LTCG और STCG टैक्स बचाने के 5 प्रमुख तरीकों पर टैक्स समाचार ब्लॉग: कानूनी छूट, सेक्शन 54/54EC/54F, बॉन्ड निवेश, टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग से प्रॉपर्टी/शेयर गेन पर टैक्स कम करें।

कैपिटल एसेट क्या है? परिभाषा और दायरा
कैपिटल एसेट (पूंजीगत संपत्ति) आयकर अधिनियम की एक मूलभूत अवधारणा है। सामान्य शब्दों में, कोई भी संपत्ति जिसे करदाता किसी व्यवसाय या पेशे से अलग, निवेश या व्यक्तिगत उपयोग के लिए रखता है, कैपिटल एसेट कहलाती है। इसमें शामिल हैं:
- अचल संपत्ति: भूमि, भवन (आवासीय/वाणिज्यिक), फ्लैट, प्लॉट।
- चल संपत्ति: ज्वेलरी, सोना, बुलियन, पेंटिंग्स, कलाकृतियां।
- वित्तीय संपत्ति: शेयर्स, डिबेंचर्स, म्यूचुअल फंड यूनिट्स, सिक्योरिटीज।
- अमूर्त संपत्ति: ट्रेडमार्क, पेटेंट, कॉपीराइट, लीजहोल्ड राइट्स।
- मूर्त संपत्ति: मशीनरी, वाहन, फर्नीचर (यदि निवेश के लिए रखा गया हो)।
कैपिटल गेन कब उत्पन्न होता है?
जब आप कोई कैपिटल एसेट उसके खरीद मूल्य (एक्विजिशन कॉस्ट) से अधिक कीमत पर बेचते हैं, तो प्राप्त लाभ ‘कैपिटल गेन’ कहलाता है। यह लाभ आपकी ‘आय’ का हिस्सा माना जाता है और उस वित्तीय वर्ष में कर योग्य होता है, जिसमें संपत्ति का हस्तांतरण होता है।
विरासत या उपहार में मिली संपत्ति का क्या?
विरासत या उपहार में प्राप्त संपत्ति की बिक्री पर भी कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। हालांकि, विरासत के समय कोई कर नहीं लगता। कर की गणना के लिए ‘खरीद मूल्य’ मूल मालिक द्वारा दिया गया मूल्य होता है और ‘धारण अवधि’ मालिक के खरीदने के समय से गिनी जाती है। यह एक महत्वपूर्ण लाभ है क्योंकि लंबी धारण अवधि LTCG की श्रेणी में ला सकती है।
कैपिटल एसेट नहीं मानी जाने वाली वस्तुएं (अपवाद)
निम्नलिखित वस्तुओं को कैपिटल एसेट नहीं माना जाता, इसलिए इनकी बिक्री पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा:
- किसी व्यवसाय में स्टॉक-इन-ट्रेड (माल-सूची)।
- व्यवसाय या पेशे के लिए उपभोग्य सामग्री या कच्चा माल।
- निजी उपयोग के कपड़े और फर्नीचर (जब तक कि ये अति मूल्यवान कलाकृति न हों)।
- ग्रामीण कृषि भूमि (भारत में स्थित, नगरपालिका सीमा या अधिसूचित क्षेत्र से बाहर)।
- कुछ विशेष बॉन्ड्स जैसे 7% गोल्ड बॉन्ड्स, 1980, या नेशनल डिफेंस गोल्ड बॉन्ड्स, 1980।
ये अपवाद सामान्य जीवन और व्यवसाय में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं पर करदाताओं को राहत देते हैं।
शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट्स: धारण अवधि का महत्व
किसी एसेट पर लगने वाले टैक्स की दर और गणना की पद्धति यह तय करती है कि वह शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट (STCA) है या लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट (LTCA)। यह वर्गीकरण धारण अवधि (होल्डिंग पीरियड) पर निर्भर करता है।
बजट 2024 के बाद सरलीकृत नियम (23 जुलाई, 2024 से प्रभावी):
बजट 2024 ने धारण अवधि को सरल बनाया है। अब ज्यादातर संपत्तियों के लिए दो ही श्रेणियां हैं: 24 महीने से कम और 24 महीने या अधिक।
- शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट (STCA): वह संपत्ति जिसे 24 महीने से कम समय तक धारित किया गया हो। (पुराने नियम में अचल संपत्ति के लिए 24 माह और अन्य के लिए 36 माह था)।
- लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट (LTCA): वह संपत्ति जिसे 24 महीने या अधिक समय तक धारित किया गया हो।
