New Tax Regime 2025-26: जानिए ₹12 लाख तक टैक्स फ्री आय का राज। उदाहरण के साथ समझिए धारा 87A रिबेट, स्टैंडर्ड डिडक्शन और मार्जिनल रिलीफ का गणित।

फरवरी 2025 में पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी थी। नई कर व्यवस्था के तहत ₹12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देने का ऐलान किया गया था । अब जब हम वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) में हैं, तो यह समझना जरूरी है कि आखिर यह टैक्स फ्री लिमिट कैसे काम करती है।
क्या सच में ₹12 लाख कमाने वाले व्यक्ति को एक भी रुपया टैक्स नहीं देना? सैलरीड वर्ग के लिए यह लिमिट ₹12.75 लाख कैसे हो जाती है? और अगर आय थोड़ी सी ज्यादा हो जाए (जैसे ₹12.10 लाख) तो क्या होगा? आइए, इसे पूरे गणित और उदाहरणों के साथ विस्तार से समझते हैं।
1. नई कर व्यवस्था की स्लैब दरें (FY 2025-26)
सबसे पहले, नई कर व्यवस्था के तहत लागू होने वाली इनकम टैक्स स्लैब को समझ लेते हैं। बजट 2025 में स्लैब दरों में बड़ा बदलाव किया गया था, जो अप्रैल 2025 से लागू हो चुका है ।
| आय स्लैब (₹ में) | कर की दर |
|---|---|
| 0 – 4,00,000 | शून्य |
| 4,00,001 – 8,00,000 | 5% |
| 8,00,001 – 12,00,000 | 10% |
| 12,00,001 – 16,00,000 | 15% |
| 16,00,001 – 20,00,000 | 20% |
| 20,00,001 – 24,00,000 | 25% |
| 24,00,001 से अधिक | 30% |
*टेबल: नई कर व्यवस्था के तहत वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) के लिए आयकर स्लैब दरें *
2. ₹12 लाख आय पर टैक्स फ्री का गणित (रिबेट का जादू)
अब सवाल उठता है कि जब 4 लाख तक की आय ही टैक्स फ्री है, तो ₹12 लाख की आय टैक्स फ्री कैसे हुई? इसका जवाब है धारा 87A के तहत मिलने वाला रिबेट (Rebate) ।
आइए एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी व्यक्ति की कुल आय ₹12 लाख है। स्लैब के हिसाब से उसका टैक्स कुछ इस तरह बनेगा:
- पहले ₹4 लाख: कोई टैक्स नहीं = ₹0
- अगले ₹4 लाख (4-8 लाख): 5% टैक्स = ₹20,000
- अगले ₹4 लाख (8-12 लाख): 10% टैक्स = ₹40,000
- कुल कर: ₹20,000 + ₹40,000 = ₹60,000
अब, धारा 87A के तहत रिबेट की सीमा को बढ़ाकर ₹60,000 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अगर आपकी कुल देय टैक्स रकम ₹60,000 से कम या बराबर है, तो आपको टैक्स नहीं देना होगा ।
- टैक्स देय: ₹60,000
- धारा 87A रिबेट: ₹60,000
- देय टैक्स (रिबेट के बाद): ₹60,000 – ₹60,000 = शून्य
इस तरह ₹12 लाख की आय पूरी तरह टैक्स फ्री हो जाती है।
3. सैलरीड वर्ग के लिए खास: ₹12.75 लाख टैक्स फ्री
यदि आप नौकरीपेशा (Salaried) हैं, तो आपके लिए टैक्स फ्री लिमिट और बढ़ जाती है। ऐसा स्टैंडर्ड डिडक्शन की वजह से होता है। नई कर व्यवस्था में सैलरीड लोगों को ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता है ।
मान लीजिए किसी कर्मचारी की सालाना सैलरी ₹12,75,000 है।
- सैलरी: ₹12,75,000
- स्टैंडर्ड डिडक्शन: (-) ₹75,000
- कर योग्य आय (Taxable Income): ₹12,00,000
अब जैसा कि हमने ऊपर देखा, ₹12 लाख की कर योग्य आय पर धारा 87A के ₹60,000 रिबेट की वजह से टैक्स शून्य हो जाता है । इस तरह एक सैलरीड व्यक्ति की कुल आय ₹12.75 लाख भी हो, तो वह कोई टैक्स नहीं देगा।
4. क्या होगा अगर आय ₹12 लाख से थोड़ी ज्यादा है? (मार्जिनल रिलीफ का चमत्कार)
अब सबसे दिलचस्प हिस्सा। मान लीजिए किसी गैर-सैलरीड व्यक्ति की आय ₹12.10 लाख है। स्लैब के हिसाब से टैक्स बनता है :
