FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए आयकर स्लैब दरों की पूरी जानकारी। जानिए 12 लाख तक आय पर शून्य कर का फायदा, 80C, HRA, होम लोन छूट, और कैलकुलेशन के साथ Old vs New Tax Regime का सही चुनाव।

कर की चिंता से मुक्ति पाने का सही फॉर्मूला
फरवरी 2025 में पेश किए गए केंद्रीय बजट (Union Budget 2025) ने सैलरीड क्लास को बड़ा तोहफा दिया है। खासकर उन लोगों के लिए जो हर साल टैक्स बचाने के चक्कर में निवेश के झंझटों में उलझे रहते थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे अब 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर देना होगा ।
लेकिन सवाल अब भी वही है कि आपके लिए कौन सा विकल्प बेह्टर है? क्या आपको पुरानी व्यवस्था (Old Tax Regime) के झंझट भरे निवेशों में ही लगे रहना चाहिए, या फिर सरल और अब अधिक आकर्षक हो चुकी नई कर व्यवस्था को अपनाना चाहिए?
अगर आप भी इस उधेड़बुन में हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। यहां हम FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए दोनों व्यवस्थाओं की स्लैब दरों, फायदे और नुकसान का गहन विश्लेषण करेंगे, ताकि आप सही फैसला ले सकें।
FY 2025-26 में नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) में क्या बदला?
इस बार के बजट में सरकार का झुकाव साफ तौर पर नई कर व्यवस्था को बढ़ावा देने की ओर दिखा। इसे और अधिक आकर्षक बनाने के लिए स्लैब दरों में भारी कटौती की गई है ।
नई कर व्यवस्था के लिए प्रस्तावित स्लैब दरें (FY 2025-26)
| आय स्लैब (रुपये में) | कर की दर |
|---|---|
| 0 से 4,00,000 तक | न के बराबर (Nil) |
| 4,00,001 से 8,00,000 तक | 5% |
| 8,00,001 से 12,00,000 तक | 10% |
| 12,00,001 से 16,00,000 तक | 15% |
| 16,00,001 से 20,00,000 तक | 20% |
| 20,00,001 से 24,00,000 तक | 25% |
| 24,00,001 से अधिक | 30% |
नई व्यवस्था की खास बातें:
- रेबेट (Rebate) में बंपर बढ़ोतरी: सबसे बड़ी राहत यह है कि अब धारा 87A के तहत रिबेट की सीमा बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी गई है। इसका सीधा मतलब है कि 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा । सैलरी वालों के लिए 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद तो 12.75 लाख रुपये तक की आय कर-मुक्त हो सकती है ।
- सरलता: यह व्यवस्था बिना ढेर सारे फॉर्म भरे और बिना निवेश के सबूत रखे, सीधे तौर पर टैक्स देने की सुविधा देती है ।
- उच्च आय पर राहत: नई व्यवस्था में सबसे ज्यादा 30% की दर 24 लाख रुपये से ऊपर की आय पर लगेगी, जबकि पुरानी में यह महज 10 लाख पर ही लागू हो जाती है ।
FY 2025-26 में पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) का गणित
पुरानी कर व्यवस्था अब भी उन लोगों के लिए एक मजबूत विकल्प बनी हुई है, जो निवेश और बचत को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि इसमें स्लैब दरें ऊंची हैं, लेकिन यह कई तरह की छूट (Exemptions) और कटौती (Deductions) का लाभ देती है ।
पुरानी कर व्यवस्था के लिए स्लैब दरें (60 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति)
| आय स्लैब (रुपये में) | कर की दर |
|---|---|
| 0 से 2,50,000 तक | कोई कर नहीं |
| 2,50,001 से 5,00,000 तक | 5% |
| 5,00,001 से 10,00,000 तक | 20% |
| 10,00,001 से अधिक | 30% |
पुरानी व्यवस्था के प्रमुख फायदे:
- धारा 80C: पीपीएफ, ईपीएफ, एलआईसी, बच्चों की ट्यूशन फीस आदि पर 1.5 लाख रुपये तक की कटौती ।
- धारा 80D: हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर कटौती (अपने और परिवार के लिए 25,000 रुपये और वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए 50,000 रुपये तक) ।
- धारा 24(b): गृह ऋण (Home Loan) पर ब्याज भुगतान पर 2 लाख रुपये तक की कटौती ।
- एचआरए (HRA): यदि आप किराए के मकान में रहते हैं, तो House Rent Allowance पर बड़ी छूट ।
