बच्चों की उच्च शिक्षा की प्लानिंग के लिए कम्पाउंडिंग का फायदा उठाएं। जानें SIP, एजुकेशन लोन टैक्स बेनिफिट, और शिक्षा बचत योजना के बारे में सबकुछ।

आज के समय में बच्चों की उच्च शिक्षा की प्लानिंग सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता बन गई है। स्कूल-कॉलेज की फीस सामान्य महंगाई से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है – हर साल 10-15% की दर से, जबकि सामान्य महंगाई दर केवल 4-6% है। इसका मतलब है कि आज जो कोर्स ₹20 लाख में हो रहा है, वह 15 साल बाद ₹80 लाख से ₹1 करोड़ तक पहुँच सकता है। ऐसे में, महज मासिक बचत करना काफी नहीं है। आपको एक व्यवस्थित शिक्षा बचत योजना बनानी होगी। आइए, स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं कि कैसे आप अपने बच्चे के शैक्षिक भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।
1. जल्दी शुरुआत: कंपाउंडिंग का जादू समझें
बच्चों की उच्च शिक्षा की प्लानिंग का सबसे महत्वपूर्ण नियम है – जितनी जल्दी शुरुआत, उतना बेहतर। कंपाउंडिंग का जादू देखिए:
- यदि बच्चा 5 साल का है और आप ₹50 लाख का लक्ष्य रखते हैं (18 साल की उम्र तक), तो 12% रिटर्न मानकर आपको केवल ₹15,000 प्रति माह के SIP की आवश्यकता है।
- यदि आप 10 साल बाद शुरू करते हैं, तो यह रकम बढ़कर ₹50,000 प्रति माह हो जाएगी।
क्या करें? बच्चे के जन्म के समय ही एक अलग एजुकेशन गोल SIP शुरू कर दें। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि के लिए निवेश करें।
2. SIP for Child Education: सही फंड्स चुनना
सिर्फ SIP शुरू करना काफी नहीं है, सही फंड्स चुनना भी जरूरी है। बच्चों की उच्च शिक्षा की प्लानिंग के लिए:
- बच्चे की उम्र 0-10 साल: एग्रेसिव ग्रोथ फंड्स (80% इक्विटी, 20% डेट)
- बच्चे की उम्र 10-15 साल: बैलेंस्ड या हाइब्रिड फंड्स (60% इक्विटी, 40% डेट)
- बच्चे की उम्र 15-18 साल: कंजर्वेटिव हाइब्रिड (30% इक्विटी, 70% डेट/लिक्विड)
3. शिक्षा बचत योजना: टैक्स-एफिशिएंट विकल्प
शिक्षा बचत योजना में सिर्फ म्यूचुअल फंड्स ही नहीं, टैक्स-बेनिफिट वाले इंस्ट्रूमेंट्स भी शामिल करें:
- सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): लड़कियों की शिक्षा के लिए बेहतरीन, टैक्स-फ्री रिटर्न और धारा 80C के तहत कटौती। वर्तमान ब्याज दर: 8.2% प्रति वर्ष।
- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): 15 साल की लॉक-इन अवधि, टैक्स-फ्री रिटर्न, धारा 80C लाभ।
- एलआईसी चाइल्ड एजुकेशन प्लान: इन्शुरन्स कवर + निवेश का कॉम्बिनेशन।
4. एजुकेशन लोन टैक्स बेनिफिट: जानें पूरा फायदा
कई माता-पिता एजुकेशन लोन से डरते हैं, लेकिन सही प्लानिंग के साथ यह फायदेमंद हो सकता है:
आयकर धारा 80E का लाभ:
- एजुकेशन लोन पर चुकाई गई ब्याज की पूरी रकम टैक्स-डिडक्टिबल है।
- कोई अधिकतम सीमा नहीं – पूरी ब्याज राशि पर छूट।
- लोन लेने के बाद अधिकतम 8 वर्षों तक का लाभ।
- भारत और विदेश दोनों की पढ़ाई के लिए लोन पर लागू।
