित्तीय समझदारी में है। अगर आप नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में हैं और सोच रहे हैं कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, तो यह लेख आपके लिए है। यहां जानें वे 4 जादुई तरीके, जिनसे आप बिना किसी बड़े निवेश के अपनी टैक्सेबल इनकम को लाखों रुपये तक कम कर सकते हैं।
1. कॉर्पोरेट NPS: टैक्स बचाने का सबसे शक्तिशाली हथियार
इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन सेक्शन 80CCD(2) के तहत कॉर्पोरेट NPS टैक्स बचाने का सबसे बड़ा टूल है।
- कैसे काम करता है? आपका नियोक्ता (Employer) आपके NPS खाते में आपकी बेसिक सैलरी का 14% तक अतिरिक्त योगदान कर सकता है।
- टैक्स लाभ: यह पूरी राशि पूरी तरह से टैक्स-फ्री है और यह लाभ पुराने और नए, दोनों टैक्स रिजीम में उपलब्ध है।
- उदाहरण: अगर आपकी बेसिक सैलरी ₹15 लाख सालाना है और आपका एम्प्लॉयर 10% योगदान करता है, तो ₹1.5 लाख सीधे आपकी टैक्सेबल इनकम से घट जाएंगे। 30% स्लैब में यह ₹45,000 के टैक्स की बचत के बराबर है।
तुरंत एक्शन: अपने HR या फाइनेंस टीम से पूछें कि क्या आपकी कंपनी कॉर्पोरेट NPS की सुविधा देती है और अधिकतम लाभ कैसे उठा सकते हैं।
2. एम्प्लॉयर का EPF योगदान: छुपा हुआ टैक्स लाभ
नई टैक्स व्यवस्था में कर्मचारी के EPF योगदान पर कोई छूट नहीं मिलती, लेकिन एम्प्लॉयर के योगदान पर अब भी टैक्स लाभ मिलता है।
- कैसे काम करता है? आपकी सैलरी से काटे गए EPF के 12% में से आधा (6%) आपका योगदान होता है और आधा (6%) एम्प्लॉयर का। एम्प्लॉयर के उस 6% योगदान पर टैक्स नहीं लगता।
- उदाहरण: मासिक बेसिक सैलरी ₹50,000 मानें तो एम्प्लॉयर का EPF योगदान ₹3,000 मासिक यानी ₹36,000 सालाना होगा। यह राशि आपकी टैक्सेबल इनकम में नहीं जुड़ती। 20% स्लैब में यह ₹7,200 की टैक्स बचत है।
3. ‘लेट-आउट’ प्रॉपर्टी से होम लोन का फायदा
नए टैक्स रिजीम में खुद के रहने के लिए लिए गए होम लोन के ब्याज पर छूट नहीं मिलती। लेकिन, एक चालाक रास्ता है।
- नियम: अगर आपने कोई प्रॉपर्टी खरीदी है और उसे किराए पर दिया हुआ है, तो उस प्रॉपर्टी के होम लोन के ब्याज पर टैक्स लाभ मिल सकता है।
- कैसे काम करता है? आप किराए से होने वाली इनकम (House Property Income) में से होम लोन के ब्याज को घटा सकते हैं। इससे आपकी कुल टैक्सेबल इनकम कम हो जाती है।
- सावधानी: यह लाभ केवल तभी मिलेगा जब प्रॉपर्टी किराए पर है और किराए की आय ब्याज के बराबर या अधिक है।
4. सैलरी स्ट्रक्चर में रीइंबर्समेंट्स (Reimbursements) का जादू
यह सबसे प्रभावी तरीका है जिससे आपकी इन-हैंड सैलरी बढ़ेगी और टैक्स कम होगा। इन खर्चों के बिल जमा करके आप टैक्स-फ्री आय प्राप्त कर सकते हैं।
- फूड/मील कूपन्स: प्रति माह ₹2,200 से ₹3,000 तक का वाउचर टैक्स-फ्री मिल सकता है। सालाना ₹26,000-₹36,000 तक की बचत। (20% स्लैब में ₹5,200-₹7,200 टैक्स बचत)।
- कन्वेन्स अलाउंस: कार मैंटेनेंस और ड्राइवर का खर्च। सालाना ₹1.5 लाख तक का रीइंबर्समेंट मिल सकता है। (30% स्लैब में ₹45,000 की टैक्स बचत)।
- अन्य अलाउंस: कंपनी की पॉलिसी के अनुसार बुक, फोन/इंटरनेट बिल, यूनिफॉर्म, मेडिकल रीइंबर्समेंट आदि। इनसे मिलाकर प्रति माह ₹8,000-₹10,000 तक का अतिरिक्त लाभ लिया जा सकता है।
तुरंत एक्शन: अपने HR डिपार्टमेंट के साथ बैठक करें और अपने सैलरी स्ट्रक्चर को ऑप्टिमाइज करवाएं। जानें कि आपकी कंपनी कौन-कौन से रीइंबर्समेंट अलाउंस देती है और उनके लिए बिल जमा करने की प्रक्रिया क्या है।
निष्कर्ष: बजट पर निर्भर मत रहिए, खुद स्मार्ट बनिए
बजट 2026 में सीधी राहत न मिलना अंत नहीं है। टैक्स प्लानिंग एक सतत प्रक्रिया है और इसमें आपकी सक्रियता ही कुंजी है। उपरोक्त चार तरीके न केवल आपकी वित्तीय दक्षता बढ़ाएंगे, बल्कि कानूनी ढांचे के भीतर रहते हुए आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखेंगे। आज ही अपने HR और फाइनेंशियल प्लानर से बात करें और अपनी टैक्स स्ट्रैटेजी को मजबूत बनाएं। याद रखें, टैक्स बचाना एक कला है, और इसका फायदा वही उठाता है जो समय रहते प्लान करता है।

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