नई vs पुरानी: सही चुनाव के लिए ब्रेक-ईवन पॉइंट (Break-even Point) का फॉर्मूला
अब असली सवाल पर आते हैं। आखिर कैसे तय करें कि कौन सी व्यवस्था आपके लिए फायदेमंद रहेगी? इसका सीधा फॉर्मूला है “आपकी कुल कटौतियां (Total Deductions)”।
अगर आप पुरानी व्यवस्था में मिलने वाली सभी छूटों (80C, 80D, HRA, होम लोन आदि) को जोड़ते हैं, और वह राशि एक निश्चित सीमा से अधिक है, तो पुरानी व्यवस्था बेहतर है। अन्यथा, नई व्यवस्था में कम टैक्स देकर मानसिक शांति पाना बेहतर है।
ClearTax के अनुसार, विभिन्न आय स्तरों पर ब्रेक-ईवन डिडक्शन (वह राशि जिस पर दोनों व्यवस्थाओं में बराबर टैक्स लगे) कुछ इस प्रकार है :
| सकल आय (Gross Income) | ब्रेक-ईवन डिडक्शन (Break-even Deduction) |
|---|---|
| 10 लाख रुपये | 4,50,000 रुपये |
| 12 लाख रुपये | 6,50,000 रुपये |
| 15 लाख रुपये | 5,43,750 रुपये |
| 20 लाख रुपये | 7,08,330 रुपये |
उदाहरण: यदि आपकी सालाना आय 15 लाख रुपये है और आप पुरानी व्यवस्था में 6 लाख रुपये से अधिक की कटौती (जैसे 80C + 80D + HRA) कर पाते हैं, तो पुरानी व्यवस्था ही आपके लिए बेहतर होगी। लेकिन यदि आपकी कटौतियां सिर्फ 1.5 लाख रुपये की हैं, तो नई व्यवस्था में आपका टैक्स कम बनेगा।
पुरानी कर व्यवस्था किसके लिए है बेस्ट? (कब चुनें OLD Regime?)
यदि आप नीचे दी गई श्रेणियों में आते हैं, तो पुरानी व्यवस्था आपके लिए मुनासिब रहेगी :
- होम लोन लेने वाले: जिन लोगों ने होम लोन लिया है और हर साल 2 लाख रुपये तक का ब्याज चुकाते हैं, उनके लिए पुरानी व्यवस्था सोने पर सुहागा है।
- अनुशासित निवेशक (Disciplined Savers): जो लोग पीपीएफ, ईएलएसएस, एलआईसी या एनपीएस में नियमित निवेश करते हैं और 80C की सीमा (1.5 लाख) को पार कर जाते हैं।
- महंगे शहरों में किराए पर रहने वाले: अगर आप मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहरों में रहते हैं और अधिक किराया देते हैं, तो HRA का एक्सेम्प्शन आपकी टैक्स देनदारी को काफी कम कर सकता है ।
- बीमा प्रीमियम पर निर्भर: जो लोग अपने और वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए भारी-भरकम हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम चुकाते हैं (80D)।
- शिक्षा ऋण (Education Loan): अगर आपने पढ़ाई के लिए लोन लिया है, तो उस पर ब्याज की पूरी राशि की कटौती का लाभ केवल पुरानी व्यवस्था में मिलता है।
नई कर व्यवस्था किसके लिए है परफेक्ट? (कब चुनें NEW Regime?)
नई कर व्यवस्था सादगी पसंद लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। खासतौर पर इन लोगों को इसका चुनाव करना चाहिए :
- युवा पेशेवर (Young Professionals): जिन्होंने अभी-अभी करियर शुरू किया है और उनके पास निवेश करने के लिए अतिरिक्त पैसा नहीं है, या जो निवेश में पैसा बंद नहीं करना चाहते।
- निवेश में कम रुचि रखने वाले: जिन लोगों को 80C, 80D जैसे निवेशों के झंझटों में पड़ना पसंद नहीं है।
- बिना होम लोन वाले: यदि आप पर कोई होम लोन नहीं है, तो पुरानी व्यवस्था में बड़ी कटौती का आधार ही कमजोर हो जाता है।
- सरलता के भूखे: जो लोग एचआरए के लिए किराए के बिल और लैंडलॉर्ड का पैन कार्ड जमा करने, या एलटीए के लिए यात्रा के टिकट रखने की परेशानी से बचना चाहते हैं।
- 12 लाख तक कमाने वाले: यह सबसे बड़ा लाभार्थी वर्ग है। 12.75 लाख तक की सैलरी पर जीरो टैक्स किसी सपने से कम नहीं है ।
केस स्टडी: 25 लाख रुपये के पैकेज पर कौन सी व्यवस्था बेहतर?
आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए सचिन की सालाना सैलरी (CTC) 25 लाख रुपये है। उसके पास एक होम लोन है, वह किराए में रहता है, और निवेश भी करता है। आइए देखें उसके लिए क्या बेहतर रहेगा ।
केस की मान्यताएं:
- HRA: मेट्रो सिटी में रहता है, 30,000 रुपये प्रति माह किराया देता है।
- 80C: ईपीएफ, पीपीएफ में 1.5 लाख रुपये का निवेश।
- 80D: हेल्थ इंश्योरेंस पर 50,000 रुपये।
- NPS: नियोक्ता का अंशदान (Old में 10%, New में 14%).