विशेष मामले:
- इक्विटी शेयर/म्यूचुअल फंड: इनके लिए अभी भी धारण अवधि 12 महीने है। 12 महीने से कम पर STCG और 12 महीने या अधिक पर LTCG माना जाएगा।
- मovable संपत्ति (जेवर, मशीनरी): अब इनके लिए भी धारण अवधि 24 महीने ही है (पहले 36 महीने थी)।
उदाहरण: यदि आपने कोई प्लॉट 1 अप्रैल, 2023 को खरीदा और 1 मार्च, 2025 को बेचा (23 महीने), तो यह STCA होगा। यदि आपने उसे 1 जून, 2025 को बेचा (26 महीने), तो यह LTCA होगा।
STCG और LTCG में मुख्य अंतर
| पैरामीटर | शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) | लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) |
|---|---|---|
| धारण अवधि | अचल संपत्ति: <24 महीने इक्विटी शेयर/फंड: <12 महीने | अचल संपत्ति: ≥24 महीने इक्विटी शेयर/फंड: ≥12 महीने |
| कर योग्यता | करदाता की आय में जोड़ा जाता है। | अन्य आय से अलग से गणना की जाती है। |
| कर दर | आयकर स्लैब दरों के अनुसार कर लगता है। (यानी 5%, 20%, 30% आपकी कुल आय के अनुसार)। | निश्चित दर। अचल संपत्ति के लिए आमतौर पर 20% (+सीएस और एचसी) इंडेक्सेशन के साथ। |
| इंडेक्सेशन लाभ | उपलब्ध नहीं। खरीद लागत को मुद्रास्फीति के लिए समायोजित नहीं किया जाता। | उपलब्ध है। खरीद लागत को कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) से बढ़ाया जाता है, जिससे कर योग्य लाभ कम हो जाता है। |
| रणनीति | अक्सर तेज बाजारी या जल्दी लाभ लेने से जुड़ा। | लंबी अवधि के निवेश और संपत्ति के प्राकृतिक मूल्यवर्धन को दर्शाता है। |
विभिन्न संपत्तियों पर कर दरों का चार्ट (2024-25 के अनुसार)
| संपत्ति का प्रकार | धारण अवधि | कर की दर (लगभग) | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| अचल संपत्ति (घर, जमीन, बिल्डिंग) | STCG: <24 महीने LTCG: ≥24 महीने | STCG: स्लैब दरों के अनुसार LTCG: 20.8% (20% + 4% सेस) इंडेक्सेशन के साथ | नया विकल्प (23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी संपत्ति): 12.5% (बिना इंडेक्सेशन) चुन सकते हैं। |
| चल संपत्ति (ज्वेलरी, सोना, कलाकृति) | STCG: <24 महीने LTCG: ≥24 महीने | STCG: स्लैब दरों के अनुसार LTCG: 12.5% (बिना इंडेक्सेशन) | |
| लिस्टेड शेयर या इक्विटी MF | STCG: <12 महीने LTCG: ≥12 महीने | STCG: 15% (STT दिया गया हो) LTCG: 12.5% (₹1.25 लाख की वार्षिक छूट के बाद) | LTCG छूट ₹1.25 लाख प्रति वर्ष (केवल इक्विटी/इक्विटी MF के लिए) |
| डेब्ट म्यूचुअल फंड/बॉन्ड्स | STCG: <24 महीने LTCG: ≥24 महीने | STCG: स्लैब दरों के अनुसार LTCG: 12.5% (बिना इंडेक्सेशन) |
(सभी दरों में उपयुक्त उपकर और अधिभार जोड़ने के बाद प्रभावी दर अधिक होगी।)
गृहस्वामियों के लिए महत्वपूर्ण: LTCG पर संशोधित प्रावधान
बजट 2024-25 ने 23 जुलाई, 2024 से पहले खरीदी गई अचल संपत्ति के विक्रेताओं के लिए एक विकल्प पेश किया है। अब आप दो में से किसी एक तरीके से टैक्स की गणना कर सकते हैं:
- पुराना तरीका: 20% की दर से कर, लेकिन इंडेक्सेशन लाभ के साथ (जो खरीद लागत बढ़ाकर कर योग्य लाभ घटाता है)।
- नया तरीका: 12.5% की दर से कर, लेकिन बिना इंडेक्सेशन लाभ के।
आपको वह तरीका चुनना चाहिए जिसमें आपका कर दायित्व कम हो। यह विकल्प केवल व्यक्तियों और HUF के लिए है, कंपनियों या फर्म्स के लिए नहीं।
प्रॉपर्टी पर कैपिटल गेन टैक्स गणना: स्टेप बाय स्टेप
गणना से पहले कुछ मुख्य शब्दावली:
