सिर्फ ₹12 लाख इनकम का मतलब टैक्स छूट नहीं! स्पेशल रेट इनकम (STCG/LTCG) पर अलग से 20% या 12.5% टैक्स देना होगा।

अगर आपको सैलरी से इनकम होती है, तो यह लेख आपके लिए बेहद काम का है। अक्सर हम समझते हैं कि अगर हमारी इनकम ₹12 लाख से कम है, तो हमें कोई टैक्स नहीं देना है। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है! यह छूट सिर्फ नॉर्मल इनकम (जैसे सैलरी, किराया, ब्याज) के लिए है। अगर आपने शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी, या कहीं और से स्पेशल रेट वाली इनकम (जैसे कैपिटल गेन) कमाई है, तो आपको ₹12 लाख से कम इनकम पर भी टैक्स देना पड़ सकता है।
आज हम बात करेंगे कि कैसे आप अपनी इनकम को सही तरीके से प्लान करके टैक्स बचा सकते हैं। खासतौर पर अगर आप शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड्स या दूसरे निवेश में पैसा लगाते हैं, तो आपको यह समझना होगा कि कब और कितना टैक्स देना है। सबसे अहम बात: 31 मार्च से पहले टैक्स प्लानिंग कर लेना बहुत जरूरी है, वरना आपको बाद में जुर्माना और ब्याज दोनों देना पड़ सकता है ।
चलिए, सबसे पहले समझते हैं कि यह ₹12 लाख टैक्स फ्री इनकम वाला फॉर्मूला कैसे काम करता है।
₹12 लाख टैक्स फ्री इनकम का गणित
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 में ऐलान किया था कि नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में ₹12 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री होगी । लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह कोई नई बेसिक छूट सीमा नहीं है। असल में, बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट अब ₹4 लाख है ।
यहाँ पर गणित कुछ इस तरह है:
| इनकम स्लैब (₹) | टैक्स दर |
|---|---|
| 0 – 4,00,000 | शून्य |
| 4,00,000 – 8,00,000 | 5% |
| 8,00,000 – 12,00,000 | 10% |
| 12,00,000 – 16,00,000 | 15% |
| 16,00,000 – 20,00,000 | 20% |
| 20,00,000 – 24,00,000 | 25% |
| 24,00,000 से अधिक | 30% |
अब, सेक्शन 87A के तहत रिबेट का प्रावधान है। नई टैक्स व्यवस्था में यह रिबेट बढ़ाकर ₹60,000 कर दिया गया है । इसका मतलब है कि अगर आपकी कुल इनकम ₹12 लाख है, तो आप पर बनने वाला कुल टैक्स (जो कि ₹60,000 है) पूरी तरह से माफ हो जाता है।
और सैलरी वालों के लिए तो और भी अच्छी खबर है। उन्हें ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है । इसका मतलब हुआ कि अगर आपकी सैलरी ₹12,75,000 है, तो भी आपको एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होगा ।
यहाँ है असली बात: स्पेशल रेट इनकम पर टैक्स
लेकिन दोस्तों, यह छूट सिर्फ नॉर्मल इनकम के लिए है। आयकर में दो तरह की इनकम होती है: नॉर्मल इनकम और स्पेशल रेट वाली इनकम । नॉर्मल इनकम में सैलरी, किराया, ब्याज, बिजनेस का प्रॉफिट आदि आता है। स्पेशल रेट इनकम में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG), लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG), क्रिप्टो, ऑनलाइन गेमिंग आदि से होने वाली कमाई शामिल है।
सेक्शन 87A के तहत मिलने वाला रिबेट स्पेशल रेट इनकम पर लागू नहीं होता है । इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपकी स्पेशल रेट इनकम ₹4 लाख (बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट) से ज्यादा है, तो उस पर आपको अलग से टैक्स देना होगा, भले ही आपकी कुल इनकम ₹12 लाख से कम हो।
उदाहरण से समझिए:
मान लीजिए आपकी सैलरी ₹5 लाख है और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) ₹1 लाख है। कुल इनकम हुई ₹6 लाख। चूंकि आपकी कुल इनकम ₹12 लाख से कम है, आप सोचेंगे कि टैक्स जीरो है। लेकिन ऐसा नहीं है।
- सैलरी की इनकम ₹5 लाख नॉर्मल इनकम है, जो रिबेट के दायरे में आती है।
- लेकिन शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन ₹1 लाख स्पेशल रेट इनकम है। यह ₹4 लाख की बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट से ज्यादा है । इसलिए इस पूरे ₹1 लाख पर 20% की दर से टैक्स देना होगा । साथ ही 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस अलग से।
