क्या आप भी EMI के बोझ तले दबे हैं? भारतीयों का औसत कर्ज ₹4.8 लाख तक पहुँच गया है। जानें कर्ज के जाल (Debt Trap) से कैसे बचें, और अगर फंस चुके हैं तो स्नोबॉल vs Avalanche मेथड से कैसे निकलें।

कर्ज का जाल: भारतीयों का औसत कर्ज ₹4.8 लाख, 68% फाइनेंशियल तनाव में — बचने और निकलने की पूरी रणनीति
पिछले दो सालों में एक औसत भारतीय का कर्ज ₹3.9 लाख से बढ़कर ₹4.8 लाख हो गया है। इसका नतीजा यह है कि 68% भारतीय उधारकर्ता खुद को कर्ज के कारण वित्तीय तनाव में महसूस करते हैं। समस्या कर्ज लेने की नहीं है — आजकल कर्ज मिलना आसान है। समस्या है उसे मैनेज कर पाना, और EMI को लगातार सालों समय से चुकाते रहना।
अगर आप अभी तक कर्ज के जाल में नहीं फंसे हैं, तो आगे कैसे बचे रहें, इसकी चेकलिस्ट हम देंगे। और अगर आप पहले से ही फंस चुके हैं, मासिक EMI चुकाने में मुश्किल हो रही है, तो रणनैतिक रूप से उससे निकलने का तरीका भी बताएंगे।
क्यों फंस रहे हैं लोग? कर्ज में आराम कैसा?
नितिन कामथ ने हाल ही में ट्वीट किया था: “ज्यादातर भारतीय एक ही अस्पतालीकरण (बड़ा अनपेक्षित खर्च) दिवालिया होने या कर्ज के जाल में फंसने से दूर हैं।”* यह एक तरह की आदत बन गई है।
जिन लोगों के पास पर्सनल लोन है या क्रेडिट कार्ड से खर्चे चलाते हैं, उनमें से आधे लोगों का एक एक्टिव होम लोन या कार लोन भी चल रहा है। यानी जो लोग कर्ज लेना शुरू करते हैं, उनके पास एक नहीं, कई कर्ज जमा हो जाते हैं।
क्रेडिट कार्ड का आँकड़ा डरावना है:
– पिछले 13 सालों में कार्ड्स की संख्या 5 गुना बढ़ी।
– लेकिन उन कार्ड्स पर खर्च 13 गुना बढ़ गया।
यानी, भारतीय कर्ज लेने में ज्यादा सहज होते जा रहे हैं।
क्यों हो रहा है ऐसा? 4 मुख्य कारण:
1. लाइफस्टाइल की बढ़ती अपेक्षाएँ: आसपास के लोगों को देखकर हमारी ‘बेसिक नीड्स’ का थ्रेशोल्ड बढ़ता जाता है। एक कार काफी नहीं, अब SUV चाहिए। हम अपनी सफलता और जीवन के उद्देश्य को 4BHK फ्लैट और लग्जरी कार से परिभाषित करने लगते हैं।
2. इंस्टैंट ग्रैटिफिकेशन का चलन: हममें संयम की कमी है। जो चाहिए, वह आज ही चाहिए। वेल्थ प्लानिंग में भी लोग पूछते हैं “5 साल में अमीर कैसे बनें?” धैर्य की कमी गड़बड़ी का कारण बनती है।
3. ऐप्स के डार्क पैटर्न: आप कुछ खरीद रहे हैं, तो ऐप आपको “EMI में बदल दो, जीरो/नगण्य चार्ज” का ऑप्शन दिखाता है। कागजी कार्रवाई हट गई है, EMI देना आसान बना दिया गया है। हमें EMI की लत डलवाई जा रही है।
4. क्रेडिट कार्ड को सेविंग अकाउंट समझना: क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते समय हम भूल जाते हैं कि यह हमारा पैसा नहीं, बैंक का उधार है। बिना फॉर्म साइन किए खर्च करना इस भ्रम को बढ़ाता है। क्रेडिट कार्ड एक चतुर उपकरण है जो आदत बना सकता है।
यदि अभी नहीं फंसे हैं, तो कैसे बचे रहें? थ्री-अकाउंट सिस्टम
सबसे सरल तरीका है तीन अलग-अलग बचत खातों का सिस्टम बनाना:
1. आय खाता (Income Account): जहाँ आपकी सैलरी या आमदनी आती है। सिर्फ इनकमिंग के लिए।
2. व्यय खाता (Expense Account): महीने के सारे खर्चे इसी से करें। जब इस खाते में पैसा कम होने लगे, तो पता चल जाएगा कि इस महीने खर्चे रोकने होंगे। यह आपको दैनिक बजट की याद दिलाएगा।
3. निवेश खाता (Investment Account): अगर इसमें पैसा नहीं जा रहा, तो गड़बड़ है। आपको खर्चे कम करने होंगे। अगर पैसे बच जा रहे हैं, तो मतलब आप सही से निवेश नहीं कर रहे।
यह प्रणाली स्वचालित रूप से अच्छी वित्तीय आदतें विकसित करने में मदद करती है। आपके खर्चे बजट के अनुसार होंगे और निवेश लक्ष्य पूरे होंगे।
कर्ज के जाल में फंसने के संकेत क्या हैं? अगर हाँ में है कोई जवाब, तो सतर्क हो जाएँ:
– क्या आपकी सैलरी का 50% से अधिक EMI में चला जाता है?
