क्या आपको इनकम टैक्स विभाग से नोटिस मिला है? जानिए नोटिस वेरिफाई करने से लेकर ऑनलाइन जवाब देने का पूरा प्रोसेस। सेक्शन 142(1), 143(1), 143(2) के प्रकार और इग्नोर करने पर होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से पढ़ें।

नोटिस को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलना किसी के लिए भी चिंता का कारण बन सकता है। अक्सर लोग घबराकर नोटिस को नजरअंदाज कर देते हैं या उसे समझ नहीं पाते। यह सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।
आयकर नोटिस कोई जेल वारंट नहीं है, बल्कि स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी मांगने का एक औपचारिक माध्यम है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए विभाग आपके द्वारा दाखिल रिटर्न (ITR) में किसी विसंगति को दूर करना चाहता है या अधिक जानकारी चाहता है।
यदि आपने कोई गलती नहीं की है, तो चिंता की कोई बात नहीं है। और यदि गलती हुई है, तो भी समय रहते उसे सुधारा जा सकता है। लेकिन, नोटिस को अनदेखा करने से न केवल भारी जुर्माना लग सकता है, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। यह लेख आपको बताएगा कि नोटिस मिलने पर कैसे शांत रहें, उसकी वैधता कैसे जांचें और समय रहते सही तरीके से जवाब कैसे दें।
अध्याय 1: सबसे पहले नोटिस की वैधता और प्रामाणिकता जांचें
जैसे ही आपको ईमेल या डाक से नोटिस मिले, उस पर कार्रवाई करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि यह नोटिस असली है या नहीं। आजकल फ्रॉड ईमेल और फर्जी नोटिस का चलन बढ़ गया है।
1. आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन करें:
सबसे पहला और भरोसेमंद कदम है आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल www.incometax.gov.in पर लॉगिन करना।
- अपने पैन कार्ड और पासवर्ड से लॉगिन करें।
- डैशबोर्ड पर जाकर ‘e-Proceedings’ या ‘Pending Actions’ सेक्शन पर क्लिक करें।
- यहाँ आपको विभाग द्वारा जारी सभी संचार की सूची दिखाई देगी। अगर आपको जो नोटिस मिला है, वह यहाँ सूचीबद्ध है, तो इसका मतलब यह पूरी तरह से वैध है।
2. DIN (डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर) चेक करें:
आयकर विभाग द्वारा भेजे गए हर संचार पर एक यूनिक DIN (डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर) होना अनिवार्य है। बिना DIN वाला कोई भी नोटिस अमान्य माना जाता है।
- ईमेल चेक करें: सुनिश्चित करें कि ईमेल केवल @incometax.gov.in डोमेन से ही आया है। किसी अन्य डोमेन (जैसे @gmail.com) से आया ईमेल फर्जी हो सकता है।
- DIN वेरिफिकेशन: अगर आपको किसी कारणवश संदेह है, तो आप ‘डिन वेरिफिकेशन’ सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।
इन दो जांच के बाद यदि नोटिस प्रामाणिक पाया जाता है, तो अब उसका जवाब देने की प्रक्रिया शुरू करें।
अध्याय 2: नोटिस को समझें – मुख्य प्रकार और उनका मतलब
नोटिस को समझना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। हर नोटिस एक विशिष्ट उद्देश्य से जारी किया जाता है। आइए, सबसे कॉमन नोटिस के प्रकार और उनके कारणों को समझते हैं:
1. सेक्शन 143(1) के तहत नोटिस (इंटीमेशन):
यह सबसे आम नोटिस है। जब आप अपना आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते हैं, तो विभाग उसकी प्रारंभिक जांच करता है।
