दोनों ने SIP शुरू की – गोल्ड स्थिर ग्रोथ, सिल्वर एक्सप्लोसिव रिटर्न्स! गोल्ड vs सिल्वर: अंतर, 100-एज रूल एलोकेशन (10-15% गोल्ड, 5-10% सिल्वर), ETF SIP टिप्स। टैक्स समाचार से जानें रिस्क

दो दोस्तों ने एक ही राशि से SIP शुरू की। एक ने गोल्ड में लगाया, दूसरे ने सिल्वर में। रिजल्ट? गोल्ड वाले की पोर्टफोलियो स्थिर रही, धीमी लेकिन सुरक्षित ग्रोथ मिली। सिल्वर वाले की वैल्यू में उतार-चढ़ाव खूब आए, लेकिन ग्रोथ हुई तो धमाकेदार!
हम सब यही दुविधा में जीते हैं – गोल्ड और सिल्वर में निवेश करें या नहीं? अगर हां, तो कितना-कितना? कब खरीदें, कब बेचें? इस ब्लॉग में सभी सवालों के जवाब मिलेंगे। ये जानकारी न सिर्फ अभी मदद करेगी, बल्कि जीवन भर काम आएगी। जब भी गोल्ड vs सिल्वर का सवाल उठे, आप खुद फैसला ले सकेंगे। चलिए, गहराई से समझते हैं पोर्टफोलियो में गोल्ड-सिल्वर की भूमिका।
क्यों जरूरी है गोल्ड-सिल्वर? FD और इक्विटी के जोखिम
सबसे बेसिक सवाल: क्या पोर्टफोलियो में गोल्ड-सिल्वर होना जरूरी है? हां, बिल्कुल। आइए कारण समझें।
1. FD इन्फ्लेशन को नहीं हराती
बैंक FD आफ्टर-टैक्स रिटर्न इन्फ्लेशन (औसतन 6-7%) को बीट नहीं करती। ये वेल्थ प्रिजर्वेशन के लिए ठीक है, ग्रोथ के लिए नहीं। ज्यादातर लोग ये जानते हैं।
2. इक्विटी में डबल रिस्क
इक्विटी मार्केट देश की स्थिति पर निर्भर। ग्लोबल कनेक्शन है, लेकिन कोरिलेशन कम। उदाहरण:
- 1990s में भारत में राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद दुनिया ठीक चल रही थी। आपका पोर्टफोलियो पीछे रह जाता।
- पड़ोसी देशों से युद्ध का खतरा? इक्विटी डूब सकती है।
- ग्लोबल रिसेशन (जैसे कोविड) या अमेरिकी बाजार गिरे, तो ड्रॉडाउन 30-50% तक।
डबल रिस्क: कंट्री रिस्क + ग्लोबल रिस्क।
3. करेंसी डिप्रीशिएशन से बचाव
हर देश करेंसी प्रिंट करता है (भारत, अमेरिका सबने किया)। स्टॉक मार्केट इससे पूरी तरह प्रोटेक्ट नहीं करता। लेकिन गोल्ड-सिल्वर ग्लोबल प्राइस पर चलते हैं – रुपये की गिरती वैल्यू से बचाते हैं। अमेरिका में रहने वाले को भी डॉलर डिप्रीशिएशन से ये हेज देते हैं।
4. इन्फ्लेशन-बीटिंग रिटर्न्स
पिछले 20 सालों के रोलिंग रिटर्न्स देखें (MCX, World Gold Council डेटा):
- गोल्ड: औसत 12-14% CAGR।
- सिल्वर: औसत 12-14% CAGR (वोलेटाइल लेकिन लॉन्ग-टर्म समान)।
इक्विटी जैसे रिटर्न्स, बिना कंट्री रिस्क के।
निष्कर्ष: कम रिस्क, समान/उच्च रिटर्न। पोर्टफोलियो का हिस्सा न हो, तो नुकसान। मैं सालों से कहता हूं – गोल्ड ETF/SGB लें (फिजिकल कम बेहतर, लेकिन बेहतर न होने से अच्छा)।
गोल्ड vs सिल्वर: फंडामेंटल अंतर और बिहेवियर
गोल्ड-सिल्वर एक कैटेगरी हैं, लेकिन अलग। कितना-कितना? पहले अंतर समझें।
सिल्वर: इंडस्ट्रियल वोलेटाइल बीस्ट
सिल्वर मॉडर्न वर्ल्ड से लिंक्ड:
- इंडस्ट्रियल यूज: EV बैटरी (50% डिमांड), सोलर पैनल (20% ग्रोथ), इलेक्ट्रॉनिक्स।
- अगर EV/सोलर/कंजम्पशन बढ़ेगा (अगले 10-20 साल), सिल्वर चमकेगा।
