स्टार्टअप इंडिया योजना 2026 में रजिस्ट्रेशन के लिए पात्रता, आयकर में छूट (80IAC), पेटेंट में 80% रिबेट और सरकारी टेंडर में आसानी जानें।

आप भी एक उद्यमी हैं और इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। इसमें हम स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) के लिए पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) और रजिस्ट्रेशन के बाद मिलने वाले सभी प्रमुख लाभों (Benefits) के बारे में विस्तार से जानेंगे।
स्टार्टअप इंडिया योजना क्या है? (What is Startup India Scheme?)
स्टार्टअप इंडिया एक फ्लैगशिप योजना है जिसे भारत सरकार ने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करने और उनके लिए कारोबार करना आसान बनाने के लिए शुरू किया है। इस योजना के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को विभिन्न प्रकार की छूट, फंडिंग और सरलीकृत अनुपालन प्रक्रियाओं का लाभ मिलता है .
स्टार्टअप इंडिया में रजिस्ट्रेशन के लिए पात्रता (Eligibility for Startup India Registration)
अगर आप स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत पंजीकरण कराना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा :
- कंपनी का स्वरूप (Type of Company): आपकी कंपनी का पंजीकरण प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (Pvt Ltd Co), लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP), या रजिस्टर्ड पार्टनरशिप फर्म के रूप में होना चाहिए । सोल प्रोपराइटरशिप इसके लिए पात्र नहीं है।
- कंपनी की उम्र (Age of Company): आपके कंपनी के निगमन (इन्कॉर्पोरेशन) की तारीख से 10 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए । यानी कंपनी की स्थापना को 10 साल से ज्यादा नहीं हुआ होना चाहिए।
- वार्षिक कारोबार (Annual Turnover): कंपनी का वार्षिक कारोबार (टर्नओवर) 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए ।
- मूल व्यवसाय से पृथक्करण (No Reconstruction/Split): आपका व्यवसाय किसी मौजूदा व्यवसाय के विभाजन या पुनर्गठन (स्प्लिटिंग या रिकंस्ट्रक्शन) से नहीं बना होना चाहिए। यह एक नया और स्वतंत्र व्यवसाय होना चाहिए ।
- नवाचार और विस्तार योग्य मॉडल (Innovation and Scalable Model): आपका बिजनेस मॉडल नवाचार (इनोवेटिव) पर आधारित होना चाहिए, जिसमें विस्तार (स्केलेबिलिटी) की संभावना हो। इसका उद्देश्य धन सृजन (वेल्थ जनरेशन) और रोजगार सृजन (एम्प्लॉयमेंट जनरेशन) होना चाहिए ।
स्टार्टअप इंडिया रजिस्ट्रेशन के बाद मिलने वाले लाभ (Benefits of Startup India Registration)
एक बार जब आपका स्टार्टअप DPIIT (Department for Promotion of Industry and Internal Trade) द्वारा मान्यता प्राप्त हो जाता है, तो आपको कई सरकारी लाभ मिलते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं:
1. आयकर में छूट (Income Tax Exemption) – धारा 80IAC
स्टार्टअप इंडिया योजना का सबसे बड़ा वित्तीय लाभ आयकर में मिलने वाली छूट है ।
- कर अवकाश (Tax Holiday): आयकर अधिनियम की धारा 80IAC के तहत पात्र स्टार्टअप्स को स्थापना के पहले 10 वर्षों में से किन्हीं 3 लगातार वर्षों के लिए 100% कर छूट (टैक्स होलिडे) का लाभ मिलता है ।
- महत्वपूर्ण शर्त: यह छूट केवल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या LLP को ही मिलती है, पार्टनरशिप फर्म को नहीं । साथ ही, इस छूट का लाभ लेने के लिए DPIIT मान्यता के अलावा, स्टार्टअप को एक अलग से फॉर्म 10CCB भरना होता है और आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इस छूट को क्लेम करना होता है ।
2. एंजेल टैक्स में छूट (Angel Tax Exemption) – धारा 56(2)(viib)
पहले स्टार्टअप्स के लिए एंजेल टैक्स (अधिक मूल्य पर शेयर जारी करने पर टैक्स) एक बड़ी बाधा हुआ करती थी ।
- मौजूदा स्थिति: हालांकि, केंद्रीय बजट 2024 में एंजेल टैक्स को 1 अप्रैल 2025 से समाप्त कर दिया गया है। इसलिए अब इस तारीख के बाद शेयर जारी करने पर कोई एंजेल टैक्स नहीं लगेगा ।
- पहले का प्रावधान: इससे पहले, DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को फॉर्म-2 के माध्यम से इस टैक्स से छूट मिल जाती थी, बशर्ते कुल शेयर प्रीमियम 25 करोड़ रुपये से अधिक न हो ।
3. पेटेंट और ट्रेडमार्क में छूट एवं सुरक्षा (IPR Benefits)
