UPI ने पेमेंट आसान बना दी, लेकिन बढ़ गई फिजूलखर्ची। NPCI के ताजा आंकड़े, पेन ऑफ पेइंग का साइकोलॉजी और 10 कारगर तरीके जानें, जिनसे बिना UPI छोड़े कंट्रोल कर सकते हैं अपना मंथली खर्च। पढ़िए टैक्स समाचार की यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट।

डिजिटल क्रांति का अनदेखा साइड इफेक्ट
वर्ष 2016 में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) की शुरुआत ने भारत को डिजिटल भुगतान का विश्व नेता बना दिया। आज सब्जी के ठेले से लेकर पांच सितारा होटल तक, बस एक स्कैन और पिन एंटर करते ही लेनदेन हो जाता है। कैश रखने की झंझट खत्म हुई, बैंक की लाइनों से मुक्ति मिली, लेकिन क्या आपने ध्यान दिया है कि पिछले कुछ वर्षों में आपकी मासिक खर्च करने की क्षमता (Spending Capacity) भी उतनी ही तेजी से बढ़ी है, जितनी तेजी से UPI ट्रांजैक्शन बढ़े हैं?
यह कोई महज संयोग नहीं है। यह ‘पेन ऑफ पेइंग’ (भुगतान का दर्द) नामक मनोवैज्ञानिक प्रभाव का सीधा परिणाम है। जब हम कैश देते हैं, तो हमारे हाथ से नोट जाता है, हमारा दिमाग उसे महसूस करता है। लेकिन UPI में पैसा सिर्फ डिजिटल नंबर की तरह कटता है, जिससे खर्च करने का एहसास ही नहीं होता।
इस ब्लॉग पोस्ट में हम न केवल इस बढ़ती फिजूलखर्ची के कारणों को समझेंगे, बल्कि NPCI, RBI और IIIT दिल्ली जैसे संस्थानों की रिसर्च के हवाले से यह भी जानेंगे कि आप बिना UPI छोड़े इन खर्चों पर कैसे लगाम लगा सकते हैं।
करंट सीन: आंकड़ों में UPI का बढ़ता दबदबा
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि UPI ने भारतीय रिटेल पेमेंट को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। आइए जानते हैं कि 2025 और 2026 की शुरुआत में स्थिति क्या रही।
तालिका 1: UPI ट्रांजैक्शन में हुई बंपर बढ़ोतरी (2024-2025)
| महीना/वर्ष | ट्रांजैक्शन वॉल्यूम (अरब में) | वैल्यू (लाख करोड़ रुपये में) | स्रोत |
|---|---|---|---|
| अक्टूबर 2024 | 16.58 | 23.49 | |
| जनवरी 2025 | 16.99 | 23.48 | |
| अगस्त 2025 | 20.0 (प्रथम बार 20 अरब पार) | 24.85 | |
| दिसंबर 2025 | अनुमानित: 21.70+ | 25.0+ (एस्टीमेट) |
महत्वपूर्ण बिंदु:
- ग्रोथ: जनवरी 2025 में सालाना आधार पर UPI लेनदेन की मात्रा में 28% की वृद्धि हुई ।
- डेली वैल्यू: अगस्त 2025 में औसत दैनिक भुगतान मूल्य बढ़कर 90,446 करोड़ रुपये हो गया ।
- एडॉप्शन: 2025 तक भारत के निम्न-मध्यम वर्ग (Lower-Middle Class) में UPI का उपयोग 80% तक पहुंच गया है ।
- कैश सब्स्टीट्यूट: RBI की स्टडी के अनुसार, UPI के बढ़ते उपयोग से कैश की मांग में संरचनात्मक गिरावट आई है ।
क्या है पेन ऑफ पेइंग? जब कैश निकलता था तब दिल क्यों बैठ जाता था?