- कारण: यह नोटिस तब आता है जब आपके द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न में कोई गणना संबंधी गलती (जैसे अंकगणितीय त्रुटि) पाई जाती है, या फिर आपने किसी आय को घोषित नहीं किया है जो विभाग के पास पहले से मौजूद डेटा (जैसे फॉर्म 16, TDS रिटर्न) से मेल नहीं खाती।
- क्या करें: यह नोटिस कोई स्क्रूटनी नहीं है। इसमें बताई गई त्रुटि को समझें और यदि गलती आपकी है तो संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करें। अगर गलती विभाग की है, तो ऑनलाइन अपना पक्ष रखें।
2. सेक्शन 142(1) के तहत नोटिस (सूचना मांगना):
यह नोटिस तब जारी होता है जब आपने निर्धारित तिथि तक अपना ITR दाखिल नहीं किया होता है या फिर विभाग को आपके रिटर्न के बारे में अधिक जानकारी चाहिए होती है।
- कारण: हो सकता है कि विभाग को आपके द्वारा दिखाए गए किसी लेन-देन, निवेश या खर्च के बारे में संदेह हो।
- क्या करें: यह नोटिस काफी गंभीर है। इसे नजरअंदाज करने का मतलब है कि विभाग आपके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकता है। इसमें मांगी गई सभी जानकारी और दस्तावेज (जैसे बैंक स्टेटमेंट, बिक्री के बिल) समय पर जमा करें।
3. सेक्शन 143(2) के तहत नोटिस (स्क्रूटनी असेसमेंट):
यह नोटिस उन करदाताओं को आता है जिनका रिटर्न विभाग द्वारा विस्तृत जांच (स्क्रूटनी) के लिए चुना जाता है।
- कारण: यह जांच कई कारणों से हो सकती है – बड़े लेन-देन का होना, आय और खर्च में विसंगति, या फिर सिस्टम द्वारा रैंडमली चयन।
- क्या करें: घबराएं नहीं, बल्कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की मदद लें। इस नोटिस में अधिकारी आपसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए भी कह सकता है। सभी रिकॉर्ड्स और दस्तावेज तैयार रखें।
4. सेक्शन 156 के तहत नोटिस (टैक्स डिमांड):
यह नोटिस तब आता है जब आप पर कोई कर बकाया होता है।
- कारण: ऐसा तब हो सकता है जब आपने टैक्स कम भरा हो, या फिर किसी आकलन (असेसमेंट) के बाद कोई अतिरिक्त कर देय पाया गया हो।
- क्या करें: नोटिस में बताई गई राशि की पुष्टि करें। यदि राशि सही है, तो समय रहते टैक्स और उस पर लगने वाला ब्याज जमा करें। अगर राशि गलत लगती है, तो तुरंत आपत्ति दर्ज कराएं।
अध्याय 3: जवाब देने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
एक बार जब आप नोटिस को समझ गए और मांगी गई जानकारी तैयार कर ली, तो अब जवाब देने का समय है। आयकर विभाग ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है।
स्टेप 1: पोर्टल पर लॉगिन करें और नोटिस डाउनलोड करें:
- incometax.gov.in पर लॉगिन करें।
- ‘e-Proceedings’ या ‘Pending Actions’ टैब में जाएं।
- आपके नाम पर जो नोटिस आया है, उसे खोलें और उसकी एक पीडीएफ कॉपी डाउनलोड करके जरूर सेव कर लें।
स्टेप 2: दस्तावेज तैयार करें:
नोटिस में जो भी मांगा गया है, उसे इकट्ठा करें। यह निम्नलिखित हो सकता है:
- संबंधित वर्ष का आयकर रिटर्न (ITR)
- बैंक स्टेटमेंट
- फॉर्म 16 / 16A
- निवेश के प्रमाण
- बिक्री और खरीद के बिल
- अन्य कोई वित्तीय दस्तावेज
स्टेप 3: ‘Submit Response’ पर क्लिक करें:
- पोर्टल पर उसी नोटिस के सामने आपको ‘Submit Response’ का विकल्प मिलेगा।
- उस पर क्लिक करने पर एक फॉर्म खुलेगा।
