दुनिया के सबसे बड़े AI समिट में भारत ने की बड़ी गलती? चीनी रोबोट वाले विवाद, सैम ऑल्टमैन की मौजूदगी और ऑर्गनाइजेशन की फेलियर की पूरी कहानी
फरवरी 2026 के दूसरे हफ्ते में दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी थीं। वजह थी भारत मंडपम में आयोजित होने वाला ‘India AI Impact Summit’ । दावा था ‘दुनिया का सबसे बड़ा AI समिट’ होस्ट करने का। मंच पर सजे थे टेक दिग्गज: OpenAI के सैम ऑल्टमैन, Anthropic के डेरियो अमोडेई, और Google के सुंदर पिचाई जैसे नाम। अडानी, अंबानी जैसे उद्योगपति AI में अरबों के निवेश की घोषणा कर रहे थे ।
लेकिन जैसे ही परदा हटा, असली तस्वीर सामने आने लगी। सोशल मीडिया पर एक तरफ #IndiaAISummit ट्रेंड कर रहा था, तो दूसरी तरफ एक अलग ही कहानी वायरल हो रही थी—चीनी रोबोट डॉग वाला विवाद, वाई-फाई न होने की शिकायतें, VIP मूवमेंट की वजह से लगे ट्रैफिक जाम और विपक्षी सांसदों द्वारा शर्ट उतारकर किए गए विरोध प्रदर्शन ।
Tax Samachar में आज हम इसी कंट्रास्ट को समझेंगे। इस इवेंट के तीन एंगल हैं: गुड, बैड और अगली। आइए, बिना लाग-लपेट के समझते हैं कि आखिर इस समिट में सही क्या हुआ, गलत क्या हुआ, और सबसे जरूरी, इससे आगे का रास्ता क्या है।
Read Also:क्यों कंपनियां इन-हैंड सैलरी बढ़ाकर बेसिक सैलरी घटा देती हैं?
Chapter 1: द गुड – जब इंडिया ने दिखाई ‘आत्मनिर्भर’ AI की ताकत
भारत AI समिट सिर्फ हेडलाइन बनाने का जरिया नहीं था। यह उस मेहनत का नतीजा था, जो पिछले कुछ सालों में भारत के टेक इकोसिस्टम ने की है।
1. घरेलू AI मॉडल्स का धमाका
समिट में सबसे ज्यादा चर्चा Sarvam AI की रही। पीक XV के मैनेजिंग डायरेक्टर राजन आनंदन ने तो यहां तक कह दिया कि “सर्वम एआई के लॉन्च इवेंट में उतने लोग थे, जितने पूरे पेरिस AI समिट 2025 में कुल शामिल हुए थे!” ।
सर्वम AI ने स्मार्ट ग्लासेस लॉन्च किए जो भारत की 22 भाषाओं में लाइव ट्रांसलेशन कर सकते हैं। वहीं फ्रैक्टल एनालिटिक्स ने ‘वैद्य AI 2.0’ पेश किया, जो डॉक्टर और मरीज के बीच की भाषा की दूरी को मिटाता है। यह मॉडल ओपन एआई के बेंचमार्क्स को टक्कर दे रहा है ।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की कि इंडिया एआई मिशन के तहत अब 12 कंपनियां LLM (लार्ज लैंग्वेज मॉडल) डेवलप कर रही हैं। IIT बॉम्बे कंसोर्टियम-भारतजेन को लगभग ₹988 करोड़ का सब्सिडी भी मिला है, जो सरकारी एप्लिकेशन में AI का उपयोग बढ़ाएगा ।
2. ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज
यह पहला मौका था जब किसी ग्लोबल साउथ देश ने इतने बड़े AI सम्मेलन की मेजबानी की। समिट का थीम था “People, Planet, and Progress” ।
आंकड़े बताते हैं कि इस समिट में 136 देशों के 15,500 से ज्यादा पंजीकरण हुए, जिनमें ग्लोबल साउथ के 76 देश शामिल थे । ‘AI for All’ चैलेंज में 21% अंतरराष्ट्रीय आवेदन थे, तो ‘YUVAi’ चैलेंज में 2,500 आवेदन आए। यह साबित करता है कि भारत सिर्फ टेक ही नहीं, बल्कि AI गवर्नेंस की दिशा में भी दुनिया की अगुआई करना चाहता है ।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश
