क्या हर SIP अच्छा रिटर्न देती है? डायरेक्ट vs रेगुलर फंड, इन्फ्लेशन का असर और गलत फंड चुनने के खतरे। SIP से जुड़े वो 5 कम ज्ञात तथ्य जो आपकी निवेश योजना बदल देंगे।

SIP के 5 छिपे हुए सच: क्या सच में ‘हर SIP अच्छी होती है’ वाली बात सही है?
“अगर आपने 1995 में इन्फोसिस में SIP शुरू की होती, तो आज करोड़पति होते!” आपने भी ऐसे वायरल दावे सोशल मीडिया पर देखे होंगे। ये कहानियां SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) को एक जादुई छड़ी की तरह पेश करती हैं, जो हर निवेश समस्या का रामबाण इलाज है। हर दूसरा फाइनेंस इन्फ्लुएंसर अब आपको बता रहा है कि बस “किसी भी फंड में SIP शुरू कर दो, बाकी सब अपने आप हो जाएगा।”
लेकिन क्या यह सच्चाई से परे एक खतरनाक सरलीकरण नहीं है? क्या सच में सभी SIP अच्छा रिटर्न देती हैं? क्या SIP वाकई एक ‘लगाओ और भूल जाओ’ (सेट एंड फॉरगेट) का जादू है? जवाब है, नहीं। वास्तविकता यह है कि SIP की चमकदार दुनिया के पीछे कई ऐसे कम चर्चित, पर गंभीर सच्चाईयाँ और जोखिम छिपे हैं, जिनके बारे में शायद ही किसी ने आपको विस्तार से बताया हो। आज, हम आपके सामने SIP से जुड़े उन्हीं 5 कड़वे सच लेकर आए हैं, जो आपकी निवेश रणनीति को पूरी तरह बदल सकते हैं।
सच 1: पारंपरिक SIP ‘डंब’ होती है – स्मार्ट SIP का विकल्प जानें
आपकी SIP तारीख हर महीने की 5 तारीख है। पैसा कटा, इन्वेस्ट हुआ, और 3 दिन बाद मार्केट 10% गिर गया। आम समझ कहती है कि इस अस्थायी गिरावट का फायदा उठाकर और पैसा लगाना चाहिए। लेकिन आपकी रेगुलर SIP ऐसा नहीं कर सकती, क्योंकि उसमें मार्केट के उतार-चढ़ाव को पकड़ने की कोई बिल्ट-इन इंटेलिजेंस नहीं होती।
समाधान: स्मार्ट या बूस्टर SIP
यह एक एडवांस्ड विकल्प है। इसमें आपका पैसा पहले डेट फंड में जाता है। AMC का एक खास एल्गोरिदम यह तय करता है कि मार्केट अस्थायी रूप से नीचे (बॉटम) पर है या ऊपर (टॉप) पर। अगर मार्केट बॉटम पर है, तो पैसा इक्विटी में इन्वेस्ट हो जाता है। अगर टॉप पर है, तो मार्केट के सही होने का इंतजार किया जाता है। इससे आपको रेगुलर SIP से 2-3% बेहतर रिटर्न मिल सकता है। ICICI प्रूडेंशियल, कोटक म्यूचुअल फंड जैसे AMC यह ऑप्शन देते हैं।
सच 2: डायरेक्ट फंड हमेशा बेहतर नहीं – रेगुलर फंड का भी है महत्व
इन्फ्लुएंसर्स का मंत्र है: “हमेशा डायरेक्ट फंड में निवेश करो, रेगुलर फंड बेकार है।” यह आधा-अधूरा सच है।
* डायरेक्ट फंड: आप सीधे AMC से खरीदते हैं। एक्सपेंस रेशियो कम (लगभग 0.5-0.7% कम) होता है।
* रेगुलर फंड: आप डिस्ट्रीब्यूटर/एडवाइजर के जरिए खरीदते हैं। एक्सपेंस रेशियो थोड़ा ज्यादा होता है।
देखी गई प्रवृत्ति: डायरेक्ट फंड के निवेशक अपनी SIP 2.6 गुना तेजी से बंद कर देते हैं, क्योंकि उनके पास कोई गाइडेंस नहीं होती। बाजार में उतार-चढ़ाव आते ही वे घबरा जाते हैं।
सही चुनाव कैसे करें?