- 0-4 लाख: शून्य
- 4-8 लाख: 4 लाख का 5% = ₹20,000
- 8-12 लाख: 4 लाख का 10% = ₹40,000
- 12-12.10 लाख: 10,000 का 15% = ₹1,500
- कुल टैक्स: ₹61,500
लेकिन चूंकि आय ₹12 लाख से केवल ₹10,000 ज्यादा है, ऐसे में पूरे ₹61,500 टैक्स देना उचित नहीं लगता। ऐसे में सरकार ने मार्जिनल रिलीफ (Marginal Relief) का प्रावधान रखा है ।
मार्जिनल रिलीफ कहता है कि करदाता को उसकी अतिरिक्त आय (यानी ₹12 लाख से ज्यादा वाला हिस्सा) से ज्यादा टैक्स नहीं देना होगा।
- अतिरिक्त आय (Incremental Income): ₹10,000
- गणना के अनुसार टैक्स: ₹61,500
चूंकि टैक्स (61,500) अतिरिक्त आय (10,000) से ज्यादा है, मार्जिनल रिलीफ लागू होगा। इस रिलीफ के बाद देय टैक्स केवल ₹10,000 होगा (साथ में हेल्थ एंड एजुकेशन सेस अलग से) । इस तरह सुनिश्चित किया गया है कि ₹12 लाख से थोड़ी ज्यादा आय वालों पर अनुचित बोझ न पड़े।
उदाहरण के लिए:
| आय (₹) | बिना मार्जिनल रिलीफ के टैक्स | मार्जिनल रिलीफ के बाद वास्तविक टैक्स |
|---|---|---|
| 12,10,000 | 61,500 | 10,000 |
| 12,50,000 | 67,500 | 50,000 |
| 12,70,000 | 70,500 | 70,000 (यहाँ रिलीफ खत्म) |
*टेबल: मार्जिनल रिलीफ का व्यावहारिक उदाहरण *
5. पुरानी बनाम नई कर व्यवस्था: कौन सी बेहतर?
नई कर व्यवस्था में कम दरें हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर छूट (Deductions) नहीं ली जा सकतीं। पुरानी व्यवस्था में दरें थोड़ी ज्यादा हैं, लेकिन आप HRA, 80C (PPF, LIC), 80D (मेडिक्लेम) जैसी कटौतियों का लाभ उठा सकते हैं ।
आपके लिए कौन सी व्यवस्था फायदेमंद है, यह आपकी कुल कटौतियों पर निर्भर करता है।
- अगर आपके पास ज्यादा निवेश और खर्चे (जैसे होम लोन, किराया) हैं, तो पुरानी व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
- अगर आपके पास सीमित निवेश हैं, तो नई व्यवस्था (₹12.75 लाख तक टैक्स फ्री) ज्यादा फायदेमंद है ।
6. किन आय पर नहीं मिलेगा रिबेट का फायदा? (स्पेशल रेट इनकम)
यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि धारा 87A का यह रिबेट केवल सामान्य दरों (Slab Rates) वाली आय पर लागू होता है। यदि आपने शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) जैसी कोई आय अर्जित की है, जो स्पेशल रेट (जैसे 20%) से टैक्स होती है, तो उस पर यह रिबेट लागू नहीं होगा ।
हालांकि, स्पेशल रेट वाली आय पर भी बेसिक एक्सेम्पशन लिमिट (₹4 लाख) का फायदा मिलता है, लेकिन रिबेट नहीं ।
निष्कर्ष
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई कर व्यवस्था ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है। ₹12 लाख तक की आय पर शून्य टैक्स और सैलरीड वर्ग के लिए ₹12.75 लाख तक की छूट ने मध्यम वर्ग की बचत को बढ़ावा दिया है। मार्जिनल रिलीफ का प्रावधान भी यह सुनिश्चित करता है कि आय में मामूली बढ़ोतरी होने पर टैक्स का बोझ अचानक से न बढ़े।
अब समय आ गया है कि आप अपनी आय और निवेश का आकलन करें और तय करें कि पुरानी और नई व्यवस्था में से आपके लिए क्या सबसे फायदेमंद रहेगा। जैसा कि बजट 2026 में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, यही दरें आगे भी लागू रहेंगी ।
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश या टैक्स संबंधी निर्णय लेने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह जरूर लें।
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