अडानी और रिलायंस जैसे समूहों ने AI डेटा सेंटर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में 250 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणा की। सरकार ने 38,000 GPU उपलब्ध कराए हैं और इसे बढ़ाकर 50,000 करने की योजना है, वो भी एक डॉलर प्रति घंटे से कम की दर पर ।
Chapter 2: द बैड – जब एग्जीक्यूशन ने इरादों को शर्मिंदा किया
यह वो हिस्सा है जिसने पूरे आयोजन पर पानी फेरा। इरादे अच्छे थे, लेकिन जमीनी हकीकत ने भारत की उस पुरानी कमजोरी को उजागर कर दिया, जिसे हम “जुगाड़ में यकीन” कहते हैं।
1. वो चीनी रोबोट डॉग वाला विवाद
सबसे ज्यादा शर्मिंदगी वाला मामला गलगोटियास यूनिवर्सिटी से जुड़ा है। प्रोफेसर ने मीडिया के सामने एक रोबोट डॉग पेश किया और उसे अपनी यूनिवर्सिटी का ‘ओरियन’ बताया। देखते ही देखते वायरल हो गया। मगर सच्चाई कुछ और ही निकली—वो रोबोट चीन की कंपनी का बना हुआ था, जो दुनियाभर में आसानी से खरीदा जा सकता है ।
जैसे ही यह राज खुला, अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे हाथों-हाथ लिया। दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट हो या फीनिक्स टीवी, सुर्खियां बनीं “Indian University Caught Passing Chinese Robot Dog as Own Invention” । सूत्रों के मुताबिक, आयोजकों ने गुस्से में आकर यूनिवर्सिटी का स्टॉल ही हटवा दिया और बिजली काट दी ।
2. क्या टेक समिट में वाई-फाई नहीं होता?
यह सबसे बुनियादी सवाल है। डे वन पर पहुंचे विजिटर्स ने शिकायत की कि लंबी लाइनें थीं, वेन्यू के अंदर लैपटॉप ले जाने की इजाजत नहीं थी, और सबसे बड़ी बात—वाई-फाई नहीं था । एक स्टार्टअप फाउंडर की महंगी चीजें वेन्यू के अंदर से चोरी हो गईं (हालांकि 24 घंटे में रिकवर हो गईं)। यह सब देखकर माइक्रोसॉफ्ट के रिसर्चर जय गाला ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह समिट मेहनत करने वालों के लिए थी, लेकिन हमें ट्रैफिक में घंटों बर्बाद करने के अलावा कुछ नहीं मिला” ।
3. सैम ऑल्टमैन और डेरियो अमोडेई वाला ‘अटपटा’ फोटो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में जब फोटो के लिए सब लोग खड़े हुए, तो एक अजीब सा सीन देखने को मिला। सैम ऑल्टमैन और डेरियो अमोडेई ने एक-दूसरे से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। फोटो में दोनों ने मुट्ठी बांध रखी थी, जिससे हाथों की कड़ी टूट गई ।
हालांकि यह उनकी निजी प्रतिद्वंद्विता (दोनों OpenAI के पूर्व साथी रह चुके हैं) के कारण था, लेकिन इसकी वजह से यह संदेश गया कि टेक लीडर्स के बीच भी सामंजस्य नहीं है। ऊपर से बिल गेट्स ने आखिरी वक्त पर अपना नाम वापस ले लिया ।
Chapter 3: द अगली – पॉलिटिक्स और ड्रामे ने दबा दी असली कहानी
इन सबके बीच, जो चीजें सही हो रही थीं, वो दब गईं। मीडिया ने नेगेटिव को प्राथमिकता दी। यही वो “अगली” एंगल है, जिस पर हमें ध्यान देना चाहिए।
1. वो शर्टलेस प्रोटेस्ट जिसने सर्कस कर दिया
विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने भारत मंडपम के अंदर शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया। मुद्दे थे अमेरिका-इंडिया ट्रेड डील से लेकर दूसरे राजनीतिक मसले। यह एक टेक इवेंट था, जहां दुनिया की निगाहें थीं। राजनीति की जगह थी संसद में, यहां नहीं। सोशल मीडिया पर आम लोगों ने भी इसे खराब स्वाद करार दिया। वहां मौजूद लोगों ने इन प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, तस्वीरें दुनियाभर में छप चुकी थीं।
