
Retirement Planning का सबसे बड़ा सवाल यही होता है—नौकरी खत्म होने के बाद हर महीने की आमदनी कैसे बनी रहे? रिटायरमेंट के बाद सैलरी तो बंद हो जाती है, लेकिन घर के खर्च, मेडिकल जरूरतें और महंगाई लगातार बढ़ती रहती है. ऐसे में अगर पहले से सही योजना न हो, तो फाइनेंशियल प्रेशर तेजी से बढ़ सकता है.इसी समस्या का सबसे मजबूत समाधान है Passive Income यानी ऐसी कमाई, जिसमें बार-बार काम किए बिना तय समय पर पैसा मिलता रहे.Tax Samachar की इस खास रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं रिटायरमेंट के बाद पैसिव इनकम के 5 ऐसे भरोसेमंद और सॉलिड तरीके, जो आपकी आर्थिक चिंताओं को काफी हद तक कम कर सकते हैं.
Passive Income क्या होती है?
Passive Income का मतलब है ऐसी नियमित आमदनी, जो रोज़ मेहनत किए बिना मिलती रहे. शुरुआत में निवेश या प्लानिंग करनी पड़ती है, लेकिन एक बार सेट होने के बाद हर महीने या तय अवधि पर पैसा अपने-आप खाते में आता रहता है.रिटायरमेंट के बाद फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए पैसिव इनकम को सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि इससे खर्चों की प्लानिंग आसान हो जाती है और भविष्य को लेकर तनाव कम होता है.
- सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS)
SCSS रिटायर्ड लोगों के लिए सबसे सुरक्षित और लोकप्रिय निवेश विकल्पों में से एक है. यह पूरी तरह सरकारी गारंटी वाली स्कीम है, जिसमें निवेश पर नियमित ब्याज मिलता है.
मुख्य फायदे
ब्याज दर: लगभग 8.2% (मौजूदा दर)
निवेश सीमा: अधिकतम ₹30 लाख
अवधि: 5 साल
ब्याज भुगतान: हर तिमाही सीधे बैंक खाते में
इस स्कीम की खास बात यह है कि इसमें मिलने वाला ब्याज रिटायरमेंट के बाद स्थिर इनकम देता है. साथ ही आयकर कानून के तहत टैक्स बेनिफिट भी मिल सकता है, जिससे यह विकल्प और आकर्षक बन जाता है.
- प्रॉपर्टी को किराए पर देना
अगर आपके पास फ्लैट,मकान या दुकान जैसी कोई प्रॉपर्टी है,तो उसे किराए पर देना रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम का मजबूत जरिया बन सकता है.
क्यों है फायदेमंद?
हर महीने तय किराया मिलता है
महंगाई के साथ किराया बढ़ने की संभावना
लॉन्ग टर्म में स्थिर और भरोसेमंद इनकम
ध्यान रखने वाली बातें
किरायेदार से लिखित लीज एग्रीमेंट जरूर बनाएं
KYC और पुलिस वेरिफिकेशन कराएं
मेंटेनेंस और प्रॉपर्टी डैमेज का रिस्क समझकर चलें
- डिविडेंड देने वाले शेयर और म्यूचुअल फंड्स
जो रिटायरमेंट के बाद भी अपने पैसे को बढ़ते देखना चाहते हैं, उनके लिए डिविडेंड देने वाले शेयर और म्यूचुअल फंड्स एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं.
फायदे
सालाना या तिमाही डिविडेंड से रेगुलर इनकम
लंबे समय में पूंजी में ग्रोथ की संभावना
सुझाव
मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड वाले फंड्स चुनें
ज्यादा रिस्क लेने से बचें और पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई करें
यह विकल्प उन लोगों के लिए बेहतर है, जो थोड़े रिस्क के साथ बेहतर रिटर्न चाहते हैं.
- पोस्ट ऑफिस मासिक इनकम स्कीम (MIS)
Post Office MIS उन सीनियर सिटिजन्स के लिए सही है, जो रिस्क से दूर रहना चाहते हैं और हर महीने तय इनकम पसंद करते हैं.
स्कीम की खास बातें
निवेश सीमा: ₹9 लाख (सिंगल अकाउंट), ₹15 लाख (जॉइंट अकाउंट)
ब्याज दर: करीब 7.4%
अवधि : 5 साल
हर महीने ब्याज सीधे खाते में
सरकारी योजना होने के कारण इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और नियमित इनकम की गारंटी मिलती है.
- Annuity Plan या Pension Scheme
अगर आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन की तरह फिक्स रकम मिलती रहे, तो Annuity Plan एक अच्छा विकल्प है.
कैसे काम करता है?
एकमुश्त रकम निवेश करनी होती है
बदले में जीवनभर या तय अवधि तक नियमित इनकम मिलती है
इनकम की राशि आपके निवेश और चुने गए प्लान पर निर्भर करती है
यह उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर फिक्स इनकम चाहते हैं.
निष्कर्ष
रिटायरमेंट के बाद आर्थिक चिंता से बचने के लिए सिर्फ बचत काफी नहीं होती, बल्कि सही Passive Income Planning बेहद जरूरी है. SCSS, किराया, डिविडेंड, पोस्ट ऑफिस MIS और Annuity Plan—ये सभी विकल्प मिलकर आपकी रिटायरमेंट लाइफ को आर्थिक रूप से सुरक्षित और तनाव-मुक्त बना सकते हैं.अगर आप रिटायरमेंट के करीब हैं या पहले से रिटायर्ड हैं, तो आज ही इन विकल्पों पर विचार करें और अपनी जरूरत व रिस्क प्रोफाइल के हिसाब से सही फैसला लें.ऐसी ही टैक्स, निवेश और रिटायरमेंट से जुड़ी अहम खबरों के लिए जुड़े रहें Tax Samachar के साथ.