- वोलेटाइल क्यों? डेली सप्लाई-डिमांड बदलती। तेल/कॉपर जैसे। पिछले 5 साल: डिमांड > सप्लाई (सिल्वर इंस्टीट्यूट रिपोर्ट)। माइनिंग महंगी (नई माइंस में 7-10 साल)। रिजल्ट? एक्सप्लोसिव ग्रोथ, लेकिन ड्रॉप भी जोरदार।
गोल्ड: स्टेबल स्टोर ऑफ वैल्यू
- इंडस्ट्रियल यूज कम (10%)। ज्यादातर ज्वेलरी/रिजर्व।
- सेंट्रल बैंक हेज यूज करते (फेड, RBI)। करेंसी फ्लक्चुएशन कंट्रोल।
- स्टोर ऑफ वैल्यू: 1947 विभाजन उदाहरण –
- जमीन बेचना मुश्किल (रातोंरात भागना)।
- नोट/सिल्वर ज्यादा कैरी न कर सको।
- गोल्ड: आधा किलो ने नई जिंदगी दी। पड़ोसी देश में एक्सचेंज आसान।
बुरे समय में चमकता।
बिहेवियर: गोल्ड स्थिर (कम वोलेटाइल), सिल्वर रोलरकोस्टर। लॉन्ग-टर्म रिटर्न समान, लेकिन सिल्वर का फ्यूचर ब्राइटर (इंडस्ट्रियलाइजेशन)।
पोर्टफोलियो एलोकेशन: थंब रूल्स (उदाहरण के साथ)
मान लीजिए ₹1 लाख पोर्टफोलियो (पाई चार्ट)। ध्यान दें: हेल्थ/लाइफ इंश्योरेंस + 6-8 महीने इमरजेंसी फंड अलग रखें। ये रूल इन्वेस्टमेंट पर लागू।
100 माइनस एज रूल
- उम्र 35? 65% इक्विटी (स्टॉक्स/MF): ₹65,000।
- बाकी 35% (₹35,000): 50% प्रेशियस मेटल्स = ₹17,500-18,000।
- 2/3 गोल्ड (₹12,000): स्थिरता।
- 1/3 सिल्वर (₹6,000): ग्रोथ पोटेंशियल।
रेंज (30-40 साल वालों के लिए):
- टोटल मेटल्स: 15-20%।
- गोल्ड: 10-15%।
- सिल्वर: 5-10%।
क्यों? इक्विटी पहले से वोलेटाइल। सिल्वर अतिरिक्त जोखिम न ले। गोल्ड हेज। लॉन्ग-रन रिटर्न समान।
उदाहरण टेबल (35 साल, ₹10 लाख पोर्टफोलियो):
| एसेट क्लास | % एलोकेशन | राशि (₹) | उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| इक्विटी (MF/स्टॉक्स) | 65% | 6,50,000 | ग्रोथ |
| गोल्ड | 12% | 1,20,000 | स्थिरता, हेज |
| सिल्वर | 6% | 60,000 | हाई ग्रोथ |
| डेब्ट/अन्य | 17% | 1,70,000 | बैलेंस |
50 साल के लिए: इक्विटी 50%, मेटल्स 20-25% (अधिक गोल्ड)।
कब खरीदें, कब बेचें? टाइमिंग और फॉर्म
टाइमिंग: प्रेडिक्शन न करें। SIP करें!
- हर महीने: पोर्टफोलियो का 1-2% (ETF SIP)।
- गोल्ड रेशियो (गोल्ड:सिल्वर 70:1) मत फॉलो। मिसलीडिंग!
- 80:1 पर सिल्वर “सस्ता”? गोल्ड गिर सकता है, रेशियो बैलेंस।
- SIP से औसत प्राइस मिलेगा।
फॉर्म:
- प्राइमरी: ETF (Nippon Gold ETF, ICICI Pru Silver ETF)। लिक्विड, कोई स्टोरेज इश्यू।
- फिजिकल: त्योहार/ज्वेलरी के लिए (GST+मेकिंग चार्ज, लेकिन सेंटीमेंटल वैल्यू)।
- सिल्वर फिजिकल? स्टोरेज प्रॉब्लम। ETF बेस्ट।
बेचें कब? री-बैलेंस सालाना। अगर गोल्ड 20% से ऊपर? ट्रिम करें। गोल्स नजदीक? शिफ्ट टू डेब्ट।
फिनोलॉजी जैसे ऑप्शन्स: इक्विटी को स्मार्ट बनाएं
70% इक्विटी के लिए फिनोलॉजी 30 जैसा – मंथली 2-3 स्टॉक्स, 5+ साल होराइजॉन। डाइवर्सिफाइड, बोरिंग लेकिन वेल्थ क्रिएटर। लिंक डिस्क्रिप्शन में।
समरी: एक्शन प्लान
- हां, दोनों लें: गोल्ड स्थिरता, सिल्वर ग्रोथ।
- एलोकेशन: 100-एज रूल फॉलो।
- SIP ETF: टाइमिंग इग्नोर।
- शेयर करें दोस्तों से, जो सट्टा खेलते हैं!
निवेश बाजार में जोखिम होता है। निवेश से पहले सभी संबंधित दस्तावेज ध्यान से पढ़ें।

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