बजट 2026 पर विस्तृत ब्लॉग। जानें क्यों इस बार मध्यम वर्ग को निराशा हाथ लगी, बाजार गिरा, लेकिन सरकार का फोकस लॉन्ग-टर्म कैपिटल एक्सपेंडिचर पर क्यों है? टैक्स, आय-व्यय, और सरकार की प्राथमिकताओं को एक परिवार के उदाहरण से समझें।

बजट 2026: मेरी उम्मीदें शून्य थीं, लेकिन क्या यह बजट वाकई ‘अलग’ है?
इस साल बजट से मेरी उम्मीदें शून्य थीं। मध्यम वर्ग को इस बजट में कुछ नहीं मिला। यह सिर्फ टैक्स बढ़ाने और कुछ नहीं करने वाला बजट लगा। बाजार को देख लीजिए, 1000 अंकों से नीचे है। अक्सर बजट के बाद देश की हालत ऐसी ही होती है, क्योंकि बजट के दिन देश में अर्थशास्त्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है।
लेकिन यह बजट पिछले कुछ बजट से काफी अलग था। क्योंकि इस बजट के बाद अगर कोई सबसे दुखी होने वाला है, तो वह एक निवेशक है। इस साल, फ्रीबीज़ पर फोकस नहीं था। न ही टैक्स कटौती पर। इस बार का फोकस कैपिटल एक्सपेंडिचर पर था। ऐसी योजनाएं बनाई गईं जो देश को लंबे समय में फायदा पहुंचा सकती हैं।
मैं नहीं चाहता कि आपकी हालत ऐसी हो। यह बजट भी बहुत महत्वपूर्ण बजट है, बहुत अच्छा बजट है, बहुत बेस्ट बजट है। तो आइए समझते हैं बजट 2026 को, लेकिन एकदम सरल भाषा में।
1 फरवरी: वह दिन जब एक दस्तावेज़ सब कुछ बता देता है
1 फरवरी भारत के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण दिन है। क्योंकि इस दिन, देश का हर व्यक्ति सिर्फ एक दस्तावेज़ पढ़कर इन सवालों का सही जवाब दे सकता है:
* सरकार पैसा कहां से कमाएगी?
* सरकार पैसा कहां खर्च करेगी?
* आर्थिक विकास के लिए सरकार की विजन क्या है?
अगर आप इन 3 टॉपिक्स को समझ जाते हैं, तो आप एक स्मार्ट और जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। बजट उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है। आपको बस कुछ कॉन्सेप्ट समझने हैं।
बजट को समझें: एक बड़े परिवार की डिनर टेबल की तरह
कल्पना कीजिए, आप एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। परिवार में सभी सदस्य कुछ न कुछ कमाते हैं और पहले दिन मां को सैलरी देते हैं। फिर डिनर पर चर्चा होती है कि क्या-क्या जरूरी खर्चे आने वाले हैं।
* छोटा भाई कहता है: मैंने काफी दिनों से घूमने नहीं जाया, मनाली चलते हैं।
* बड़ा भाई कहता है: मेरी शादी है इस साल, तैयारी के खर्चे हैं।
* पिताजी कहते हैं: पहले घर की छत देखो टपक रही है।
फिर मां तय करती हैं कि घर की प्राथमिकताएं क्या हैं? पहले किस चीज पर खर्च करना है। बस। सरल भाषा में बजट यही होता है।
एक देश एक बड़ा परिवार है, जहां सभी नागरिक टैक्स के रूप में योगदान देते हैं। सबकी मांग अलग है, प्राथमिकता अलग है। लेकिन सरकार को तय करना है कि क्या जरूरी है और क्या नहीं। और इसके लिए अनलिमिटेड पैसा नहीं होता।
बजट के तीन प्रकार: सरप्लस, बैलेंस्ड और डेफिसिट
1. सरप्लस बजट: आय > व्यय
2. बैलेंस्ड बजट: आय = व्यय
3. डेफिसिट बजट: व्यय > आय (ज्यादातर यही होता है)
पिछले साल हमारी कुल आय थी ₹34.96 लाख करोड़ और कुल खर्च था ₹50.65 लाख करोड़। यानी हमने कमाए से ज्यादा खर्च किया। यह अंतर कहां से आया? उधार लेकर। इसे ही राष्ट्रीय ऋण (National Debt) कहते हैं।
आय के स्रोत: अगर देश 1 रुपया कमाता है तो…
* 18 पैसे: कॉरपोरेट टैक्स
* 21 पैसे: इनकम टैक्स
* 18 पैसे: जीएसटी व अन्य टैक्स
* 4 पैसे: कस्टम ड्यूटी
* 6 पैसे: एक्साइज ड्यूटी
* 10 पैसे: नॉन-टैक्स रेवेन्यू
* 2 पैसे: नॉन-डेट कैपिटल रिसीट्स
* 24 पैसे: हमें उधार लेने पड़ते हैं!