कैपिटल गेन पर टैक्स की पूरी जानकारी
बजट 2024 में कैपिटल गेन टैक्स के नियमों में बड़े बदलाव हुए थे, जो 23 जुलाई 2024 से लागू हो गए । आइए इन्हें समझते हैं:
1. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)
- क्या है: अगर आप लिस्टेड शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड 12 महीने से कम समय के लिए रखते हैं और बेचते हैं, तो उससे होने वाला मुनाफा STCG कहलाता है ।
- टैक्स दर: अब यह बढ़ाकर 20% कर दी गई है ।
- सेक्शन 87A रिबेट: STCG पर सेक्शन 87A का रिबेट नहीं मिलता । अगर आपकी कुल इनकम ₹12 लाख से कम भी है, तो STCG पर अलग से 20% टैक्स देना होगा, बशर्ते वह ₹4 लाख से ज्यादा हो ।
2. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)
- क्या है: लिस्टेड शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड 12 महीने से ज्यादा रखने के बाद बेचने पर होने वाला मुनाफा LTCG कहलाता है ।
- टैक्स दर: अब यह 12.5% है । अच्छी बात यह है कि अब ₹1.25 लाख तक का LTCG टैक्स फ्री है ।
- सेक्शन 87A रिबेट: LTCG पर भी सेक्शन 87A का रिबेट नहीं मिलता । ₹1.25 लाख की छूट के बाद बाकी बची रकम पर 12.5% टैक्स देना होगा, भले ही कुल इनकम ₹12 लाख से कम हो।
3. दूसरे एसेट्स (जैसे प्रॉपर्टी, गोल्ड)
- होल्डिंग पीरियड: अब ज्यादातर एसेट्स (जैसे प्रॉपर्टी, गोल्ड) को LTCG कहलाने के लिए 24 महीने से ज्यादा रखना होगा ।
- टैक्स दर: LTCG पर आम तौर पर 12.5% टैक्स है, और इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलेगा । हालांकि, 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी के लिए एक विकल्प है – आप चाहें तो 20% इंडेक्सेशन के साथ या 12.5% बिना इंडेक्सेशन के टैक्स दे सकते हैं, जो कम बने ।
अगर टैक्स चूका तो लगेगा ब्याज (Sections 234B & 234C)
यह सबसे अहम बात है जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं। स्पेशल रेट इनकम पर टैक्स आपको एडवांस टैक्स (Advance Tax) के रूप में पूरे साल में किश्तों में देना होता है । अगर आपकी कुल टैक्स देनदारी ₹10,000 से ज्यादा है, तो एडवांस टैक्स देना अनिवार्य है ।
एडवांस टैक्स की किश्तें इस प्रकार हैं:
- 15 जून तक: कम से कम 15% टैक्स देना होगा
- 15 सितंबर तक: कम से कम 45% टैक्स देना होगा
- 15 दिसंबर तक: कम से कम 75% टैक्स देना होगा
- 15 मार्च तक: 100% टैक्स देना होगा
अगर आप समय पर एडवांस टैक्स नहीं भरते हैं, तो आपको सेक्शन 234B और 234C के तहत 1% प्रति माह के हिसाब से ब्याज देना पड़ता है ।
एक केस स्टडी:
मान लीजिए आपने दिसंबर में शेयर बेचे और उस पर ₹50,000 का टैक्स बना। अगर आपने 15 दिसंबर वाली किश्त (75%) तक यह टैक्स नहीं भरा, तो आपको उस पर ब्याज देना होगा। इसके अलावा, आयकर विभाग अक्सर यह मानकर चलता है कि कैपिटल गेन 1 अप्रैल से ही था, जिससे ब्याज का कैलकुलेशन और बढ़ सकता है । इसलिए, जैसे ही आपको कैपिटल गेन हो, तुरंत एडवांस टैक्स भर देना समझदारी है।
स्मार्ट टैक्स प्लानिंग: परिवार के नाम पर इन्वेस्टमेंट करें
अब सवाल यह है कि ऐसी स्पेशल इनकम से बचा कैसे जाए? सबसे आसान तरीका है कि आप यह इन्वेस्टमेंट अपने नाम से न करके अपने परिवार के दूसरे सदस्यों (जैसे माता-पिता या 18 साल से बड़े बच्चे) के नाम पर करें। लेकिन यहाँ पर “क्लबिंग ऑफ इनकम” (Clubbing of Income) के नियम समझना बहुत जरूरी है ।
क्लबिंग ऑफ इनकम क्या है?
क्लबिंग ऑफ इनकम का मतलब है कि अगर आप बिना किसी उचित विचार के (बिना पैसे लिए) अपनी संपत्ति या पैसा किसी और के नाम कर देते हैं, तो उससे होने वाली इनकम आपकी अपनी इनकम में जोड़ दी जाएगी और आपको ही टैक्स देना होगा । यह नियम सिर्फ व्यक्तियों (Individuals) पर लागू होता है, फर्म या कंपनी पर नहीं ।
किनके नाम पर कर सकते हैं इन्वेस्टमेंट?
