बजट से पहले सेंसेक्स-निफ्टी की गिरावट: वरदान या खतरा? 15 साल के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि प्री-बजट करेक्शन के बाद अक्सर मजबूत रिकवरी आती है। जानें सेंसेक्स, निफ्टी, मिड व स्मॉलकैप का पोस्ट-बजट परफॉर्मेंस और निवेशकों के लिए सबक।

केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार में एक अजीब सी घबराहट छा जाती है। निवेशक मुनाफा वसूलने लगते हैं, पोजीशन हल्की होती हैं और गिरावट का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन क्या यह गिरावट वास्तव में एक खतरा है, या फिर छिपा हुआ एक मौका?
पिछले 15 साल के आंकड़े एक रोचक और सुकून देने वाला संकेत देते हैं: बजट से पहले की यह गिरावट (प्री-बजट करेक्शन) कई बार बजट के बाद आने वाली मजबूत रिकवरी की आधारशिला बनी है। सेंसेक्स, निफ्टी और ब्रॉडर मार्केट ने बजट के बाद अक्सर बेहतर रिटर्न दिए हैं।
क्यों होती है बजट से पहले गिरावट?
बजट से पहले का डर असली होता है। निवेशक अनिश्चितता से बचने के लिए पैसे निकालते हैं। टैक्स में बड़े बदलाव, किसी सेक्टर पर असर, या फिस्कल घाटे की चिंता से बाजार में प्रेशर बनता है। लेकिन इतिहास बताता है कि यह डर अक्सर अवसर में बदल जाता है।
SBI Securities की एक विस्तृत रिपोर्ट के हवाले से पिछले 15 बजट के आंकड़ों पर नज़र डालते हैं।
सेंसेक्स का ट्रैक रिकॉर्ड: गिरावट के बाद आई तेजी
* एक सप्ताह का परफॉर्मेंस: पिछले 15 बजट में से 11 बार, बजट के बाद वाले सप्ताह में सेंसेक्स हरे निशान में बंद हुआ है, जिसमें औसतन 2.10% की बढ़त दर्ज की गई। सिर्फ 4 मौकों पर औसतन 2.05% की गिरावट देखी गई।
* तीन महीने का नज़ारा: लंबी अवधि में तस्वीर और भी दिलचस्प है। बजट के बाद 3 महीने में 9 बार सेंसेक्स ने तेजी दिखाई, जिसमें औसतन 6.77% का शानदार रिटर्न मिला। गिरावट के मौकों पर औसत नुकसान 5.28% रहा।
निष्कर्ष: बजट के बाद की अवधि सकारात्मक रहने की संभावना ज़्यादा है।
निफ्टी का रुख भी रहा है सकारात्मक
* एक सप्ताह: निफ्टी ने 15 में से 12 बार बजट-पश्चात सप्ताह में ग्रोथ दर्ज की, जिसका औसत 2.04% रहा।
* तीन महीने: 9 मौकों पर तीन महीने की अवधि में निफ्टी ने औसतन 7.40% की छलांग लगाई।
पैटर्न स्पष्ट है: बजट के ऐलान के बाद अनिश्चितता दूर होती है और बाजार वापस मूलभूत सिद्धांतों पर फोकस करता है, जिससे रिकवरी का रास्ता खुलता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप: ज़्यादा अस्थिरता, लेकिन मौका भी ज़्यादा?
ब्रॉडर मार्केट यानी मिड एंड स्मॉलकैप सेगमेंट में बजट से पहले की गिरावट अक्सर ज़्यादा तीखी होती है। हालांकि, रिकवरी भी उतनी ही तेज़ हो सकती है।
* बजट के बाद 1 सप्ताह: मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने 15 में से 11 बार बढ़त के साथ बंद किया, जिसमें औसतन 3.1% से 3.3% की तेजी देखी गई।
* बजट के बाद 3 महीने:
* मिडकैप इंडेक्स ने 10 मौकों पर औसतन 8.67% का रिटर्न दिया।
* स्मॉलकैप इंडेक्स ने 7 मौकों पर औसतन 14.54% का शानदार रिटर्न पैदा किया।
ध्यान रखें: स्मॉलकैप्स में जोखिम ज़्यादा है। पिछले साल (2025 के बजट से पहले) स्मॉलकैप इंडेक्स में भारी गिरावट आई थी और रिकवरी में समय लगा। ये सेगमेंट धैर्यवान निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं।
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
1. घबराएं नहीं, इतिहास को याद रखें: बजट से पहले की गिरावट एक नया ट्रेंड शुरू करने से ज़्यादा, एक “अनिश्चितता-निवारण” का दौर होती है।
2. लंबी नज़रिए से देखें: बजट के तत्काल बाद के उतार-चढ़ाव पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, 3-6 महीने के परफॉर्मेंस पर फोकस करें। ऐतिहासिक आंकड़े लंबी अवधि में सकारात्मक रहे हैं।
3. मौके की तलाश करें: प्री-बजट गिरावट गुणवत्ता वाले शेयरों को अच्छे valuations पर खरीदने का अवसर दे सकती है, खासकर उन सेक्टर्स में जिनसे बजट में सपोर्ट की उम्मीद है।
4. एसटीपी का उपयोग करें: अगर बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चित हैं, तो Systematic Transfer Plan (STP) के जरिए पैसा लगाना एक समझदारी भरा रास्ता हो सकता है।
अंतिम बात: बजट सिर्फ एक दिन का घटनाक्रम है, जबकि बाजार दीर्घकालिक आर्थिक विकास की कहानी कहता है। ऐतिहासिक पैटर्न बताते हैं कि बजट से पहले की नर्वसनेस, बजट के बाद के कॉन्फिडेंस में बदल सकती है। सूचित निर्णय लें, अपने एसेट एलोकेशन पर कायम रहें, और भावनात्मक व्यापार से बचें।
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