बजट 2026 का बड़ा बदलाव: अब Form 15H सिर्फ एक बार जमा करें, सभी डीमैट निवेशों पर मिलेगी TDS छूट। जानें नया केंद्रीकृत नियम क्या है, कैसे करें आवेदन और वरिष्ठ नागरिकों को कैसे मिलेगा फायदा।

बजट 2026 का बड़ा उपहार: अब Form 15H जमा करना हुआ एक क्लिक जितना आसान, जानें पूरी प्रक्रिया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026 ने वरिष्ठ नागरिकों और निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। Form 15H जमा करने की पुरानी और दुखदाई प्रक्रिया अब इतिहास की बात हो गई है। नए प्रस्ताव के तहत, इस प्रक्रिया को केंद्रीकृत और डिजिटल बनाया जाएगा, जिससे निवेशकों को अलग-अलग कंपनियों या संस्थानों के पास बार-बार यही फॉर्म भरकर जमा करने की झंझट से मुक्ति मिलेगी।
यह बदलाव विशेष रूप से उन सीनियर सिटीजन के लिए एक वरदान है, जो अपनी सेविंग्स को फिक्स्ड डिपॉजिट, कॉरपोरेट बॉन्ड, डिबेंचर और अन्य ब्याज-आधारित निवेशों में लगाते हैं, ताकि उनकी नियमित आय बनी रहे। आइए, विस्तार से समझते हैं कि Form 15H क्या है, नया नियम क्या लाया गया है, और यह आपके लिए कितना फायदेमंद साबित होगा।
Form 15H क्या है? एक नजर में समझें
Form 15H एक स्व-घोषणा (Self-Declaration) फॉर्म है, जिसे 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के भारतीय निवासी भर सकते हैं। इस फॉर्म का उद्देश्य सरल है: यदि किसी वरिष्ठ नागरिक की वित्तीय वर्ष में कुल कर-योग्य आय, मूल कर छूट सीमा (जो वर्तमान में 60+ आयु वर्ग के लिए ₹3 लाख प्रति वर्ष है) से कम है, तो वह यह फॉर्म जमा करके यह घोषणा कर सकता है कि उसकी ब्याज आय पर टीडीएस (Tax Deducted at Source) न काटा जाए।
इस फॉर्म का सामान्य उपयोग कहाँ होता था?
- बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाली ब्याज आय।
- कॉरपोरेट बॉन्ड्स या डिबेंचर से मिलने वाली ब्याज आय।
- गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (NCDs)।
- नगरपालिका बॉन्ड (Municipal Bonds)।
- डीमैट खाते में रखी गई अन्य ब्याज देने वाली प्रतिभूतियाँ (Securities)।
पुरानी व्यवस्था में, अगर एक निवेशक के पास तीन अलग-अलग कंपनियों के बॉन्ड और दो बैंकों में एफडी थीं, तो उसे हर एक संस्थान के पास अलग से Form 15H जमा करना पड़ता था। यह प्रक्रिया समय लेने वाली और असुविधाजनक थी।
बजट 2026: Form 15H के लिए क्रांतिकारी बदलाव
बजट घोषणा का सार यह है: “एक बार जमा करें, सभी जगह लागू हो जाए।”
नए नियम का मूल सिद्धांत:
नए प्रस्ताव के तहत, निवेशकों को अब Form 15H को हर उस कंपनी या संस्थान के पास अलग-अलग जमा नहीं करना होगा, जहाँ से उन्हें ब्याज आय प्राप्त होती है। इसके बजाय, उन्हें इसे केवल एक बार अपने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (Depository Participant – DP) या सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) / सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के पोर्टल के माध्यम से जमा करना होगा।
यह नई प्रणाली कैसे काम करेगी?