* डायरेक्ट फंड चुनें अगर: आप मार्केट की अच्छी जानकारी रखते हैं, स्वयं रिसर्च कर सकते हैं और लंबी अवधि तक डिसिप्लिन से जुड़े रहने का आत्म-अनुशासन है।
* रेगुलर फंड चुनें अगर: आप नौसिखिया हैं, समय या ज्ञान की कमी है। एक अच्छा एडवाइजर आपको गाइड करेगा, पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करेगा और मार्केट में बनाए रखने में मदद करेगा, जो लंबे समय में सबसे ज्यादा मायने रखता है।
सच 3: SIP जादू नहीं करेगी अगर फंड गलत चुना
“किसी भी फंड में SIP शुरू कर दो, पैसा बन जाएगा” – यह सबसे बड़ा भ्रम है। फंड का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है।
* डेटा सच्चाई: पिछले 15 साल के कुछ सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले फंड्स ने सिर्फ 2.5% का सालाना रिटर्न दिया है। वहीं, सबसे अच्छे फंड्स ने 18-20% रिटर्न दिया।
* केवल पुराना रिटर्न देखना खतरनाक: जो फंड अतीत में अच्छा चला, जरूरी नहीं भविष्य में भी चले।
* क्या देखें: सिर्फ रिटर्न नहीं, जोखिम पैरामीटर जैसे अल्फा, बीटा, स्टैंडर्ड डेविएशन, डाउनसाइड कैप्चर रेशियो का विश्लेषण जरूरी है।
सच 4: इन्फ्लेशन आपकी कमाई को खा जाता है – ‘स्टेप-अप SIP’ है जरूरी
आप यह कैलकुलेशन जरूर देखते होंगे: “20 साल तक ₹15,000 की SIP, 12% रिटर्न = ₹1.5 करोड़।” यह आंकड़ा भ्रामक है, क्योंकि इसमें मुद्रास्फीति (Inflation) का हिसाब नहीं है।
* इन्फ्लेशन का असर: अगर 6% सालाना इन्फ्लेशन मानें, तो 20 साल बाद के ₹1.5 करोड़ की क्रय शक्ति आज के सिर्फ ₹46 लाख के बराबर होगी। 7% इन्फ्लेशन पर यह घटकर ₹38 लाख रह जाएगी।
* समाधान – स्टेप-अप SIP: हर साल अपनी SIP राशि को 8-10% बढ़ाते रहें। अगर आप ₹15,000 से शुरू करके हर साल SIP को 10% बढ़ाते हैं, तो 20 साल बाद ₹2.8 करोड़ जमा होगा, जो इन्फ्लेशन के बाद भी पर्याप्त हो सकता है।
सच 5: SIP शॉर्ट-टर्म गेम नहीं, पूरे बाजार चक्र का इंतजार करना पड़ता है
सबसे बड़ी गलती: 5-7 साल के लिए SIP शुरू करके 12-15% रिटर्न की उम्मीद करना। बाजार चक्र (साइकिल) में चलता है – बुल रन के बाद बेयर रन आता है। एक पूरा चक्र आमतौर पर 5-7 साल या कभी-कभी और लंबा हो सकता है।
* डेटा का सबक: पिछले 15 साल के वर्स्ट फंड्स ने 2.5% रिटर्न दिया, लेकिन पिछले 20 साल के डेटा में वही वर्स्ट फंड्स 9-10% रिटर्न दे रहे हैं।
* नैतिक शिक्षा: SIP से अच्छा रिटर्न पाने के लिए आपको कम से कम एक या दो पूरे बाजार चक्र (15-18 साल) तक धैर्य रखना होगा। शॉर्ट टर्म में निवेश करना और बड़े रिटर्न की उम्मीद करना आपको नुकसान पहुंचा सकता है।
निष्कर्ष: SIP एक टूल है, सिल्वर बुलेट नहीं
SIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपमें नियमित बचत और निवेश की आदत (डिसिप्लिन)डालती है। लेकिन यह कोई जादू नहीं है। सफलता के लिए जरूरी है: सही फंड का चयन, इन्फ्लेशन के लिए स्टेप-अप प्लान, पर्याप्त समय के लिए धैर्य, और अपनी ज्ञान-स्तर के अनुसार डायरेक्ट या रेगुलर प्लान का चुनाव।
अगली बार कोई आपको बिना संदर्भ के “बस SIP कर लो” कहें, तो इन 5 बिंदुओं पर जरूर विचार करें। एक सूचित निर्णय ही आपको वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंचाएगा, न कि केवल एक ट्रेंडी फाइनेंशियल टर्म।
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