पेन ऑफ पेइंग का सीधा सा अर्थ है- पैसे चुकाते समय होने वाली मानसिक परेशानी। जब हम कैश से भुगतान करते थे, तो हमारे दिमाग का पैराइटल कॉर्टेक्स (Parietal Cortex) सक्रिय हो जाता था। यह हिस्सा हमें यह अहसास दिलाता था कि हमने कोई वैल्यू खो दी है ।
लेकिन UPI के साथ यह प्रक्रिया निष्क्रिय (Inactive) हो जाती है।
- पहले का नियम: बटुए में ₹500 थे, तो हम जानते थे कि अब केवल उतना ही खर्च सकना है।
- आज का नियम: बैंक में ₹50,000 हैं, तो दिमाग समझता है कि पूरा पैसा खर्च करने लायक है।
बिहेवियरल साइंटिस्ट अनिल दमानी के अनुसार, “कैश में पैसा देखकर हमारा दिमाग तुरंत एडजस्टमेंट कर लेता था। डिजिटल पेमेंट में वह मेंटल अकाउंटिंग (Mental Accounting) खत्म हो गई है” ।
साइलेंट किलर: ऑटोपे और भूला दिए गए सब्सक्रिप्शन
UPI के कारण सिर्फ एक बार के भुगतान में ही नहीं, बल्कि रिकरिंग पेमेंट में भी फिजूलखर्ची बढ़ी है। UPI ऑटोपे की सुविधा ने जहां बिल भरना आसान किया, वहीं यह “साइलेंट डेबिट ट्रैप” बन गया है ।
कल्पना कीजिए:
- जिम की मेंबरशिप जो आपने 6 महीने पहले छोड़ दी, लेकिन ऑटोपे कैंसल करना भूल गए।
- OTT सब्सक्रिप्शन जो आपने एक शो देखने के लिए लिया था।
- ₹200 के 5 रेगुलर पेमेंट्स = ₹1000 प्रति माह = ₹12,000 सालाना। यह पैसा बिना किसी एहसास के निकल जाता है ।
रिसर्च और केस स्टडी: सबूतों के साथ समझिए
1. वैज्ञानिक प्रमाण: 74.2% लोग करते हैं ज्यादा खर्च
IIIT दिल्ली के जनवरी 2024 के अध्ययन के अनुसार, 74.2% प्रतिभागियों ने UPI आने के बाद अधिक खर्च करना स्वीकार किया। केवल 7% ने कम खर्च करने की बात कही । यह एक चौंका देने वाला आंकड़ा है जो बताता है कि हमारी बचत की आदतों पर डिजिटल पेमेंट का कितना गहरा असर पड़ रहा है।
2. प्रैक्टिकल केस स्टडी: अनाम मिर्जा का UPI डिटॉक्स
टेनिस स्टार सानिया मिर्जा की बहन और उद्यमी अनाम मिर्जा ने हाल ही में अपनी इंस्टाग्राम सीरीज में खुलासा किया कि उन्होंने Google Pay को पूरी तरह से डिलीट कर दिया और UPI से दूरी बना ली ।
उनकी रणनीति:
- शुरुआत: उन्हें कॉफी पीने के लिए दोस्तों से पैसे उधार लेने पड़े, क्योंकि वह इंस्टेंट पेमेंट नहीं कर पा रही थीं।
- नतीजा: इस “फाइनेंशियल डिटॉक्स” ने उन्हें हर रुपये के खर्च से पहले सोचने पर मजबूर किया।
- सीख: कभी-कभी टेक्नोलॉजी से दूरी बनाकर भी फिजूलखर्ची पर कंट्रोल पाया जा सकता है ।
कैसे कंट्रोल करें खर्चा? (एक्शन प्लान)
यदि आप UPI की सुविधा भी लेना चाहते हैं और फिजूलखर्ची से भी बचना चाहते हैं, तो यह 10 सूत्रीय कार्ययोजना आपके लिए है:
1. UPI स्पेंड लिमिट फीचर का उपयोग करें
लगभग सभी UPI ऐप (PhonePe, Google Pay, Paytm) में अब दैनिक लेनदेन सीमा तय करने का विकल्प होता है।
- क्या करें: अपनी रोज की खर्च करने की आदत के हिसाब से एक लिमिट सेट करें, जैसे ₹3,000 या ₹5,000।