- 18 साल से बड़े बच्चे: अगर आपके बच्चे 18 साल से बड़े हैं, तो उनकी अलग इनकम मानी जाएगी। आप उनके नाम पर इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं और वह अपनी आईटीआर खुद फाइल करेंगे । यह सबसे सुरक्षित तरीका है।
- माता-पिता: आप अपने माता-पिता के नाम पर भी इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं। चूंकि वे सीनियर सिटीजन होंगे, उनकी बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट ज्यादा होती है (पुरानी व्यवस्था में 60 साल से ऊपर के लिए ₹3 लाख और 80 साल से ऊपर के लिए ₹5 लाख) ।
किनके नाम पर नहीं करना चाहिए?
- पत्नी (Spouse): अगर आप अपनी पत्नी के नाम पर बिना उचित विचार (बिना पैसे लिए) कोई एसेट ट्रांसफर करते हैं, तो उससे होने वाली इनकम (जैसे ब्याज, किराया) सेक्शन 64(1)(iv) के तहत आपकी इनकम में जुड़ जाएगी । अपवाद सिर्फ तब है जब पत्नी अपनी स्किल या प्रोफेशनल नॉलेज से कमाई कर रही हो ।
- नाबालिग बच्चे (18 साल से कम): नाबालिग बच्चे की किसी भी तरह की इनकम (जैसे FD पर ब्याज) सेक्शन 64(1A) के तहत माता-पिता की इनकम में जुड़ जाएगी, जिसकी इनकम ज्यादा हो । हालांकि, सेक्शन 10(32) के तहत हर बच्चे के लिए ₹1,500 सालाना की छूट जरूर मिलती है ।
- बहू (Daughter-in-law): अगर आप अपनी बहू के नाम पर कोई एसेट बिना पैसे लिए ट्रांसफर करते हैं, तो उससे होने वाली इनकम सेक्शन 64(1)(vi) के तहत आपकी इनकम में जुड़ जाएगी । यह नियम तभी लागू होगा जब ट्रांसफर के समय और इनकम मिलने के समय, दोनों ही समय बहू का रिश्ता बना हुआ हो ।
HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) एक और विकल्प
HUF एक अलग टैक्स इकाई है, जिसका अपना PAN होता है और वह अलग से ITR फाइल करता है । आप परिवार की संयुक्त संपत्ति या गिफ्ट से HUF के लिए कैपिटल बना सकते हैं । HUF को इनकम टैक्स में अलग से छूट और डिडक्शन मिलते हैं, जिससे परिवार की कुल टैक्स देनदारी कम हो सकती है । लेकिन HUF बनाते समय क्लबिंग के नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। अगर आप अपनी निजी संपत्ति HUF को बिना उचित विचार के ट्रांसफर करते हैं, तो उससे होने वाली इनकम आपकी अपनी इनकम में जुड़ जाएगी ।
निष्कर्ष: 31 मार्च से पहले करें ये काम
दोस्तों, उम्मीद है आप समझ गए होंगे कि सिर्फ ₹12 लाख से कम इनकम होने का मतलब टैक्स छूट नहीं है। स्पेशल रेट इनकम (जैसे कैपिटल गेन) के मामले में नियम अलग हैं।
यहाँ पर मैं आपको कुछ सुझाव देना चाहूंगा:
- 31 मार्च से पहले टैक्स प्लानिंग करें: वित्त वर्ष खत्म होने से पहले अपनी सभी तरह की इनकम का आकलन कर लें।
- स्पेशल इनकम पर नजर रखें: शेयर, म्यूचुअल फंड्स, प्रॉपर्टी से हुए मुनाफे को अलग से कैलकुलेट करें।
- एडवांस टैक्स भरें: अगर कैपिटल गेन से आपकी टैक्स देनदारी ₹10,000 से ज्यादा बन रही है, तो 15 मार्च से पहले एडवांस टैक्स भरना न भूलें। इससे सेक्शन 234B और 234C के तहत ब्याज से बच सकते हैं ।
- परिवार के नाम पर निवेश: स्पेशल इनकम वाले निवेश अपने नाम से न करके घर के बड़े बच्चों या माता-पिता के नाम पर करें। लेकिन क्लबिंग के नियमों का पूरा ध्यान रखें ।
- HUF पर विचार करें: अगर परिवार में संयुक्त संपत्ति है, तो HUF बनाना एक अच्छा टैक्स सेविंग ऑप्शन हो सकता है ।
टैक्स समाचार के साथ बने रहने के लिए धन्यवाद! हमारी कोशिश है कि आपको कम से कम टैक्स लगे और ज्यादा से ज्यादा कमाई हो। अगर इस विषय से जुड़ा कोई सवाल है, तो कमेंट करके पूछ सकते हैं।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी व्यवहारिक निर्णय लेने से पहले कृपया अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या टैक्स सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
