ज्यादा EMI बन रही है ‘सर का दर्द’? जानें डेट-टू-इनकम रेशियो (DTI) का आसान फॉर्मूला, जो खत्म कर देगा आपकी मंथली टेंशन। समझें सही DTI सीमा और EMI का बोझ कम करने के असरदार तरीके।

हर महीने सैलरी आते ही सबसे पहले EMI कट जाती है। बाकी महीने का खर्च चलाने के लिए हाथ तंग पड़ जाते हैं। क्या आपकी भी EMI धीरे-धीरे एक टेंशन बन चुकी है? अगर हां, तो यह लेख आपके लिए है। एक छोटा-सा लेकिन ताकतवर फाइनेंशियल फॉर्मूला – ‘डेट-टू-इनकम रेशियो’ (DTI) – आपको बता सकता है कि आपका कर्ज सुरक्षित सीमा में है या फिर आप खतरे के जोन में चल रहे हैं।
EMI की टेंशन: आज के ज़माने की सबसे बड़ी फाइनेंशियल चुनौती
चाहे घर का लोन हो, कार की EMI हो या फिर क्रेडिट कार्ड का बिल, आज बहुत से लोग महीने-दर-महीने EMI के बोझ तले दबे रहते हैं। सैलरी का एक बड़ा हिस्सा सीधा बैंक में चला जाता है और बचे हुए पैसों से पूरे महीने का गुज़ारा करना मुश्किल हो जाता है। यही वह जगह है जहां से शुरू होता है ‘सर का दर्द’। जब EMI ज़रूरत से ज़्यादा हो जाती है, तो एक छोटी सी आर्थिक मुश्किल भी बड़ा तनाव पैदा कर देती है।
समाधान है: डेट-टू-इनकम रेशियो (DTI)
DTI एक सीधा-सादा पैमाना है जो यह मापता है कि आपकी कमाई के मुकाबले आप पर कितना कर्ज़ है। सीधे शब्दों में कहें तो, यह आपकी कुल मासिक कर्ज़ अदायगी (सभी EMI + क्रेडिट कार्ड पेमेंट) और आपकी कुल मासिक आय का अनुपात है।
DTI कैसे निकालें? फॉर्मूला बेहद आसान है!
> DTI रेशियो = (कुल मासिक कर्ज भुगतान / कुल मासिक आय) × 100
उदाहरण: मान लीजिए आपकी मासिक सैलरी ₹50,000 है और आप हर महीने घर की EMI, कार की EMI और क्रेडिट कार्ड बिल मिलाकर ₹20,000 चुकाते हैं।
> DTI = (20,000 / 50,000) × 100 = 40%
इसका मतलब है कि आपकी कमाई का 40% हर महीने सिर्फ़ कर्ज चुकाने में चला जाता है।
सही DTI कितना होना चाहिए? यहां समझें सुरक्षित सीमा
हर EMI बुरी नहीं होती। समस्या तब होती है जब यह आपकी आमदनी पर हावी होने लगे।
* 30% से कम (आदर्श स्थिति): आपकी फाइनेंशियल हेल्थ बहुत अच्छी है। आप आराम से खर्च चला सकते हैं, सेविंग कर सकते हैं और इमरजेंसी के लिए भी तैयार रह सकते हैं।
* 30% – 40% (संतुलित स्थिति): इसे आमतौर पर सुरक्षित और प्रबंधनीय माना जाता है। आपका कर्ज़ आपकी कमाई के अनुपात में है।
* 40% – 50% (सावधानी जरूरी): इस जोन में आपको सतर्क होने की ज़रूरत है। खर्चों पर कड़ी नज़र रखें। नया लोन लेने से पहले दो बार सोचें।
* 50% से अधिक (खतरे का संकेत): यह एक रेड अलर्ट है! आपकी आधी से ज़्यादा कमाई सिर्फ़ कर्ज़ चुकाने में जा रही है। नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है और कोई भी फाइनेंशियल इमरजेंसी आपकी स्थिति को डावांडोल कर सकती है।
EMI का बोझ कम करने के आसान और असरदार तरीके
अगर आपका DI बहुत ज़्यादा है, तो घबराएं नहीं। इन कदमों से आप स्थिति को काबू में कर सकते हैं:
1. नए कर्ज़ पर रोक लगाएं: सबसे पहला और ज़रूरी कदम। जब तक DI सुधर न जाए, नया लोन या क्रेडिट कार्ड लेने से बचें।
2. हाई-इंटरेस्ट वाले कर्ज़ को चुकाएं: अगर बचत है, तो सबसे पहले उस कर्ज़ का हिस्सा चुकाएं जिस पर ब्याज़ दर सबसे ज़्यादा है (जैसे क्रेडिट कार्ड बिल, पर्सनल लोन)। इससे कुल ब्याज़ का बोझ कम होगा।
3. खर्चों की ऑडिट करें: रोज़ाना के छोटे-छोटे खर्च (जैसे ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाना, अनसब्सक्राइब करें) मिलकर बड़ी रकम बन जाते हैं। इन्हें कम करके आप अतिरिक्त बचत कर सकते हैं और उसे EMI चुकाने में लगा सकते हैं।
4. कमाई बढ़ाने के रास्ते तलाशें: DTI सुधारने का सिर्फ़ एक ही रास्ता EMI घटाना नहीं है। स्किल अपग्रेड करके, फ्रीलांसिंग या पार्ट-टाइम काम से अतिरिक्त आय का जरिया बनाएं। आय बढ़ेगी तो DTI अपने-आप सुधर जाएगा।
5. लोन रीस्ट्रक्चरिंग पर विचार करें: अपने बैंक से बात करें। कई बार लोन की टेन्योर (अवधि) बढ़ाकर आप मासिक EMI को कम कर सकते हैं, हालांकि इससे कुल ब्याज़ थोड़ा बढ़ सकता है।
अंतिम सलाह: DTI है आपका फाइनेंशियल हेल्थमीटर
कोई भी नया लोन लेने से पहले, अपना DTI ज़रूर चेक कर लें। यह छोटा-सा कदम आपको भविष्य में बड़ी टेंशन से बचा सकता है। याद रखिए, कर्ज़ आपकी ज़िंदगी आसान बनाने के लिए होना चाहिए, मुश्किलें बढ़ाने के लिए नहीं। अपने DTI को संतुलित रखकर आप न सिर्फ़ अपने वर्तमान को सुरक्षित रखेंगे, बल्कि एक तनावमुक्त और समृद्ध भविष्य की नींव भी रखेंगे।
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