भारत में कृषि, PPF, EPF, SSY समेत 15 तरह की आय टैक्स-फ्री है। जानें कौन-सी इनकम पर नहीं लगता टैक्स, क्या हैं नियम और कैसे करें स्मार्ट टैक्स प्लानिंग।

हर साल फरवरी-मार्च का महीना आते ही टैक्सपेयर्स के मन में एक ही सवाल घूमने लगता है – टैक्स कैसे बचाएं? इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या कोई ऐसी कमाई भी है जिस पर टैक्स न लगे? अच्छी खबर यह है कि भारत में कुछ खास तरह की आय पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है ।
टैक्स प्लानिंग सभी टैक्सपेयर्स के लिए बेहद अहम है। आम सैलरीड कर्मचारी हो, बिजनेसमैन या फिर किसान – सभी के लिए कुछ टैक्स-फ्री इनकम विकल्प उपलब्ध हैं। अगर आप समझदारी से निवेश करें और नियम जान लें, तो कई तरह की आय पर आपको एक भी रुपया टैक्स नहीं देना पड़ेगा ।
वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए नई टैक्स व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। अब ₹12 लाख तक की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं देना है, जिससे आम आदमी को बड़ी राहत मिली है । लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ आय ऐसी भी है जो टैक्स के दायरे में ही नहीं आती? आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
1. खेती से होने वाली आय (Agricultural Income)
भारत में खेती से होने वाली आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है। यह नियम संविधान के अनुच्छेद 246(1) के तहत आता है, जहां कृषि आय पर टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकारों को है और केंद्र सरकार इस पर टैक्स नहीं लगाती ।
क्या शामिल है?
- फसल बेचने से होने वाली कमाई
- खेती की जमीन किराए पर देने से मिलने वाला किराया
- कृषि गतिविधियों से होने वाली अन्य कमाई
- फलों, फूलों और सब्जियों की बिक्री से आय
महत्वपूर्ण शर्त:
हालांकि नियम यह कहते हैं कि अगर कृषि आय ₹5,000 से ज्यादा है और आपकी कुल आय बेसिक छूट सीमा पार करती है, तो इसे टैक्स रेट तय करने में जोड़ा जा सकता है। इसे पार्शियल इंटीग्रेशन कहा जाता है ।
इसका मतलब यह है कि अगर आपकी गैर-कृषि आय टैक्सेबल है, तो कृषि आय को आपके टैक्स स्लैब में जोड़कर टैक्स रेट तय किया जा सकता है। लेकिन कृषि आय पर सीधे टैक्स नहीं लगता।
आयकर रिटर्न भरते समय ITR-1 (सहज) में आप ₹5,000 तक की कृषि आय दिखा सकते हैं। अगर कृषि आय इससे अधिक है, तो आपको ITR-2 फाइल करना होगा ।
2. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) रिटर्न
PPF एक लंबी अवधि की सुरक्षित बचत योजना है, जो दशकों से निवेशकों का पसंदीदा विकल्प बना हुआ है । यह EEE (Exempt-Exempt-Exempt) मॉडल पर काम करता है यानी निवेश, ब्याज और निकासी तीनों पर टैक्स छूट मिलती है ।
मुख्य बातें:
- वर्तमान ब्याज दर: 7.1% प्रति वर्ष (Q1 FY 2025-26 के अनुसार)
- न्यूनतम निवेश: ₹500 सालाना
- अधिकतम निवेश: ₹1.5 लाख सालाना
- मैच्योरिटी अवधि: 15 साल (5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है)
टैक्स लाभ:
- धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक निवेश पर टैक्स छूट
- अर्जित ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री
- मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि भी टैक्स-फ्री