2. हैकाथॉन जिसे कवरेज नहीं मिली
इस समिट में एक भव्य हैकाथॉन भी हुआ, जहां ₹4 लाख का प्राइज पूल था। टास्क था—साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए AI सिस्टम बनाना। भारत में रोजाना 5 लाख स्कैम कॉल होते हैं और 60 करोड़ रुपये की ठगी होती है। सैकड़ों युवाओं ने इसे सॉल्व करने के लिए कोडिंग की, मॉडल बनाए। लेकिन इसकी कहानी किसी ने नहीं दिखाई ।
3. वो असली रोबोट जो चाइना वाले डॉग की भेंट चढ़ गए
जहां एक तरफ फेक रोबोट वायरल हो रहा था, वहीं IIT कानपुर की कंपनी एक्सटेरा रोबोटिक्स ने अपने मेड इन इंडिया रोबोट्स दिखाए, जो बेहद दुरुह भौगोलिक परिस्थितियों में काम कर सकते हैं। ये रोबोट असेंबल नहीं थे, बने थे। लेकिन उन्हें वो तवज्जो नहीं मिली, जो उन्हें मिलनी चाहिए थी, क्योंकि सुर्खियों में चाइनीज डॉग और सियासी ड्रामा छाया रहा।
4. बुनकरों के लिए AI
एक और कंपनी थी ‘ब्रिजिटल लूम‘। इसने हैंडलूम बुनकरों के लिए AI सिस्टम बनाया है। एलईडी लाइट्स की मदद से यह AI बुनकर को बताता है कि सही फाइबर कौन सा है, डिजाइन में गलती कहां हो रही है, जिससे कपड़े की बर्बादी कम होती है। यही असल AI है—जो ट्रेडिशन को रिप्लेस न करके उसे एन्हांस करे। मगर ये कहानियां क्यों नहीं छपीं?
निष्कर्ष: हम अचूक क्यों नहीं हो सकते?
India AI Impact Summit ने भारत के दो चेहरे साफ दिखा दिए। एक चेहरा वो है जो अच्छे इरादों से लबरेज है, जो सर्वम AI और फ्रैक्टल जैसी कंपनियां खड़ी कर रहा है, जो लाखों बच्चों को एक्सपोजर दे रहा है। दूसरा चेहरा वो है जो बड़ी-बड़ी बातें करता है, लेकिन बेसिक्स में फेल हो जाता है।
समस्या यह है कि हम अच्छे इरादों से ही खुश हो जाते हैं। हम यह सुनिश्चित नहीं कर पाते कि एग्जीक्यूशन जीरो एरर हो। चीनी रोबोट वाली घटना ने हमारी क्रेडिबिलिटी पर सवाल खड़ा कर दिया। वाई-फाई न होने ने हमें एक थर्ड वर्ल्ड कंट्री जैसा दिखाया।
लेकिन इसके बावजूद, मैं ऑप्टिमिस्टिक हूं।
क्योंकि हर उस यूनिवर्सिटी के बदले जिसने फेक रोबोट दिखाया, 100 ऐसे स्टूडेंट्स हैं जो सीखने आए थे। हर उस नेगेटिव हेडलाइन के पीछे 100 ऐसे स्टार्टअप्स हैं जो असली समस्याएं सॉल्व कर रहे हैं।
टैक्स समाचार के पाठकों से सवाल है कि जितने जोश से आप इंडिया की फेलियर शेयर करते हैं, क्या उतने ही जोश से आप उन सक्सेस स्टोरीज को भी शेयर करेंगे? क्या हम मीडिया और जनता के तौर पर सिर्फ ड्रामा देखना चाहते हैं या असली डेवलपमेंट देखना चाहते हैं?
भारत का AI फ्यूचर उज्जवल है, बशर्ते हम हेडलाइन ग्रैबिंग से हटकर प्रॉब्लम सॉल्विंग की तरफ ध्यान दें।
क्या आप इस समिट में गए थे? आपके अनुभव क्या रहे? हमें कमेंट्स में बताएं और इस महत्वपूर्ण बहस को शेयर करें।
स्रोत: इस रिपोर्ट को तैयार करने में PIB, हिंदुस्तान टाइम्स, मनीकंट्रोल, फीनिक्स टीवी, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और सरकारी आंकड़ों से मदद ली गई है।
Read More :शार्क टैंक का ‘फाउंडर-मार्केट फिट’ मंत्र: जो बदल देगी आपकी वैल्यूएशन!