– क्या आप क्रेडिट कार्ड पर सिर्फ मिनिमम अमाउंट ही चुका पाते हैं?
– क्या आप नया कर्ज लेकर पुराना चुकाते हैं? (यह आपदा है!)
– क्या आप जरूरी बिलों की डेट मिस करते हैं और लेट फीस देते हैं?
– क्या आपके नए लोन के आवेदन खराब क्रेडिट स्कोर के कारण रिजेक्ट हो रहे हैं?
अच्छा कर्ज vs बुरा कर्ज: फर्क जानें
सारे कर्ज बुरे नहीं होते। ब्रॉडली देखें तो:
अच्छा कर्ज (Good Debt):
– होम लोन (समझदारी से लिया गया): जो दीर्घकाल में आपकी संपत्ति बने और कीमत बढ़ाए।
– शिक्षा ऋण (Education Loan): जो आपकी या आपके परिवार की कमाई की क्षमता बढ़ाए।
– व्यवसाय ऋण (Business Loan): अच्छे आइडिया को फंड करने के लिए, सीमित जोखिम में।
– सस्ता वाहन ऋण (Affordable Auto Loan): जरूरत के लिए, शौक या लग्जरी के लिए नहीं।
बुरा कर्ज (Bad Debt):
– पर्सनल लोन: पुराना कर्ज चुकाने के लिए लिया गया (बहुत खतरनाक)।
– क्रेडिट कार्ड रोलओवर / मिनिमम पेमेंट: ब्याज दर बहुत ऊँची होती है।
– महंगी लग्जरी कारों का लोन।
– उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स (फोन, लैपटॉप) के लिए लोन।
सरल शब्दों में: मूल्यह्रास होने वाली (Depreciating) चीजों के लिए लिया कर्ज बुरा, और मूल्यवर्धन (Appreciating) करने वाली संपत्ति के लिया कर्ज अच्छा माना जा सकता है।
याद रखें: आपकी अधिकतम कर्ज लेने की क्षमता आमतौर पर आपकी सैलरी के 40% तक होती है। यानी सभी EMIs का कुल योग आपकी आय के 40% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
यदि फंस चुके हैं, तो निकलें कैसे? एक्शन प्लान
1. सूची बनाएँ: सभी कर्जों को दो कॉलम में लिखें:
– सबसे ऊँची ब्याज दर वाला कर्ज
– सबसे कम बकाया राशि वाला कर्ज
2. निकलने की दो रणनीतियाँ चुनें:
– स्नोबॉल मेथड (Snowball Method): सबसे छोटे बकाये वाले कर्ज को पहले चुकाएँ। इससे मनोबल बढ़ता है, एक कर्ज खत्म होने का आत्मविश्वास आता है।
– अवैलांश मेथड (Avalanche Method): सबसे ऊँची ब्याज दर वाले कर्ज (जैसे क्रेडिट कार्ड) पर पहले फोकस करें। इससे कुल ब्याज का भुगतान कम होगा।
सुझाव: छोटे कर्ज खत्म कर मोमेंटम बनाएँ (स्नोबॉल), फिर महंगे कर्जों पर हमला करें (अवैलांश)।
3. अगर स्थिति बहुत बिगड़ी है (Extreme Situations):
– लोन पुनर्गठन (Loan Restructuring): बैंक से बात करके कर्ज की अवधि बढ़वाएँ। EMI कम होगी, हालांकि कुल ब्याज बढ़ सकता है।
– टॉप-अप लोन (Top-up Loan): होम लोन या कार लोन पर सस्ते ब्याज पर टॉप-अप लेकर महंगे कर्ज चुकाएँ।
– गोल्ड लोन (Gold Loan): यह सुरक्षित और सस्ता कर्ज है। गहने गिरवी रखकर मिले पैसों से महंगे कर्ज चुकाएँ, फिर धीरे-धीरे गोल्ड लोन चुकाकर गहने वापस लें। (यह अंतिम विकल्प है)
सबसे जरूरी बात: स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance)
अनपेक्षित अस्पताल का बिल लाखों रुपये का खर्च आपको वापस शुरुआती बिंदु पर पहुँचा सकता है। एक विश्वसनीय हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और एक अच्छा एडवाइजर चुनना, कर्ज के जाल से बचने की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निष्कर्ष
कर्ज प्रबंधन अनुशासन और योजना का खेल है। यदि आप कर्ज के जाल में नहीं हैं, तो थ्री-अकाउंट सिस्टम अपनाकर सुरक्षित रहें। यदि फंस चुके हैं, तो घबराएँ नहीं। सूची बनाएँ, रणनीति चुनें (स्नोबॉल/अवैलांश), और यदि जरूरत हो तो पुनर्गठन जैसे विकल्पों पर विचार करें। सबसे ऊपर, अपने और अपने परिवार को एक मजबूत हेल्थ इंश्योरेंस से सुरक्षित करें। वित्तीय स्वतंत्रता का रास्ता सचेत निर्णयों और नियमित अनुशासन से होकर गुजरता है।
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