PPF में निवेश करने से न सिर्फ टैक्स बचता है, बल्कि रिटायरमेंट के लिए एक सुरक्षित फंड भी तैयार होता है। यह उन लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प है जो जोखिम से बचते हुए भविष्य को मजबूत करना चाहते हैं ।
3. कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) निकासी
अगर आपने लगातार 5 साल या उससे ज्यादा नौकरी की है, तो EPF से निकासी पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। निकासी में कर्मचारी का योगदान, नियोक्ता का हिस्सा और उस पर मिला ब्याज सभी टैक्स से मुक्त होते हैं ।
नए नियम (2026):
बजट 2026-27 में सरकार ने पीएफ ट्रस्ट के टैक्स नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव किया है। अब:
- नियोक्ता का योगदान ₹7.5 लाख सालाना तक टैक्स-फ्री रहेगा
- इससे ज्यादा राशि कर्मचारी के लिए टैक्स योग्य परक्विजिट मानी जाएगी
- पीएफ निवेश के नियम अब पूरी तरह ईपीएफ नियमों के मुताबिक होंगे
ध्यान दें:
अगर आप 5 साल से पहले EPF निकालते हैं, तो उस पर टैक्स देना पड़ सकता है। हालांकि, नौकरी बदलने पर पीएफ ट्रांसफर कराने से यह समस्या नहीं आती।
4. सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) रिटर्न
बेटी के भविष्य के लिए बनाई गई यह योजना टैक्स बचत का बेहतरीन साधन है। यह भी EEE मॉडल पर आधारित है और सबसे ज्यादा ब्याज देने वाली छोटी बचत योजनाओं में से एक है ।
मुख्य बातें:
- वर्तमान ब्याज दर: 8.2% प्रति वर्ष (Q4 FY 2025-26 के लिए)
- न्यूनतम निवेश: ₹250 सालाना
- अधिकतम निवेश: ₹1.5 लाख सालाना
- मैच्योरिटी अवधि: 21 साल (खाता खोलने की तारीख से)
टैक्स लाभ:
- धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक निवेश पर छूट
- ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री
- मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स-फ्री
पात्रता:
- केवल भारतीय निवासी बालिकाओं के लिए
- खाता खुलवाने के समय बालिका की उम्र 10 साल से कम होनी चाहिए
- परिवार में अधिकतम दो खाते खोले जा सकते हैं
निकासी नियम:
- 18 साल पूरे होने के बाद शिक्षा या शादी के लिए 50% तक निकासी की सुविधा
- समय से पहले खाता बंद करने पर पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट वाली ब्याज दर मिलती है
यह योजना NSC और PPF से बेहतर रिटर्न देती है, इसलिए बेटी के भविष्य की प्लानिंग के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प है ।
5. लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्योरिटी राशि
लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर मिलने वाला मैच्योरिटी अमाउंट टैक्स-फ्री होता है। यह छूट आयकर अधिनियम की धारा 10(10D) के तहत मिलती है ।
शर्तें:
- सालाना प्रीमियम सम एश्योर्ड (बीमित राशि) के 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए
- 2012 के बाद जारी पॉलिसी के लिए यह नियम लागू है
- मृत्यु पर मिलने वाला डेथ बेनिफिट पूरी तरह टैक्स-फ्री है और इस पर कोई सीमा नहीं है
यूलिप (ULIP) के लिए विशेष नियम:
अगर आपने यूलिप में निवेश किया है, तो सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख से ज्यादा होने पर मैच्योरिटी राशि पर टैक्स लग सकता है। सावधानी बरतें।
6. रिश्तेदारों से मिलने वाले गिफ्ट
शादी के मौके पर मिलने वाले तोहफे या अपने नजदीकी रिश्तेदारों से मिलने वाला कैश या प्रॉपर्टी पूरी तरह टैक्स-फ्री है ।
कौन हैं निर्दिष्ट रिश्तेदार?