इससे पता चलता है कि हमारे टैक्स से भी देश के सारे खर्चे नहीं पूरे होते। सड़क, रेल, IIT-IIM, सैनिकों की सैलरी – इन सबके लिए उधार लेना पड़ता है।
खर्च कहाँ हो रहा है? टॉप 10 मंत्रालय
1. वित्त मंत्रालय: ₹19.72 लाख करोड़ (सबसे ज्यादा ब्याज अदायगी में)
2. रक्षा मंत्रालय: ₹7.84 लाख करोड़
3. सड़क एवं राजमार्ग: ₹3.09 लाख करोड़ (नई सड़कों के निर्माण पर)
4. रेलवे: ₹2.81 लाख करोड़ (कैपिटल खर्च पर)
5. गृह मंत्रालय: ₹2.55 लाख करोड़
6. उपभोक्ता मामले: ₹2.39 लाख करोड़ (ज्यादातर MSP सब्सिडी)
7. ग्रामीण विकास: ₹1.97 लाख करोड़ (मनरेगा, PM ग्राम सड़क)
8. रसायन एवं उर्वरक: ₹1.70 लाख करोड़ (उर्वरक सब्सिडी)
9. कृषि मंत्रालय: ₹1.40 लाख करोड़ (PM किसान, फसल बीमा)
10. शिक्षा: ₹1.39 लाख करोड़ (केंद्रीय विश्वविद्यालय, छात्रवृत्ति)
एक चौंकाने वाला तथ्य: ISRO को सिर्फ ₹13,000 करोड़ मिले, जबकि डाक विभाग को ₹27,000 करोड़ मिले (इसके घाटे को पूरा करने के लिए)! अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में निवेश न बढ़ा पाना दुखद है।
बजट 2026 की बड़ी बातें: लॉन्ग टर्म पर फोकस
इस बार के बजट में ऐसी योजनाओं पर जोर रहा जिनका फायदा तुरंत नहीं, बल्कि लंबे समय में मिलेगा।
* टेक्सटाइल उद्योग को राहत: ट्रम्प टैरिफ से प्रभावित इस उद्योग के लिए नेशनल फाइबर मिशन, हथकरघा मिशन जैसे ऐलान।
* रेयर अर्थ मिनरल्स कॉरिडोर: आंध्र, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु को सपोर्ट। स्मार्टफोन, EV, डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
* शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर: 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और Tier-2/3 शहरों के विकास के लिए ₹5,000 करोड़। भगवान करे पैदल पथ और पार्कों पर भी खर्च हो!
* मेडिकल टूरिज्म हब: भारत के सस्ते और गुणवत्तापूर्ण इलाज को विदेशियों तक पहुंचाने की योजना।
* टूरिस्ट गाइड ट्रेनिंग: IIM की मदद से 10,000 गाइड्स को ट्रेनिंग। विदेशी पर्यटकों के लिए भारत की छवि सुधरेगी।
* मानसिक स्वास्थ्य: उत्तर भारत में NIMHANS 2 और रीजनल हब बनाने की बात।
ये सभी बढ़िया विचार हैं, लेकिन एग्जीक्यूशन पर सवाल बना रहता है।
अंत में, सरकार से कुछ सवाल…
1. आर्थिक सर्वे की अनदेखी: सर्वे में रुपये के गिरने, एक्सपोर्ट न बढ़ने की समस्या बताई गई, पर बजट में इस पर खास चर्चा नहीं।
2. बांग्लादेश को अनुदान: एक खुलकर विरोधी पड़ोसी देश को ₹60 करोड़ की सहायता? क्या यह हमारे पैसे का सही इस्तेमाल है?
3. कंटेंट क्रिएशन लैब: आर्थिक सर्वे ने स्क्रीन एडिक्शन को खतरा बताया, फिर बच्चों को कंटेंट क्रिएशन सिखाने के लिए लैब? क्या यह समस्या का समाधान है या सुर्खियां बटोरने का तरीका?
4. मध्यम वर्ग की पीड़ा: इनकम टैक्स रिफंड महीनों से अटके हैं। टैक्स बेस बढ़ाने का कोई ठोस प्लान नहीं।
5. बाजार को झटका: F&O पर STT बढ़ने से बाजार गिरा। कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत की उम्मीद खत्म।
निष्कर्ष: यह बजट एक तरफ दूरदर्शी योजनाओं से भरा है, तो दूसरी तरफ तात्कालिक राहत और निष्पक्ष टैक्स बोझ के मामले में निराश करता है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि कैपिटल एक्सपेंडिचर से बनने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य में फल देगा, लेकिन आज के टैक्स देने वाले मेहनती नागरिक की पीड़ा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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