स्टार्टअप की इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के क्षेत्र में भी बड़ी छूट दी है ।
- तेजी से पंजीकरण (Fast-track): स्टार्टअप्स के पेटेंट और ट्रेडमार्क आवेदनों की जांच तेजी से (फास्ट-ट्रैक मोड) की जाती है ।
- पेटेंट में 80% छूट: पेटेंट फाइल करने की कुल लागत में स्टार्टअप्स को 80% की भारी छूट दी जाती है ।
- सुविधाकर्ता शुल्क (Facilitator Fees): पेटेंट या ट्रेडमार्क फाइल करने में मदद के लिए सरकार की ओर से सुविधाकर्ता (फैसिलिटेटर) नियुक्त किए जाते हैं। स्टार्टअप को केवल सरकारी शुल्क देना होता है, जबकि फैसिलिटेटर का शुल्क सरकार वहन करती है ।
4. स्व-प्रमाणन (Self-Certification) की सुविधा
स्टार्टअप्स को 6 श्रम कानूनों (Labour Laws) और 3 पर्यावरण कानूनों (Environmental Laws) के तहत स्व-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) की सुविधा दी गई है ।
- निरीक्षण से मुक्ति: इसका मतलब है कि शुरुआती 3 से 5 सालों तक इन कानूनों के तहत आपके यूनिट का कोई निरीक्षण (इंस्पेक्शन) नहीं किया जाएगा। निरीक्षण केवल तभी किया जा सकता है जब उल्लंघन (वायलेशन) की ठोस और सत्यापन योग्य शिकायत मिले ।
- लागू कानून: इनमें प्रमुख रूप से भवन निर्माण श्रमिक अधिनियम, अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिक अधिनियम, EPF अधिनियम, ESI अधिनियम जैसे कानून शामिल हैं ।
5. सरकारी निविदाओं में आसानी (Easy Government Procurement Norms)
सरकारी कंपनियां और विभाग वस्तुएं और सेवाएं खरीदने के लिए निविदाएं (टेंडर) निकालते हैं। स्टार्टअप्स के लिए इनमें भाग लेना आसान बनाया गया है ।
- पूर्व अनुभव से छूट: विनिर्माण क्षेत्र के स्टार्टअप्स को सरकारी टेंडर में भाग लेने के लिए ‘पूर्व अनुभव’ या ‘पिछले कारोबार’ की शर्तों से छूट दी गई है ।
- EMD में छूट: DPIIT मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को सरकारी टेंडर भरते समय अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) जमा करने से भी छूट दी गई है । यह एक बड़ा नकदी लाभ (कैश फ्लो बेनिफिट) है।
6. आसान निकास (Easy Exit)
स्टार्टअप इंडिया योजना यह भी मानती है कि कई स्टार्टअप असफल हो सकते हैं। इसलिए इसमें आसान निकास (ईजी एक्जिट) का प्रावधान है ।
- त्वरित बंदी (Fast-track Winding Up): इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को आवेदन करने के 90 दिनों के भीतर अपना कारोबार बंद करने की अनुमति है । इससे उद्यमी का पूंजी जल्दी रिलीज हो जाती है और वह किसी नए विचार पर काम कर सकता है।
स्टार्टअप इंडिया में रजिस्ट्रेशन कैसे करें? (How to Register?)
स्टार्टअप इंडिया में पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है :
- व्यवसाय पंजीकरण: सबसे पहले अपना व्यवसाय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, LLP या पार्टनरशिप फर्म के रूप में पंजीकृत कराएं ।
- पोर्टल पर जाएं: स्टार्टअप इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट
www.startupindia.gov.inया नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) पोर्टलwww.nsws.gov.inपर जाएं । - आवेदन करें: स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भरें। इसमें आपको कंपनी का विवरण, निगमन प्रमाण पत्र (Certificate of Incorporation), PAN कार्ड, और आपके बिजनेस मॉडल की इनोवेशन और स्केलेबिलिटी के बारे में एक संक्षिप्त जानकारी (पिच डेक/बिजनेस प्लान) देनी होगी ।
- मिलेगा प्रमाण पत्र: आवेदन करने और दस्तावेज अपलोड करने के बाद, DPIIT द्वारा समीक्षा की जाती है। यदि सब कुछ सही पाया जाता है, तो 2-7 कार्य दिवसों के भीतर DPIIT मान्यता प्रमाण पत्र (Recognition Certificate) जारी कर दिया जाता है ।
निष्कर्ष (Conclusion)
स्टार्टअप इंडिया योजना भारत सरकार की एक सशक्त पहल है जो नए उद्यमियों को न केवल वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि उनके लिए कारोबार करना भी आसान बनाती है। टैक्स होलिडे से लेकर पेटेंट में 80% छूट, सेल्फ-सर्टिफिकेशन से लेकर सरकारी टेंडर में आसानी तक, यह योजना हर उस स्टार्टअप के लिए फायदेमंद है जो नवाचार और रोजगार सृजन के क्षेत्र में काम कर रहा है ।
अगर आपका स्टार्टअप पात्रता मानदंडों को पूरा करता है, तो आज ही इस योजना के तहत पंजीकरण कराएं और इन लाभों का हिस्सा बनें।
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