- माता-पिता
- पति/पत्नी
- भाई-बहन
- जीवनसाथी के भाई-बहन
- रैखिक पूर्वज (दादा-दादी, नाना-नानी)
- रैखिक वंशज (बच्चे, पोते-पोती)
गैर-रिश्तेदारों से गिफ्ट:
- ₹50,000 सालाना तक टैक्स-फ्री
- इससे ज्यादा होने पर पूरी रकम टैक्सेबल हो जाती है
7. विरासत और वसीयत से मिली संपत्ति
भारत में विरासत टैक्स (Estate Tax) नहीं है, जो 1985 में खत्म कर दिया गया था। वसीयत या विरासत में मिली संपत्ति पूरी तरह टैक्स-फ्री है ।
महत्वपूर्ण बात:
उस संपत्ति से भविष्य में होने वाली आय, जैसे:
- बैंक बैलेंस पर ब्याज
- शेयरों पर डिविडेंड
- किराए की आय
यह सब टैक्सेबल होगी। सिर्फ विरासत में मिली संपत्ति पर ही नहीं, बल्कि उससे होने वाली कमाई पर टैक्स देना होगा
8. स्कॉलरशिप और शैक्षिक पुरस्कार
शिक्षा के उद्देश्य से मिलने वाली स्कॉलरशिप 100% टैक्स-फ्री है। चाहे वह सरकारी हो या निजी संस्था की, जब तक वह पढ़ाई के लिए है, उस पर टैक्स नहीं लगेगा ।
क्या शामिल है?
- मेरिट स्कॉलरशिप
- सरकारी शैक्षिक पुरस्कार
- रिसर्च फेलोशिप
- स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप
नागरिक सम्मान:
सरकार द्वारा दिए जाने वाले नागरिक सम्मान जैसे पद्म पुरस्कार, भारत रत्न आदि के साथ मिलने वाली राशि पर भी टैक्स नहीं लगता ।
9. ग्रेच्युटी (Gratuity)
नौकरी से रिटायर होने पर मिलने वाली ग्रेच्युटी की रकम भी टैक्स-फ्री होती है।
नियम:
- सरकारी कर्मचारी: पूरी ग्रेच्युटी टैक्स-फ्री
- प्राइवेट कर्मचारी: अब ₹25 लाख तक की ग्रेच्युटी टैक्स-फ्री है (पहले यह सीमा ₹20 लाख थी)
- लगातार 5 साल तक एक ही कंपनी में नौकरी करने के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी टैक्स-फ्री होती है
10. टैक्स-फ्री बॉन्ड (Tax-Free Bonds)
सरकार और सरकार समर्थित संस्थाएं समय-समय पर टैक्स-फ्री बॉन्ड जारी करती हैं। इन बॉन्ड्स से मिलने वाला सालाना ब्याज पूरी तरह टैक्स से मुक्त होता है ।
प्रमुख जारीकर्ता:
- NHAI (नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया)
- REC (आरईसी लिमिटेड)
- PFC (पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन)
- IRFC (इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन)
ये लंबी अवधि के निवेशकों के लिए स्थिर आय का बेहतरीन विकल्प होते हैं। आमतौर पर इन पर 7-8% तक ब्याज मिलता है और यह पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है ।
11. पार्टनरशिप फर्म से मिला मुनाफा
अगर आप किसी पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर हैं, तो फर्म के मुनाफे में आपका हिस्सा टैक्स-फ्री होता है ।
क्यों?