- फुल वैल्यू कंसिडरेशन (FVC): संपत्ति का बिक्री मूल्य।
- कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन (COA): संपत्ति का मूल खरीद मूल्य।
- कॉस्ट ऑफ इम्प्रूवमेंट (COI): संपत्ति में किए गए निर्माण/मरम्मत/विस्तार का खर्च (बिलों के साथ प्रमाणित)।
- ट्रांसफर एक्सपेंसेज: बिक्री से जुड़ा खर्च जैसे ब्रोकरेज, स्टांप ड्यूटी, लीगल चार्ज, विज्ञापन खर्च।
- इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन/इम्प्रूवमेंट: CII का उपयोग करके मुद्रास्फीति के लिए समायोजित खरीद/सुधार लागत।
शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) गणना सूत्र:
STCG = फुल वैल्यू कंसिडरेशन (बिक्री मूल्य) - [कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन + कॉस्ट ऑफ इम्प्रूवमेंट + ट्रांसफर एक्सपेंसेज]
इस STCG राशि को आपकी अन्य आय (वेतन, व्यवसाय आदि) के साथ जोड़ दिया जाता है और आपके आयकर स्लैब के अनुसार कर लगता है।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) गणना सूत्र (इंडेक्सेशन के साथ):
LTCG = फुल वैल्यू कंसिडरेशन (बिक्री मूल्य) - [इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन + इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ इम्प्रूवमेंट + ट्रांसफर एक्सपेंसेज]
इंडेक्स्ड कॉस्ट की गणना कैसे करें?इंडेक्स्ड कॉस्ट = मूल लागत × (ट्रांसफर के वर्ष का CII / एक्विजिशन/इम्प्रूवमेंट के वर्ष का CII)
विस्तृत उदाहरण:
स्थिति: श्री शर्मा ने 1 जून, 2010 को एक प्लॉट ₹20 लाख में खरीदा। उन्होंने 2012 में ₹5 लाख खर्च करके उसकी बाउंड्री वॉल बनवाई। उन्होंने 1 दिसंबर, 2023 को यह प्लॉट ₹80 लाख में बेच दिया। बिक्री पर ब्रोकरेज आदि खर्च ₹1 लाख हुए।
कदम 1: धारण अवधि जांचें।
खरीद: जून 2010, बिक्री: दिसंबर 2023। कुल अवधि >24 महीने, इसलिए LTCG।
कदम 2: प्रासंगिक CII मान ढूंढें।
- एक्विजिशन FY (2010-11) का CII: 167
- इम्प्रूवमेंट FY (2012-13) का CII: 200
- ट्रांसफर FY (2023-24) का CII: 348
कदम 3: इंडेक्स्ड कॉस्ट की गणना करें।
- इंडेक्स्ड COA = ₹20,00,000 × (348/167) = ₹20,00,000 × 2.084 = ₹41,67,664
- इंडेक्स्ड COI = ₹5,00,000 × (348/200) = ₹5,00,000 × 1.74 = ₹8,70,000
कदम 4: LTCG की गणना करें।
- LTCG = बिक्री मूल्य – (इंडेक्स्ड COA + इंडेक्स्ड COI + ट्रांसफर खर्च)
- LTCG = ₹80,00,000 – (₹41,67,664 + ₹8,70,000 + ₹1,00,000)
- LTCG = ₹80,00,000 – ₹51,37,664 = ₹28,62,336
कदम 5: कर दायित्व।
LTCG पर कर = ₹28,62,336 का 20% = ₹5,72,467
(+ उपकर और अधिभार लागू होंगे)।
कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
CII एक ऐसा सूचकांक है जो मुद्रास्फीति को मापता है और इसका उपयोग LTCG गणना में खरीद लागत को समायोजित करने के लिए किया जाता है। इससे कर योग्य लाभ कम हो जाता है क्योंकि आपकी मूल लागत बढ़ जाती है। केंद्रीय सरकार हर वित्तीय वर्ष के लिए CII जारी करती है।
हाल के वर्षों के लिए CII तालिका:
| वित्तीय वर्ष | CII |
|---|---|
| 2001-02 | 100 |
| 2010-11 | 167 |
| 2012-13 | 200 |
| 2020-21 | 301 |
| 2021-22 | 317 |
| 2022-23 | 331 |
| 2023-24 | 348 |
| 2024-25 | 363 |
| 2025-26 | 376 (अधिसूचित) |
याद रखें: 23 जुलाई 2024 के बाद खरीदी गई अचल संपत्ति पर LTCG की दर 12.5% होगी और इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलेगा। पहले खरीदी गई संपत्ति के लिए आप 20%+इंडेक्सेशन या 12.5% बिना इंडेक्सेशन में से चुनाव कर सकते हैं।