- एकल जमा: निवेशक अपना Form 15H डिजिटल रूप से अपने डीपी या डिपॉजिटरी पोर्टल पर जमा करेंगे।
- केंद्रीय प्रसारण: डिपॉजिटरी (NSDL/CDSL) इस जानकारी को अपने सिस्टम में दर्ज करेगी और इसे एक केंद्रीकृत डेटाबेस में रखेगी।
- स्वचालित संचार: जब भी कोई कंपनी (जिसमें निवेशक ने पैसा लगाया है) डिपॉजिटरी सिस्टम से जुड़ेगी तो वह स्वचालित रूप से यह सत्यापित कर सकेगी कि संबंधित निवेशक ने Form 15H जमा किया हुआ है या नहीं।
- TDS में छूट: सत्यापन के बाद, कंपनी उस निवेशक की ब्याज आय पर TDS काटने से छूट दे देगी।
महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण: यह बदलाव कहाँ लागू होगा?
- यह बदलाव मुख्य रूप से डीमैट खाते में रखे गए निवेशों पर लागू होगा। जैसे: कॉरपोरेट बॉन्ड, डिबेंचर, NCDs, सरकारी प्रतिभूतियाँ, म्यूनिसिपल बॉन्ड आदि।
- बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर, अभी भी पुरानी प्रक्रिया लागू रह सकती है। हालांकि, इस बदलाव की सफलता के बाद, भविष्य में बैंकिंग प्रणाली को भी इस केंद्रीकृत ढाँचे से जोड़े जाने की संभावना है।
नई व्यवस्था के लाभ: सुविधा, पारदर्शिता और दक्षता
- अत्यधिक सुविधा: वरिष्ठ नागरिकों को अब हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में घर बैठे, एक ही बार फॉर्म जमा करने की आवश्यकता होगी। यात्रा और कागजी कार्रवाई की झंझट खत्म।
- गलतियों में कमी: एक बार डिजिटल जमा करने से डेटा में गलती की संभावना कम होगी, जो अलग-अलग फॉर्म भरने में आम थी।
- समय और संसाधनों की बचत: निवेशकों और कंपनियों दोनों के प्रशासनिक कार्यभार में भारी कमी आएगी।
- बेहतर अनुपालन: केंद्रीकृत सिस्टम से आयकर विभाग को डेटा ट्रैक करने और अनुपालन सुनिश्चित करने में आसानी होगी।
- नकदी प्रवाह में सुधार: चूंकि TDS नहीं काटा जाएगा, वरिष्ठ नागरिकों को अपनी पूरी ब्याज आय समय पर मिलती रहेगी। बाद में रिफंड के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
निवेशकों के लिए एक्शन प्लान: अब क्या करें?
- डीमैट खाता सुनिश्चित करें: चूंकि नई प्रक्रिया डिपॉजिटरी सिस्टम से जुड़ी है, इसलिए आपके पास एक सक्रिय डीमैट खाता होना चाहिए।
- डीपी से संपर्क करें: आगामी वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2026 से) की शुरुआत में, अपने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (जैसे आपका ब्रोकर या बैंक) से नए Form 15H जमा करने के डिजिटल तरीके के बारे में पूछताछ करें।
- दस्तावेज तैयार रखें: आयकर पैन कार्ड, आयु प्रमाण (जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड) और पिछले वर्ष की आय का अनुमान तैयार रखें।
- बैंक एफडी के लिए अलग से ध्यान दें: जब तक बैंक इस सिस्टम से नहीं जुड़ते, बैंक एफडी के लिए अलग से फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया जारी रह सकती है। अपने बैंक से इस बारे में पूछें।
निष्कर्ष: डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और मजबूत कदम
Form 15H के लिए यह केंद्रीकृत प्रणाली ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस’ दोनों को बढ़ावा देने वाला एक सराहनीय कदम है। यह न केवल वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगा, बल्कि पूंजी बाजार में निवेश को और अधिक आकर्षक एवं कागज-रहित बनाएगा। यह बजट 2026 का ऐसा प्रावधान है, जो सीधे तौर पर देश के सम्मानित वरिष्ठ नागरिकों के हित में है और डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करता है। आने वाले वित्तीय वर्ष में, इस नई प्रक्रिया के लागू होते ही, निवेशकों को एक सुगम और तनाव-मुक्त अनुभव की उम्मीद करनी चाहिए।

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