ऐसा इसलिए क्योंकि फर्म अपने मुनाफे पर कॉर्पोरेट टैक्स पहले ही भर चुकी होती है। हालांकि, अगर आपको फर्म से बतौर सैलरी या ब्याज कोई रकम मिलती है, तो वह टैक्सेबल होगी।
12. HUF से मिलने वाली राशि
हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) की आय में से परिवार के सदस्यों को मिलने वाला हिस्सा टैक्स-फ्री होता है ।
कारण:
उस आय पर HUF पहले ही टैक्स दे चुका होता है। यह भी पार्टनरशिप फर्म की तरह ही है।
13. वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (VRS) की रकम
अगर आप रिटायरमेंट की उम्र से पहले वीआरएस (Voluntary Retirement Scheme) लेते हैं, तो मिलने वाली राशि पर टैक्स छूट मिलती है ।
नियम:
- ₹5 लाख तक की रकम टैक्स-फ्री
- वीआरएस स्कीम कंपनी की आधिकारिक पॉलिसी होनी चाहिए
- अन्य शर्तें पूरी होनी चाहिए
14. बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज (सीनियर सिटीजन के लिए)
हालांकि आमतौर पर FD पर ब्याज टैक्सेबल होता है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए कुछ छूट है।
नियम:
- धारा 80TTB के तहत ब्याज आय में ₹50,000 तक की कटौती
- यह छूट सिर्फ 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के नागरिकों के लिए
- बचत खाता ब्याज और FD ब्याज दोनों शामिल
हालांकि, नई टैक्स व्यवस्था में यह कटौती उपलब्ध नहीं है ।
15. कृषि ब्याज और ग्रामीण बैंक योजनाएं
कुछ ग्रामीण बैंकों और सहकारी समितियों द्वारा दी जाने वाली ब्याज आय पर भी टैक्स छूट मिलती है, बशर्ते वह कृषि गतिविधियों से जुड़ी हो।
एक नजर में: कौन-सी आय कितनी टैक्स-फ्री?
| इनकम का प्रकार | टैक्स छूट | विशेष शर्तें |
|---|---|---|
| खेती की आय | पूरी तरह टैक्स-फ्री | ₹5,000 से अधिक पर टैक्स स्लैब में जोड़ा जा सकता है |
| PPF रिटर्न | पूरी तरह टैक्स-फ्री | ₹1.5 लाख सालाना निवेश की सीमा |
| EPF (5 साल बाद) | पूरी तरह टैक्स-फ्री | नियोक्ता योगदान ₹7.5 लाख तक |
| SSY रिटर्न | पूरी तरह टैक्स-फ्री | 8.2% ब्याज, 21 साल अवधि |
| लाइफ इंश्योरेंस | नियमों के तहत टैक्स-फ्री | प्रीमियम ≤ सम एश्योर्ड का 10% |
| स्कॉलरशिप | 100% टैक्स-फ्री | शिक्षा के उद्देश्य से होना चाहिए |
| रिश्तेदार गिफ्ट | बिना सीमा | निर्दिष्ट रिश्तेदारों की सूची देखें |
| गैर-रिश्तेदारों से गिफ्ट | ₹50,000 तक छूट | इससे ज्यादा पर पूरा टैक्सेबल |
| विरासत | पूरी तरह टैक्स-फ्री | भविष्य की आय टैक्सेबल होगी |
| ग्रेच्युटी | ₹25 लाख तक छूट | प्राइवेट कर्मचारियों के लिए |
| टैक्स-फ्री बॉन्ड | पूरा ब्याज टैक्स-फ्री | सरकारी संस्थाओं के बॉन्ड |
टैक्स प्लानिंग के लिए जरूरी सुझाव
1. नई vs पुरानी टैक्स व्यवस्था का चुनाव
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट है। इसमें:
- ₹12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं (₹12 लाख तक की नेट टैक्सेबल आय)
- टैक्स स्लैब: 4-8 लाख (5%), 8-12 लाख (10%), 12-16 लाख (15%), 16-20 लाख (20%), 20-24 लाख (25%), 24 लाख+ (30%)
अगर आप पुरानी व्यवस्था चुनना चाहते हैं, तो आपको निवेश और छूट का क्लेम करना होगा। दोनों में से जो आपके लिए फायदेमंद हो, वह चुनें।
2. 80C का पूरा इस्तेमाल करें
धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। इसमें शामिल हैं:
- PPF
- EPF
- SSY
- लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम
- ELSS म्यूचुअल फंड
- टर्म डिपॉजिट
- NSC
- ट्यूशन फीस
साल की शुरुआत में ही प्लानिंग करें ताकि पूरा लाभ ले सकें।
3. सीनियर सिटीजन के लिए खास प्रावधान
60 साल से ज्यादा उम्र के नागरिकों के लिए अतिरिक्त छूट:
- धारा 80TTB: ब्याज आय पर ₹50,000 तक की कटौती
- पुरानी व्यवस्था में छूट सीमा ₹3 लाख
- सुपर सीनियर सिटीजन (80+) के लिए ₹5 लाख तक छूट सीमा
4. रिकॉर्ड रखें और समय पर रिटर्न फाइल करें
टैक्स-फ्री इनकम का दावा करने के लिए सही दस्तावेज रखना जरूरी है:
- PPF/SSY पासबुक
- इंश्योरेंस पॉलिसी डॉक्यूमेंट
- कृषि आय का प्रमाण (जमीन के दस्तावेज)
- गिफ्ट डीड (अगर लागू हो)
आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि का ध्यान रखें। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आईटीआर फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: क्या PPF में निवेश पर मिलने वाला ब्याज वाकई टैक्स-फ्री है?
