क्या आप जानते हैं बैंक सिर्फ ब्याज से ही नहीं, आपकी रोजमर्रा की छोटी-छोटी सेवाओं से भी करते हैं मोटी कमाई? यहां जानें बैंकों की आय के 7 गैर-ब्याज स्रोत, जिनसे आप अक्सर अनजान रहते हैं।

ज्यादातर लोगों को लगता है कि बैंक सिर्फ लोन देकर ब्याज कमाते हैं या फिर जमा राशि पर कम ब्याज देकर और ज्यादा ब्याज वसूलकर मुनाफा कमाते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बैंकों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा गैर-ब्याज आय से आता है। यानी वे आपकी रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी छोटी-छोटी सेवाओं और चार्जेज से भी अच्छी-खासी कमाई करते हैं।
आइए, आज Tax Samachar में जानते हैं कि ब्याज के अलावा बैंक और कहां-कहां से कमाई करते हैं, और कैसे ये चार्ज आपके बैंक बैलेंस को प्रभावित करते हैं।
1. लोन पर लगने वाले विभिन्न चार्ज और फीस
लोन पर ब्याज तो बैंक कमाते ही हैं, लेकिन इसके साथ ही कई तरह के ‘हिडन चार्जेज’ भी उनकी आय का बड़ा स्रोत हैं:
* प्रोसेसिंग फीस: लोन स्वीकृत होने पर ली जाने वाली यह फीस लोन राशि के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में होती है।
* लेट पेमेंट चार्ज: ईएमआई या किस्त देर से जमा करने पर लगने वाला जुर्माना।
* प्री-पेमेंट पेनल्टी: कुछ लोन (जैसे होम लोन) में समय से पहले पूरा भुगतान करने पर लगने वाला चार्ज।
* डॉक्यूमेंटेशन/एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज: फाइल तैयार करने और प्रबंधन का शुल्क।
2. सर्विस चार्ज और पेनल्टी – आपकी रोजमर्रा की कमाई पर डाका
यह वह क्षेत्र है जिससे हर ग्राहक का सीधा वास्ता पड़ता है और बैंकों को बिना जोखिम के नियमित आय मिलती रहती है:
* न्यूनतम शेष राशि (MAB) न रखने पर जुर्माना।
* चेक बाउंस चार्ज।
* डेबिट/क्रेडिट कार्ड जारी करने व नवीनीकरण का वार्षिक शुल्क।
* ATM शुल्क (दूसरे बैंक के ATM से निकासी या सीमा से अधिक निकासी पर)।
* बैंक स्टेटमेंट, चेकबुक जारी करने का शुल्क।
* एसएमएस अलर्ट सब्सक्रिप्शन चार्ज।
* निधि (NEFT/RTGS/IMPS) हस्तांतरण शुल्क (कुछ लेनदेन पर)।
3. इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड का कमीशन (थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स)
बैंक अब सिर्फ बैंकिंग नहीं, वन-स्टॉप शॉप बन गए हैं। वे बीमा (जीवन/सामान्य/स्वास्थ्य)और म्यूचुअल फंड की बिक्री करके मोटा कमीशन कमाते हैं। जब भी आप बैंक में पूछताछ करते हैं, तो आपको इन उत्पादों की पेशकश जरूर मिलती है। बैंक इनके लिए डिस्ट्रिब्यूटर/एजेंट का काम करते हैं और प्रीमियम या निवेश राशि पर कमीशन पाते हैं।
4. विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) और अंतरराष्ट्रीय लेनदेन
यह बैंकों के लिए एक हाई-मार्जिन बिजनेस है।
* विदेशी मुद्रा विनिमय (करेंसी एक्सचेंज): विदेश यात्रा या व्यापार के लिए मुद्रा बदलवाते समय बैंक बिड-आस्क स्प्रेड (खरीद और बिक्री दर का अंतर) के जरिए कमाते हैं।
* रेमिटेंस शुल्क: एनआरआई द्वारा भेजे गए पैसे (जैसे वेस्टर्न यूनियन, स्विफ्ट ट्रांसफर) पर अर्जित शुल्क।
* इंटरनेशनल कार्ड लेनदेन: विदेश में क्रेडिट/डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर लगने वाला फॉरेन करेंसी मार्क-अप (आमतौर पर 3-4%)।
5. ट्रेजरी और निवेश कार्य
बैंक जमा राशि का एक हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों (जैसे गिल्ट-एजेड सिक्योरिटीज, सरकारी बॉन्ड, ट्रेजरी बिल) में निवेश करते हैं। इनसे मिलने वाला ब्याज और इनके बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव से होने वाला लाभ (ट्रेजिंग लाभ) भी बैंक की आय का हिस्सा होता है। यह एक सुरक्षित और स्थिर आय का स्रोत है।
6. डेटा और टेक्नोलॉजी सेवाएं
बड़े बैंक अब अन्य छोटे बैंकों या संस्थाओं को अपनी तकनीकी प्लेटफॉर्म (कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर, पेमेंट गेटवे, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर) किराए पर देकर भी कमाई कर रहे हैं। इसे ‘टेक्नोलॉजी-ए-ए-सर्विस’ (TaaS) मॉडल कहा जा सकता है।
7. सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और कस्टोडियल सेवाएं
बैंक सरकार की विभिन्न योजनाओं (जैसे पेंशन, सब्सिडी का वितरण) को लागू करने के लिए चैनल के रूप में काम करते हैं, जिसके लिए उन्हें प्रति लेनदेन शुल्क मिलता है। साथ ही, वे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों या बड़े निवेशकों के लिए सिक्योरिटीज रखने (कस्टोडियल सर्विस) का काम भी करते हैं, जिससे उन्हें नियमित फीस प्राप्त होती है।
निष्कर्ष: एक सूचित ग्राहक बनें
बैंकों के लिए ये गैर-ब्याज आय के स्रोत जोखिम कम करने और मुनाफे में विविधता लाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। एक सामान्य ग्राहक के तौर पर आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपके बैंक अकाउंट से जुड़े कौन-से चार्जेज आपकी जेब पर भारी पड़ सकते हैं। अगली बार जब कोई बैंक आपको कोई नया प्रोडक्ट बेचे या कोई चार्ज लगाए, तो आप समझ सकेंगे कि यह उनकी कमाई का एक और तरीका है। अपने अधिकारों को जानें, शुल्क की तुलना करें और एक सूचित वित्तीय निर्णय लें।
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