- फायदा: लिमिट खत्म होने के बाद ऐप आपको अलर्ट करेगा या ट्रांजैक्शन ब्लॉक कर देगा।
2. UPI सर्कल और फैमिली मोड अपनाएं
BHIM ऐप ने हाल ही में UPI Circle फुल डेलिगेशन फीचर लॉन्च किया है ।
- कैसे काम करता है: मुख्य यूजर (जैसे पिता) सेकेंडरी यूजर (जैसे बेटा) के लिए ₹15,000 प्रति माह की सीमा तय कर सकते हैं।
- फायदा: बच्चों या बुजुर्ग माता-पिता को बिना उनके खुद का बैंक अकाउंट के, सीमित बजट में डिजिटल पेमेंट की आजादी ।
3. UPI लाइट का करें इस्तेमाल
छोटे-छोटे खर्चे (₹500 तक) जैसे चाय, अखबार, सब्जी के लिए UPI Lite का उपयोग करें।
- फायदा: इसमें पिन डालने की जरूरत नहीं होती, लेकिन आप इसमें सिर्फ थोड़ा सा पैसा डालकर रखते हैं। जैसे ही वॉलेट खाली होता है, आपको रुकना पड़ता है।
4. ऑटोपे मैंडेट्स की मासिक समीक्षा करें
हर महीने की 1 तारीख को 10 मिनट निकालें और UPI ऐप के “मैंडेट्स/ऑटोपे” सेक्शन को चेक करें ।
- एक्शन: जिन सर्विस का उपयोग नहीं कर रहे, उन्हें तुरंत कैंसल करें। यह फ्रिज में बासी खाना फेंकने जैसा है, जरूरी है ।
5. ‘24 घंटे का नियम’ लागू करें
कोई भी महंगी ऑनलाइन खरीदारी (जैसे नया गैजेट या कपड़े) करने से पहले 24 घंटे का ठंडा समय लें।
- मनोविज्ञान: इंपल्सिव खरीदारी में एड्रेनालिन रश होता है। 24 घंटे बाद आपको एहसास होगा कि वह चीज कितनी अनावश्यक थी ।
6. छोटे खर्चों के लिए कैश पर स्विच करें
मानसी जावेरी (Founder, Kidsstoppress) ने अपनी बेटी आन्या को कैश देना शुरू किया। आन्या का कहना है, “जब मेरे पास हाथ में कैश होता है, मैं सिर्फ वही खरीदती हूं जो वास्तव में जरूरी है” ।
- सुझाव: चाय, पान, पार्किंग, हेयर कट जैसे खर्चों के लिए एक अलग कैश वॉलेट रखें।
7. एक्सपेंस ट्रैकिंग ऐप से जुड़ें
UPI ऐप से आपका डेटा सीधे क्रेड या वॉल्ट जैसे एक्सपेंस मैनेजर ऐप से कनेक्ट करें।
- फायदा: कैटेगरी वाइज खर्च का पता चलेगा। आपको पता चलेगा कि स्विगी/जोमैटो पर कितना फिजूल खर्चा हो रहा है ।
8. धीमे पड़ें, स्पीड से ना टाइप करें
फाइनेंशियल कंटेंट क्रिएटर नेहा नागर सलाह देती हैं, “डिजिटल ट्रांजैक्शन करते वक्त, उस स्पीड से मत टाइप कीजिए जिस स्पीड से आप टेक्स्ट करते हैं“ ।
- गलती: जल्दबाजी में अमाउंट में एक्स्ट्रा जीरो लग जाना (₹5,000 की जगह ₹50,000)।
- समाधान: भुगतान से पहले वेंडर का नाम, UPI ID और अमाउंट दोबारा चेक करें।
9. क्रेडिट कार्ड को UPI से न लिंक करें
बिहेवियरल एक्सपर्ट्स के अनुसार, UPI + क्रेडिट कार्ड सबसे खतरनाक कॉम्बिनेशन है ।
- कारण: UPI पेन ऑफ पेइंग को खत्म करता है, क्रेडिट कार्ड भुगतान को डिफर करता है। दोनों मिलकर आपको यह भ्रम देते हैं कि पैसा खर्च ही नहीं हो रहा है।
- उपाय: UPI को सिर्फ सेविंग अकाउंट या डेबिट कार्ड से लिंक रखें, क्रेडिट कार्ड से नहीं।
10. फिजिकल फ्रिक्शन पैदा करें
