1 अप्रैल से इनकम टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव। अब FY और AY की उलझन खत्म, सीधे ‘टैक्स ईयर’ में होगी ITR फाइलिंग। जानिए टैक्सपेयर्स को कैसे मिलेगा फायदा और क्या है पूरा नया फॉर्मेट। Tax Samachar पर पढ़ें विस्तार से।

Assessment Year का झंझट खत्म! अब सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ से होगी ITR फाइलिंग, जानें पूरा नया नियम
टैक्स समाचार, भारत का इनकम टैक्स सिस्टम एक बड़े सरलीकरण की ओर बढ़ रहा है। 1 अप्रैल से लागू हो रहे नए टैक्स कानून के साथ, वह पुरानी और अक्सर भ्रम पैदा करने वाली अवधारणाएं – असेसमेंट ईयर’ (AY) और ‘फाइनेंशियल ईयर’ (FY) – आधिकारिक तौर पर इतिहास बन जाएंगी। इनकी जगह लेगा एक सीधा-साधा शब्द: ‘टैक्स ईयर’ (Tax Year)। यह बदलाव टैक्स की दरों में कोई छेड़छाड़ नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को आम आदमी की समझ के करीब लाने और भ्रम मिटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अतीत की उलझन: FY और AY का खेल
अब तक, हर टैक्सपेयर को दो साल याद रखने पड़ते थे:
-फाइनेंशियल ईयर (FY): जिस साल आपने पैसा कमाया (जैसे 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025)।
– असेसमेंट ईयर (AY): जिस साल आप उस कमाई पर टैक्स चुकाते और रिटर्न फाइल करते थे (FY के अगले साल, जैसे 2025-26)।
मसलन, FY 2024-25 की कमाई के लिए ITR, AY 2025-26 में फाइल करना होता था। यही ‘एक साल पीछे’ का कॉन्सेप्ट नए टैक्सपेयर्स, फ्रीलांसर्स और छोटे व्यवसायियों के लिए कन्फ्यूजन का सबसे बड़ा कारण था, जिससे गलत ITR फाइल होना, नोटिस आना और पेनल्टी जैसी समस्याएं आम थीं।
सादगी का नया दौर: बस एक ‘टैक्स ईयर’
नई व्यवस्था इस जटिलता को दूर करती है। अब:
-कमाई का वही साल, टैक्स का वही साल।
– FY और AY की दोहरी टर्मिनोलॉजी अब नहीं।
– सिर्फ ‘टैक्स ईयर 2025-26’जैसा सीधा नाम होगा, जिसका मतलब होगा 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच की गई कमाई।
उदाहरण: अगर आपकी कमाई 1 अप्रैल 2025 से शुरू हुई, तो वह टैक्स ईयर 2025-26 की इनकम होगी। इसके लिए ITR फाइल करते समय अलग से कोई AY सोचने की जरूरत नहीं।
टैक्सपेयर्स को क्या मिलेगा फायदा?
1. भ्रम की समाप्ति: सबसे बड़ा फायदा यही है। अब ITR पोर्टल पर फॉर्म भरते समय यह सोचने की जरूरत नहीं कि “कौन सा असेसमेंट ईयर चुनूं?” बस अपना टैक्स ईयर चुनें और आगे बढ़ें।
2. नए टैक्सपेयर्स के लिए आसानी: नौकरी शुरू करने वाले युवा, नए उद्यमी और फ्रीलांसर्स के लिए टैक्स सिस्टम में एंट्री बहुत आसान हो जाएगी। गलती की गुंजाइश कम होगी।
3. नोटिस/पेनल्टी का रिस्क कम: गलत AY चुनने से होने वाली ‘डिफेक्टिव रिटर्न’, ‘नोटिस’ और ‘पेनल्टी’ जैसी मुश्किलों से राहत मिलेगी।
4. ग्लोबल सिस्टम के अनुरूप:अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों में पहले से ‘टैक्स ईयर’ का ही इस्तेमाल होता है। यह बदलाव भारत के टैक्स सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और कंपनियों के लिए भी ज्यादा स्पष्ट बनाएगा।
5. डिजिटल सिस्टम से बेहतर तालमेल: प्रीफिल्ड ITR, AIS (Annual Information Statement) और फेसलेस असेसमेंट जैसी डिजिटल सुविधाएं इस सिंगल ‘टैक्स ईयर’ फॉर्मेट के साथ और ज्यादा यूजर-फ्रेंडली हो जाएंगी।
क्या बदलेगा, क्या नहीं?
नहीं बदलेगी: टैक्स भरने और ITR फाइल करने की आखिरी तारीखें (जैसे 31 जुलाई)। टैक्स स्लैब और दरें भी इस बदलाव से अलग मामला हैं।
क्या करना होगा: मौजूदा टैक्सपेयर्स को कोई अतिरिक्त काम नहीं करना है। बस ITR फॉर्म या पोर्टल पर अब ‘Assessment Year’ की जगह ‘Tax Year’ का ऑप्शन देखेंगे। प्रक्रिया वही रहेगी, बस भाषा सरल।
निष्कर्ष: सरलता की ओर एक सराहनीय कदम
‘टैक्स ईयर’ की शुरुआत टैक्स को समझने के तरीके को सरल बनाने की एक बड़ी पहल है। यह खासकर मध्यम वर्ग, सैलरीड कर्मचारियों और नए टैक्सपेयर्स के लिए एक Psychological Relief लेकर आएगा। कुल मिलाकर, टैक्स वही रहेगा, नियम वही रहेंगे, लेकिन सिस्टम आपकी समझ के और करीब आ जाएगा। यह इनकम टैक्स विभाग की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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