- अन्य: कन्वेयेंस, मोबाइल रीइम्बर्समेंट और कार लीजिंग।
नतीजा (Tax Calculation Comparison):
| विवरण (Particulars) | पुरानी व्यवस्था (Old Regime) | नई व्यवस्था (New Regime) |
|---|---|---|
| सकल वेतन (Gross Pay) | 20,31,900 | 20,31,900 |
| विभिन्न छूट (HRA, LTA, Food) के बाद कर योग्य वेतन | 10,27,100 | 13,88,500 |
| कटौतियां (80C, 80D, NPS आदि) | 3,60,000 | 1,40,000 (सिर्फ NPS अंशदान) |
| शुद्ध कर योग्य आय | 6,67,100 | 12,48,500 |
| कर राशि (उपकर सहित) | ~47,757 रुपये | ~50,440 रुपये |
निष्कर्ष: इस उदाहरण में, पुरानी व्यवस्था में सचिन को लगभग 2,700 रुपये कम टैक्स देना होगा। हालांकि, अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन अगर सचिन के पास ये सब डिडक्शन नहीं होते, तो नई व्यवस्था में उनका टैक्स काफी कम होता।
टैक्स बचाने के लिए सैलरी स्ट्रक्चर को कैसे करें ऑप्टिमाइज़?
अगर आप नई कर व्यवस्था चुनते हैं, तो भी कुछ तरीकों से टैक्स बचाया जा सकता है :
- NPS में नियोक्ता का योगदान बढ़वाएं: नई व्यवस्था में सेक्शन 80CCD(2) के तहत आपके मूल वेतन (Basic) का 14% तक नियोक्ता का NPS योगदान कर-मुक्त है, जो पुरानी व्यवस्था में सिर्फ 10% था । इसे अपने सीटीसी पैकेज में शामिल करवाएं।
- रीइम्बर्समेंट का सही इस्तेमाल: कन्वेयेंस अलाउंस और मोबाइल रीइम्बर्समेंट अब भी दोनों व्यवस्थाओं में तब तक टैक्स फ्री हैं, जब तक वे ऑफिशियल ड्यूटी से जुड़े हैं और बिल के आधार पर मिलते हैं ।
- परक (Perquisites) का फायदा: कर्मचारी को दी जाने वाली कुछ सुविधाएं (जैसे ग्रुप इंश्योरेंस, क्लब मेंबरशिप, रिक्रिएशनल सुविधाएं) दोनों ही व्यवस्थाओं में कर-मुक्त रहती हैं ।
- किराए पर दिया गया घर: नई व्यवस्था में भी यदि आपने घर खरीदकर उसे किराए पर उठा दिया है (Let-out property), तो उस होम लोन के ब्याज पर असीमित कटौती का लाभ लिया जा सकता है। यह दोनों व्यवस्थाओं में उपलब्ध है ।
कैसे करें स्विच? (रिजीम बदलने के नियम)
- सैलरीड कर्मचारी (नॉन-बिजनेस इनकम): आपके पास हर साल यह चुनने की आजादी है कि आपको कौन सी व्यवस्था चुननी है। आप हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अपने एंप्लॉयर को बता सकते हैं या आईटीआर भरते समय चुन सकते हैं ।
- बिजनेस/प्रोफेशनल इनकम वाले: अगर आपके पास बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम है, तो आपको एक बार ही रिजीम चुनने का विकल्प मिलता है। नई से पुरानी में जाने के लिए फॉर्म 10-IEA भरना होगा ।
निष्कर्ष: कौन सी व्यवस्था है सबसे बढ़िया?
FY 2025-26 के लिए टैक्स प्लानिंग का सीधा सा फॉर्मूला है:
“अपनी कुल कटौतियां निकालिए। अगर वे 5-7 लाख रुपये से ज्यादा हैं, तो पुरानी व्यवस्था पर विचार कीजिए, नहीं तो नई व्यवस्था में ही आराम कीजिए।”
सरकार ने नई व्यवस्था को इतना आकर्षक बना दिया है कि मध्यम वर्ग के अधिकांश करदाता अब इसी ओर रुख करेंगे। 12 लाख रुपये तक की आय पर जीरो टैक्स एक ऐतिहासिक फैसला है ।
हालांकि, अगर आप वित्तीय अनुशासन में विश्वास रखते हैं, आपके पास होम लोन है, और आप निवेश करके ही मानसिक संतुष्टि पाते हैं, तो पुरानी व्यवस्था में आपका स्वागत है। लेकिन हां, निर्णय लेने से पहले एक बार आयकर कैलकुलेटर का जरूर उपयोग करें ।
अंतिम सुझाव: सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपनी सैलरी स्लिप और निवेश का विवरण लेकर किसी विशेषज्ञ से सलाह लें या किसी ऑनलाइन टूल की मदद से दोनों पर अपना टैक्स कैलकुलेट करें और जहां कम टैक्स लगे, वही चुनें ।
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