कैपिटल गेन टैक्स कम करने के लिए कटौतियां और छूट के रास्ते
आयकर अधिनियम में कैपिटल गेन टैक्स बचाने के लिए कई अनुभाग प्रदान करते हैं, खासकर यदि आप बिक्री से प्राप्त राशि को पुनर्निवेशित करते हैं।
1. धारा 54: नया आवासीय घर खरीदने/बनाने पर छूट
- लागू: आवासीय संपत्ति (हाउस प्रॉपर्टी) की बिक्री पर होने वाले LTCG पर।
- शर्त: बिक्री की तारीख से 1 वर्ष पहले या 2 वर्ष बाद तक नया घर खरीदें, या 3 वर्ष के भीतर नया घर बनाएं।
- लाभ: नए घर पर खर्च की गई राशि या कैपिटल गेन राशि, इनमें से जो भी कम हो, पर पूर्ण छूट। नए घर की खरीद/निर्माण की सीमा ₹10 करोड़ तक है।
- अतिरिक्त शर्त: नया घर भारत में होना चाहिए और उसे बिक्री की तारीख से 3 वर्ष तक नहीं बेचा जाना चाहिए।
2. धारा 54EC: निर्धारित बॉन्ड्स में निवेश पर छूट
- लागू: किसी भी लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट (जमीन, बिल्डिंग आदि) की बिक्री पर होने वाले LTCG पर।
- शर्त: बिक्री की तारीख से 6 महीने के भीतर NHAI (नेशनल हाइवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया), REC (रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन), PFC (पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन) या IRFC (इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन) द्वारा जारी कैपिटल गेन बॉन्ड्स में निवेश करें।
- लाभ: निवेश की गई राशि (अधिकतम ₹50 लाख प्रति वित्तीय वर्ष) तक के LTCG पर छूट।
- लॉक-इन अवधि: बॉन्ड्स 5 वर्ष के लिए लॉक्ड रहते हैं। इन्हें पहले बेचने पर छूट वापस ले ली जाती है।
3. धारा 54F: किसी भी LT एसेट की बिक्री पर नया आवासीय घर खरीदने/बनाने पर छूट
- लागू: किसी भी लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट (जैसे सोना, शेयर, जमीन) की बिक्री पर, बशर्ते कि बेची गई संपत्ति आवासीय घर न हो।
- शर्त: बिक्री से प्राप्त समस्त राशि (सिर्फ लाभ नहीं) को नए आवासीय घर (धारा 54 की शर्तों के समान) में निवेश करना होगा।
- लाभ: यदि पूरी बिक्री राशि निवेश कर दी जाती है, तो पूरे LTCG पर छूट। यदि आंशिक निवेश है, तो छूट आनुपातिक रूप से कम होगी।
- महत्वपूर्ण: नया घर खरीदने/बनाने की तिथि पर, करदाता के पास एक से अधिक आवासीय घर (विरासत या उपहार में मिले को छोड़कर) नहीं होने चाहिए।
कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम (CGAS): एक सुविधाजनक विकल्प
क्या हो अगर आपने संपत्ति बेच दी है लेकिन तुरंत नया घर नहीं खरीज पा रहे या बॉन्ड्स में निवेश नहीं कर पा रहे? इसके लिए कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम (CGAS) है।
- उद्देश्य: धारा 54, 54F, 54EC आदि के तहत छूट का दावा करने वाले करदाताओं के लिए एक “पार्किंग” खाता।
- कैसे काम करता है: आप बिक्री से प्राप्त राशि (या उसका हिस्सा) को किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में खोले गए CGAS खाते में जमा करा सकते हैं।
- लाभ: खाते में पैसा जमा करने की तिथि को ही आयकर विभाग उसे छूट के लिए निवेश मान लेता है, भले ही आपने वास्तव में घर नहीं खरीजा हो। बाद में आप इस खाते से पैसा निकालकर घर खरीज सकते हैं।
- ध्यान रखें: अगर निर्धारित समय सीमा (2/3 वर्ष) में पैसा निकालकर निर्धारित उद्देश्य के लिए निवेश नहीं किया जाता, तो वह राशि कर योग्य हो जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. जॉइंट प्रॉपर्टी पर टैक्स कैसे लगता है?