उदाहरण: यदि आप ₹20 लाख का एजुकेशन लोन लेते हैं (8.5% ब्याज दर), तो पहले साल आपकी ब्याज राशि लगभग ₹1,70,000 होगी। यह पूरी रकम आपकी टैक्सेबल इनकम से कट जाएगी।
5. हिडन कॉस्ट्स का रखें ध्यान
बच्चों की उच्च शिक्षा की प्लानिंग करते समय केवल ट्यूशन फीस ही नहीं, इन हिडन कॉस्ट्स का भी हिसाब रखें:
- रहने का खर्च: होस्टल/किराया – ₹10,000 से ₹50,000 प्रति माह
- किताबें और स्टडी मटेरियल: ₹50,000 से ₹2 लाख प्रति वर्ष
- टेक्नोलॉजी: लैपटॉप, टैबलेट – ₹50,000 से ₹1.5 लाख
- यात्रा खर्च: ₹20,000 से ₹1 लाख प्रति वर्ष
- एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज: ₹25,000 से ₹50,000 प्रति वर्ष
टिप: कुल अनुमानित खर्च में 25-30% अतिरिक्त जोड़कर रखें।
6. विदेशी शिक्षा के लिए विशेष प्लानिंग
यदि आप बच्चे को विदेश भेजने की सोच रहे हैं, तो:
- करेंसी रिस्क मैनेजमेंट: फॉरेन करेंसी डेट फंड्स या इंटरनेशनल फंड्स में निवेश करें।
- शुरुआती रिसर्च: USA में MBA का खर्च ₹70 लाख से ₹1.5 करोड़, UK में Engineering ₹40-80 लाख।
- एजुकेशन लोन: SBI, HDFC Credila, Avanse जैसे विशेष एजुकेशन लोन प्रोवाइडर्स से संपर्क करें।
7. रिव्यू और रिबैलेंसिंग: सालाना चेकअप जरूरी
हर साल अपनी शिक्षा बचत योजना की समीक्षा करें:
- फंड परफॉर्मेंस चेक: क्या आपके फंड्स बेंचमार्क से बेहतर परफॉर्म कर रहे हैं?
- लक्ष्य समीक्षा: क्या कोर्स की फीस बदली है? नए खर्च जुड़े हैं?
- एसेट एलोकेशन: उम्र के हिसाब से रिस्क एडजस्ट करें।
- SIP बढ़ोतरी: महंगाई के अनुसार SIP रकम बढ़ाएं।
टैक्स प्लानिंग टिप्स:
- पेरेंट्स के तहत इनकम: बच्चे के नाम पर निवेश करें ताकि उसकी इनकम टैक्स-फ्री रहे (₹2.5 लाख तक टैक्स-फ्री)।
- गिफ्ट टैक्स: पेरेंट्स से बच्चे को दिया गया पैसा गिफ्ट टैक्स से मुक्त है।
- स्कॉलरशिप: टैक्स-फ्री, इनकम के रूप में नहीं गिना जाता।
आपातकालीन योजना:
- इमरजेंसी फंड: 6-12 महीने की लिविंग कॉस्ट के बराबर अलग से रखें।
- टर्म इंश्योरेंस: माता-पिता का पर्याप्त लाइफ कवर (कम से कम लक्ष्य राशि के बराबर)।
- विल/नॉमिनी: सभी निवेशों में नॉमिनी डिटेल अपडेट रखें।
निष्कर्ष:
बच्चों की उच्च शिक्षा की प्लानिंग एक समग्र प्रक्रिया है जिसमें SIP for child education से शुरुआत करके एजुकेशन लोन टैक्स बेनिफिट तक का समावेश होना चाहिए। सही शिक्षा बचत योजना न केवल आपके वित्तीय बोझ को कम करेगी, बल्कि आपके बच्चे को बिना किसी आर्थिक चिंता के अपने सपने पूरे करने का अवसर भी देगी। याद रखें, आज की एक स्मार्ट प्लानिंग, कल आपके बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।
अगला कदम: इस सप्ताह अपने सभी निवेशों की समीक्षा करें, एक एजुकेशन गोल SIP शुरू करें, और किसी वित्तीय सलाहकार से एजुकेशन लोन टैक्स बेनिफिट के बारे में विस्तार से चर्चा करें।
Read More :बैंक लॉकर की चाबी खो जाए तो क्या करें? कौन उठाएगा ताला तोड़ने का खर्च?

1 thought on “बढ़ती महंगाई में बच्चों की उच्च शिक्षा की प्लानिंग कैसे करें? यह 7-स्टेप गाइड बचाएगी लाखों रुपये”