प्रोडक्ट मैनेजर कमलिका पोद्दार सलाह देती हैं कि प्लेटफॉर्म स्मूद बनाते हैं, इसलिए हमें खुद ही “फ्रिक्शन प्वाइंट्स” क्रिएट करने होंगे ।
- आइडिया: ई-कॉमर्स वेबसाइट पर अपने कार्ड की डिटेल सेव न करें। हर बार डिटेल एंटर करने का झंझट आपको अनावश्यक खरीदारी से रोकेगा।
व्यावहारिक समाधान: UPI फीचर्स की तुलना तालिका
UPI ने खर्च कंट्रोल करने के लिए कई फीचर्स दिए हैं। आइए समझते हैं कि कब किसका उपयोग करना चाहिए।
तालिका 2: UPI कंट्रोल फीचर्स और उनके उपयोग
| फीचर का नाम | कैसे काम करता है? | अधिकतम सीमा | सबसे उपयुक्त किसके लिए? |
|---|---|---|---|
| UPI लाइट | ऑफलाइन पेमेंट, बिना पिन के | ₹500 प्रति ट्रांजैक्शन | चाय, सब्जी, पार्किंग जैसे छोटे खर्चे |
| UPI सर्कल (फुल डेलिगेशन) | प्राइमरी यूजर सेकेंडरी के लिए लिमिट सेट करेगा | ₹15,000 प्रति माह | बच्चे, बुजुर्ग माता-पिता, कर्मचारी |
| UPI ऑटोपे | रिकरिंग पेमेंट के लिए मैंडेट | विभिन्न (जैसे ₹5000) | बिजली बिल, OTT, लोन EMI (केवल जरूरी खर्चों के लिए) |
| डेली लिमिट | UPI ऐप में खुद से सेट करनी होगी | यूजर डिफाइंड | जिन्हें लगता है कि वह ओवरस्पेंड कर रहे हैं |
विशेषज्ञ की राय: क्या UPI छोड़ना ही एकमात्र विकल्प है?
बिल्कुल नहीं। UPI एक शानदार टेक्नोलॉजी है, लेकिन हर टेक्नोलॉजी की तरह इसका जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग (Responsible Usage) ही कुंजी है।
डिजिटल पेमेंट बनाम मेंटल अकाउंटिंग:
- समस्या: हम अपने बैंक बैलेंस को डिस्पोजेबल इनकम समझने लगे हैं ।
- समाधान: “एनवलप सिस्टम” अपनाएं। हर महीने की शुरुआत में तय करें कि किराना, ट्रैवल, डाइनिंग और बचत में कितना पैसा जाना है। UPI से सिर्फ उतना ही खर्च करें, जितना एलोकेट किया है।
भविष्य की चुनौतियां और जिम्मेदारी
जैसे-जैसे UPI क्रेडिट से जुड़ रहा है, खतरे और बढ़ेंगे। 2025 तक 48.5% वैश्विक रीयल-टाइम पेमेंट अकेले भारत में हो रहे थे । फिनटेक कंपनियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे केवल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम बढ़ाने पर ध्यान न दें, बल्कि “इंटेंशनल डिज़ाइन” अपनाएं ।
निष्कर्ष
UPI ने भुगतान को लोकतांत्रिक बना दिया है। यह भारत की आर्थिक कहानी का सबसे सफल अध्याय है। लेकिन हर सफलता की कहानी में अनुशासन का पाठ जरूरी होता है।
आज से शुरू करें:
- अपने UPI ऐप में डेली लिमिट सेट करें।
- अनाम मिर्जा की तरह न सही, कम से कम एक दिन सप्ताह “कैश ओनली डे” मनाएं।
- जो सब्सक्रिप्शन यूज नहीं कर रहे, उन्हें आज ही कैंसल करें।
याद रखिए, आसान भुगतान का मतलब यह नहीं कि हर भुगतान जरूरी है। पैसे पर नियंत्रण आपका है, UPI सिर्फ एक माध्यम है। इस माध्यम को अपना मालिक न बनने दें।
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