प्रत्येक मालिक को अपने हिस्से के अनुपात में प्राप्त बिक्री राशि पर अलग से कैपिटल गेन टैक्स की गणना करनी होती है। उदाहरण: यदि दो भाइयों की 50-50% की हिस्सेदारी है और ₹1 करोड़ में बिक्री हुई, तो प्रत्येक ₹50 लाख पर अपना अलग टैक्स दायित्व गणना करेगा।
2. NRI के लिए क्या नियम हैं?
NRI पर भी कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है, लेकिन टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) की दर अधिक हो सकती है (LTCG पर 20%, STCG पर 30%)। NRI भी धारा 54/54F का लाभ उठा सकते हैं, बशर्ते नया घर भारत में खरीजें। विदेशी संपत्ति की बिक्री पर भारत में कोई टैक्स नहीं लगता।
3. कृषि भूमि पर टैक्स कैसे लगता है?
- ग्रामीण कृषि भूमि: आमतौर पर कैपिटल एसेट नहीं मानी जाती, इसलिए बिक्री पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं।
- शहरी या अधिसूचित क्षेत्र की कृषि भूमि: कैपिटल एसेट मानी जाती है और कर लगेगा। हालांकि, धारा 54B के तहत, यदि बिक्री से प्राप्त राशि को दूसरी कृषि भूमि खरीदने में लगाया जाए, तो छूट मिल सकती है।
4. उत्तराधिकार या गिफ्ट में मिली संपत्ति की बिक्री पर टैक्स?
कर की गणना के लिए:
- खरीद लागत: मूल मालिक द्वारा दिया गया मूल्य।
- खरीद की तिथि: मूल मालिक द्वारा खरीद की तारीख।
- धारण अवधि: मूल खरीद की तारीख से गिनी जाती है।
इसलिए, अगर माता-पिता ने 20 साल पहले जमीन खरीदी और आपको विरासत में मिली, और आप उसे आज बेचते हैं, तो यह 20+ साल की धारण अवधि वाला LTCG होगा और आपको इंडेक्सेशन का फायदा भी मिलेगा।
5. बिक्री के खर्चों में क्या-क्या शामिल कर सकते हैं?
स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, ब्रोकरेज/दलाली, विज्ञापन खर्च, वकील/कानूनी शुल्क, संपत्ति को बेचने योग्य बनाने के लिए आखिरी मरम्मत खर्च (प्रमाण सहित)।
निष्कर्ष
कैपिटल गेन टैक्स की गणना और नियम जटिल लग सकते हैं, लेकिन सही जानकारी और थोड़ी सी योजना से आप अपने टैक्स दायित्व को काफी कम कर सकते हैं। चाहे वह धारण अवधि को समझना हो, इंडेक्सेशन का लाभ लेना हो, या धारा 54/54EC/54F जैसे छूट प्रावधानों का उपयोग करना हो – हर विकल्प पर विचार करें।
सबसे महत्वपूर्ण सलाह:
- रिकॉर्ड रखें: खरीद और सुधार के सभी बिल, भुगतान के प्रमाण और बिक्री के दस्तावेज सुरक्षित रखें।
- CII का उपयोग करें: LTCG गणना करते समय हमेशा CII का उपयोग करें (जहाँ लागू हो)।
- पेशेवर सलाह लें: संपत्ति लेन-देन जटिल होते हैं। करदाता की विशिष्ट स्थिति के आधार पर एक CA या टैक्स सलाहकार से परामर्श लेना सबसे अच्छा तरीका है।
- समय सीमा का ध्यान रखें: छूट के लिए निवेश की सभी समय सीमाओं (6 महीने, 1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष) का सख्ती से पालन करें।
संपत्ति निवेश एक लंबी अवधि का फैसला है, और इससे होने वाले लाभ पर कर का प्रबंधन उस निवेश का एक अहम हिस्सा है। सूचित रहें, योजना बनाएं और अपनी कमाई को स्मार्ट तरीके से बढ़ाएं।
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