- यहाँ आपको अपना जवाब या स्पष्टीकरण टेक्स्ट के रूप में लिखना होगा।
- साथ ही, आपको तैयार किए गए दस्तावेजों को PDF फॉर्मेट में अपलोड करना होगा।
स्टेप 4: फॉर्म जमा करें और पावती लें:
जवाब देने के बाद, फॉर्म को फाइनल सबमिट करें। सबमिट करते ही आपको एक अधिकृत पावती (Acknowledgement) मिलेगी। इस पावती को डाउनलोड करके अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखें।
अध्याय 4: समय-सीमा (टाइमलाइन) – देरी न करें
नोटिस का जवाब देने की एक निश्चित समय-सीमा होती है। इसका पालन करना बेहद जरूरी है।
- सामान्य समय-सीमा: अधिकांश नोटिस के जवाब के लिए नोटिस जारी होने की तारीख से 15 से 30 दिन का समय दिया जाता है।
- विस्तार की मांग: यदि आपको अधिक समय चाहिए या कोई दस्तावेज तैयार नहीं है, तो आप पोर्टल के माध्यम से ही समय बढ़ाने का अनुरोध कर सकते हैं। हालांकि, बिना कारण समय बीतने देना सही नहीं है।
अध्याय 5: नोटिस इग्नोर करने के गंभीर परिणाम
आयकर नोटिस को नजरअंदाज करना आपके लिए बहुत भारी पड़ सकता है। यह सिर्फ एक रिमाइंडर से शुरू होकर आपकी संपत्ति जब्ती तक का कारण बन सकता है।
- रिमाइंडर नोटिस: सबसे पहले विभाग आपको एक या दो रिमाइंडर नोटिस भेजता है।
- जुर्माना (पेनाल्टी): यदि फिर भी कोई जवाब नहीं आता, तो आप पर जुर्माना लगाया जाता है। ITR में गलतियों के लिए यह जुर्माना ₹10,000 तक हो सकता है।
- ब्याज: देय कर की राशि पर तब तक ब्याज लगता रहेगा, जब तक कि भुगतान नहीं कर दिया जाता।
- एक्स-पार्टी असेसमेंट: सबसे गंभीर बात यह है कि विभाग आपको बिना सुनवाई का मौका दिए ही अपनी ओर से एक आकलन (असेसमेंट) कर सकता है, जिसमें आपकी आय को बहुत अधिक दिखाया जा सकता है।
- संपत्ति की कुर्की और जब्ती: लंबे समय तक टैक्स न चुकाने या नोटिस इग्नोर करने पर विभाग आपकी बैंक अकाउंट और अन्य संपत्तियों को अटैच (जब्त) कर सकता है।
- कानूनी कार्रवाई: गंभीर मामलों में, जहां बड़ी टैक्स चोरी की बात हो, आपके खिलाफ अदालत में केस भी दर्ज हो सकता है।
अध्याय 6: अतिरिक्त महत्वपूर्ण सुझाव
- प्रोफेशनल की मदद लें: अगर नोटिस जटिल है (जैसे सेक्शन 143(2) या 148), तो बिना देरी किसी अच्छे चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें। वे आपको सही दिशा दिखा सकते हैं और कानूनी प्रक्रिया में आपका प्रतिनिधित्व भी कर सकते हैं।
- सारे रिकॉर्ड रखें: अपने सभी वित्तीय लेन-देन, रसीदें, बैंक स्टेटमेंट और पिछले वर्षों के ITआर को व्यवस्थित तरीके से संभाल कर रखें।
- ई-फाइलिंग पोर्टल पर नियमित नज़र रखें: कई बार नोटिस डाक से खो जाते हैं या देर से मिलते हैं। इसलिए अपने ई-फाइलिंग अकाउंट को नियमित रूप से चेक करते रहें, ताकि कोई भी लंबित कार्रवाई आपसे छूट न जाए।
निष्कर्ष
आयकर नोटिस मिलना कोई आपदा नहीं है, बल्कि यह आपके और आपके टैक्स रिटर्न के बीच की एक गणितीय विसंगति को दूर करने का एक जरिया है। समय रहते, सही प्रक्रिया का पालन करते हुए जवाब देकर आप आसानी से इस स्थिति से बाहर आ सकते हैं।
याद रखें, नोटिस इग्नोर करना ही एकमात्र गलत कदम है। जागरूक रहें, समय पर कार्रवाई करें, और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लें। यही एक समझदार करदाता की पहचान है।
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