बजट 2026-27 के सभी कर बदलाव नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के ढांचे में होंगे। जानें कैसे यह नया कानून पर्सनल, कॉर्पोरेट और HUF टैक्स को प्रभावित करेगा, क्या रहेगा पुराने सिस्टम से अलग, और किस तरह यह सुधार पिछले प्रयासों का नतीजा है।

भारत का कराधान ढांचा एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर है। वित्त मंत्रालय और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की तरफ से मिल रहे संकेतों के मुताबिक, आगामी बजट 2026-27 में प्रस्तावित सभी कर संशोधन सीधे नए ‘इनकम टैक्स एक्ट, 2025’ के अंतर्गत लागू किए जाएंगे।यह कदम दशकों पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 को एक सरल, समकालीन और तकनीक-अनुकूल कानून से प्रतिस्थापित करने की दिशा में निर्णायक है।
नए एक्ट के तहत क्या-क्या शामिल होगा?
संसद द्वारा नए एक्ट की मंजूरी के बाद प्रक्रिया तेज हो गई है और विस्तृत नियम, अधिसूचनाएं और टैक्स फॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। नया ढांचा व्यापक रूप से सभी प्रमुख करदाता वर्गों को कवर करेगा:
1. पर्सनल इनकम टैक्स: नौकरीपेशा व्यक्तियों, पेशेवरों और फ्रीलांसर्स से जुड़े सभी प्रावधान, छूट की धाराएं, कटौतियां और कर दरों का ढांचा नए एक्ट के अध्यायों में परिभाषित किया जाएगा।
2. कॉर्पोरेट टैक्स: कंपनियों और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) पर लागू कर दरें, मैट्रिक्स, कर्ज और इक्विटी के नियम, तथा व्यय की पहचान से संबंधित प्रावधान नए सिस्टम में एकीकृत होंगे।
3. HUF (हिंदू अविभाजित परिवार): HUF को एक अलग करदाता इकाई के रूप में मान्यता देने वाले नियम भी नए कानून का अभिन्न हिस्सा बनेंगे, जिससे पारंपरिक संरचना और कर लाभ बरकरार रहेंगे।
टैक्स सिस्टम सुधार: एक लंबी यात्रा का परिणाम
यह नया कानून रातों-रात नहीं आया है। यह कर प्रशासन को सरल और न्यायसंगत बनाने की लगभग दो दशकों की मांग और प्रयासों का परिणाम है।
2010 का डायरेक्ट टैक्स कोड (DTC): पहली बड़ी कोशिश 2010 में डायरेक्ट टैक्स कोड लाने की हुई थी। हालांकि यह व्यापक चर्चा का विषय बना, लेकिन कई राजनीतिक और आर्थिक कारणों से इसे अंततः लागू नहीं किया जा सका।
2017 की अखिलेश रंजन समिति: डीटीसी के रुकने के बाद, कर प्रणाली में सुधार की आवश्यकता लगातार बनी रही। इसी कड़ी में 2017 में सरकार ने प्रत्यक्ष कर कानूनों को सरल बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की, जिसकी अध्यक्षता अखिलेश रंजन ने की।
समिति की सिफारिशों से जन्म: इस समिति की गहन सिफारिशों और हितधारकों के व्यापक परामर्श ने ही’इनकम टैक्स एक्ट, 2025′ की नींव रखी। नए कानून का प्राथमिक उद्देश्य जटिलताओं को दूर करना, विवादों को कम करना और अनुपालन को आसान बनाना है।
आम करदाता के लिए क्या बदलेगा? मकसद है सरलता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए कानून का मुख्य फोकस प्रक्रियात्मक सरलता पर है। आम तौर पर करदाताओं में यह चिंता रहती है कि नए कानून के साथ कर दरें बढ़ सकती हैं, लेकिन प्रारंभिक संकेत यही हैं कि मौजूदा कर स्लैब और दरें अपरिवर्तित रहने की संभावना है।
हालांकि, निम्नलिखित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है:
नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए:फॉर्म भरने की प्रक्रिया और सत्यापन और सरल हो सकती है। निवेश और व्यय से जुड़ी कटौतियों को और स्पष्ट तरीके से परिभाषित किया जा सकता है।
छोटे व्यापारियों और MSMEs के लिए: लेखांकन और कर संबंधी प्रावधान कारोबार की वास्तविकताओं के अनुकूल हो सकते हैं, जिससे अनुपालन का बोझ कम हो।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए: पेंशन आय और स्वास्थ्य व्यय से जुड़े विशेष प्रावधानों को और अधिक राहतपूर्ण बनाया जा सकता है।
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आगे की राह: तैयार रहें
नए एक्ट के लागू होने के साथ, सभी टैक्स रिटर्न फॉर्म, ITR फॉर्मेट और ई-फाइलिंग पोर्टल के इंटरफेस को नए कानून के अनुरूप बदला जाएगा। करदाताओं और कर पेशेवरों के लिए सलाह है कि वे CBDT द्वारा जारी होने वाले ड्राफ्ट नियमों और अधिसूचनाओं पर नजर रखें, ताकि संक्रमण सहज रहे।
निष्कर्ष: इनकम टैक्स एक्ट, 2025 भारतीय कर इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। बजट 2026-27 इसे जमीन पर उतारने का मंच तैयार करेगा।
यह सुधार न केवल प्रशासनिक दक्षता लाएगा, बल्कि लंबे समय में करदाताओं के लिए एक पारदर्शी और अनुमानित वातावरण भी निर्मित करेगा।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। यह कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है। कर संबंधी किसी भी निर्णय से पहले योग्य कर सलाहकार या चार्टर्ड एकाउंटेंट से परामर्श अवश्य लें।)

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