उत्तर: हां, PPF में निवेश पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री है। यह EEE श्रेणी में आता है, यानी निवेश, ब्याज और निकासी तीनों टैक्स-फ्री हैं ।
प्रश्न 2: क्या मुझे कृषि आय दिखाने के लिए आईटीआर फाइल करना जरूरी है?
उत्तर: अगर आपकी कृषि आय ₹5,000 से ज्यादा है, तो आपको आईटीआर फाइल करना जरूरी है, भले ही उस पर टैक्स न लगता हो ।
प्रश्न 3: नई टैक्स व्यवस्था में क्या टैक्स-फ्री इनकम के फायदे मिलते हैं?
उत्तर: नई टैक्स व्यवस्था में कटौतियां और छूट नहीं मिलती, लेकिन टैक्स-फ्री इनकम जैसे कृषि आय, PPF ब्याज, SSY रिटर्न आदि पर अब भी कोई टैक्स नहीं लगता। हालांकि, 80C के तहत मिलने वाली छूट नई व्यवस्था में उपलब्ध नहीं है ।
प्रश्न 4: क्या EPF में नियोक्ता के योगदान पर टैक्स लगता है?
उत्तर: बजट 2026 के नए नियमों के अनुसार, ₹7.5 लाख सालाना तक का नियोक्ता योगदान टैक्स-फ्री है। इससे ज्यादा राशि टैक्सेबल होगी ।
प्रश्न 5: सुकन्या समृद्धि योजना और PPF में क्या अंतर है?
उत्तर: SSY सिर्फ बालिकाओं के लिए है और इसकी अवधि 21 साल है, जबकि PPF किसी भी भारतीय नागरिक के लिए है और इसकी अवधि 15 साल है। वर्तमान में SSY पर 8.2% और PPF पर 7.1% ब्याज मिल रहा है ।
निष्कर्ष: स्मार्ट प्लानिंग है असली हथियार
टैक्स-फ्री इनकम सिर्फ “छूट” नहीं है, बल्कि स्मार्ट प्लानिंग का हिस्सा है। सही निवेश और नियमों की समझ से आप कानूनी तरीके से टैक्स बचा सकते हैं और अपनी नेट कमाई बढ़ा सकते हैं ।
2026 में निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं – पारंपरिक PPF और SSY से लेकर टैक्स-फ्री बॉन्ड तक। अपनी जरूरतों और जोखिम क्षमता के हिसाब से सही विकल्प चुनें।
याद रखें: टैक्स प्लानिंग साल के आखिरी महीने में नहीं, बल्कि साल की शुरुआत से करनी चाहिए। इससे आपको बेहतर रिटर्न और ज्यादा टैक्स बचत मिलेगी।
अगर आपको किसी निवेश या टैक्स प्लानिंग के बारे में ज्यादा जानकारी चाहिए, तो किसी वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें। सही सलाह और समझदारी भरे निवेश से आप न सिर्फ टैक्स बचा सकते हैं, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य भी बना सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। टैक्स नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं। कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार या टैक्स एक्सपर्ट से परामर्श करें।
Read More:बजट 2026 : Tax की टेंशन छोड़िए! 4 स्मार्ट तरीकों से बचाएं अपनी गाढ़ी कमाई
