CBDT ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 के नए नियमों पर जनता से राय मांगी। 1 अप्रैल 2026 से ITR डेडलाइन बढ़ना, बीमा छूट, सरल प्रक्रिया। 4 बिंदुओं पर फीडबैक दें—भाषा सरलीकरण से बेकार नियम हटाओ। ऑनलाइन कैसे सबमिट करें, पूरी गाइड!

अगर आप हर साल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय कानूनी जटिलताओं, लंबे फॉर्म्स और अनगिनत नियमों से तंग आ चुके हैं, तो अच्छी खबर है! केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत नए नियमों और फॉर्म्स पर पहली बार आम जनता से सुझाव मांगे हैं। वित्त मंत्रालय ने 8 फरवरी 2026 को यह घोषणा की, और ये बदलाव 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू होंगे।
यह कदम टैक्सपेयर्स की परेशानियों को दूर करने का ऐतिहासिक प्रयास है। अब आप खुद बता सकते हैं कि फॉर्म में क्या कमी है, कौन सा हिस्सा हटा देना चाहिए या भाषा को कैसे सरल बनाया जाए। CBDT (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) ने ड्राफ्ट को इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। आइए जानते हैं इन इनकम टैक्स नए नियमों 2026 में क्या खास है और आप अपनी राय कैसे दे सकते हैं।
जनता की भागीदारी: टैक्स सिस्टम को नया रूप देने का मौका
भारतीय टैक्स सिस्टम में यह पहली बार है जब सरकार सीधे नागरिकों से फीडबैक ले रही है। पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जटिलताओं ने लाखों टैक्सपेयर्स को परेशान किया है—भाषा मुश्किल, फॉर्म लंबे, और छोटी-मोटी गलतियों पर नोटिस। अब इनकम टैक्स एक्ट 2025 इसे बदलने को तैयार है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, नए नियमों का ड्राफ्ट विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद तैयार हुआ है, लेकिन अंतिम रूप देने से पहले आपकी राय जरूरी है। इसका मकसद टैक्स भरना इतना आसान बनाना है कि बिना CA या टैक्स एक्सपर्ट के भी कोई ITR फाइल कर सके। उदाहरण के लिए, अगर आपको लगता है कि कोई फॉर्म का सेक्शन बेकार है, तो आप उसे हटाने का सुझाव दे सकते हैं।
यह कदम डिजिटल इंडिया का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग भाग लें, खासकर छोटे व्यापारी, सैलरीड कर्मचारी और फ्रीलांसर जो रोज टैक्स फाइलिंग की पेचीदगियों से जूझते हैं।
4 मुख्य बिंदुओं पर दें सुझाव: फोकस एरिया क्या हैं?
सीबीडीटी ने साफ किया है कि फीडबैक चार खास बिंदुओं पर चाहिए। हर सुझाव इनमें से किसी एक कैटेगरी में फिट होना चाहिए। आइए इन्हें विस्तार से समझें:
- भाषा का सरलीकरण: क्या नियमों की भाषा आम आदमी को समझ आ रही है? पुराने फॉर्म्स में कानूनी शब्दावली जैसे “assesseee”, “deduction u/s 80C” आम लोगों के लिए भूलभुलैया थे। अब सरल हिंदी/अंग्रेजी में बदलाव सुझाएं।
- विवादों में कमी: क्या ये नियम कानूनी झगड़ों को कम करेंगे? उदाहरण: रिफंड देरी पर होने वाले केस। सुझाव दें कि कैसे नोटिस कम हो और ट्रांसपेरेंसी बढ़े।
- आसान प्रक्रिया: टैक्स भरना या रिफंड लेना कितना सरल? जैसे ऑनलाइन पोर्टल पर एक-क्लिक सबमिशन या ऑटो-कैलकुलेशन।
- बेकार नियमों की छुट्टी: कौन से पुराने फॉर्म या नियम अब प्रासंगिक नहीं? जैसे डिजिटल युग में पेपर-बेस्ड सर्टिफिकेट्स।
ये बिंदु टैक्स सिस्टम को स्ट्रीमलाइन करने पर केंद्रित हैं। आपका एक सुझाव लाखों लोगों की जिंदगी आसान बना सकता है!
सुझाव कैसे दें? स्टेप-बाय-स्टेप डिजिटल प्रक्रिया
फीडबैक देना बेहद आसान और पारदर्शी है। इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in) पर जाएं। यहां ड्राफ्ट डाउनलोड करें और फीडबैक फॉर्म भरें। स्टेप्स:
- रजिस्ट्रेशन: नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल डालें। OTP से वेरीफाई करें।
- ड्राफ्ट चुनें: जिस नियम, उप-नियम या फॉर्म नंबर पर सुझाव है, उसे सिलेक्ट करें (जैसे Rule 12A या Form ITR-1)।
- कैटेगरी चुनें: ऊपर बताए 4 बिंदुओं में से एक चुनें।
- सुझाव लिखें: स्पष्ट बताएं—क्या बदलाव चाहते हैं, क्यों? उदाहरण: “Form 16 में सेक्शन 80G को सरल बनाएं, क्योंकि डोनेशन प्रूफ अपलोड मुश्किल है।”
- सबमिट: प्रीव्यू चेक करें और सबमिट। आपको रसीद नंबर मिलेगा।
डेडलाइन: आमतौर पर 30-45 दिन, चेक करें पोर्टल पर। कोई चार्ज नहीं, और आपका नाम गोपनीय रहेगा। मोबाइल ऐप से भी कर सकते हैं।
1 अप्रैल 2026 से बड़े बदलाव: क्या होगा नया?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2025 बजट में ही इनकम टैक्स एक्ट 2025 का ऐलान किया था। नए सिस्टम में ये प्रमुख बदलाव:
ITR फाइलिंग की नई डेडलाइन
- नॉन-ऑडिट केस (सैलरीड, छोटे बिजनेस): 31 जुलाई से बढ़कर 31 अगस्त।
- ऑडिट केस: 31 अक्टूबर तक।
- फायदा: ज्यादा समय, कम जल्दबाजी में गलतियां।
बीमा क्लेम पर टैक्स छूट
- इंश्योरेंस क्लेम पर मिलने वाले ब्याज पर अब टैक्स नहीं। पहले ये टैक्सेबल था, जो सीनियर सिटिजंस को परेशान करता था।
जीरो डिडक्शन सर्टिफिकेट
- छोटे टैक्सपेयर्स (टर्नओवर <₹2 करोड़) के लिए नया प्रावधान। TDS कटे बिना सैलरी/पेमेंट लें।
सरल फॉर्म्स और डिजाइन
- फॉर्म्स को रीडिजाइन: कम फील्ड्स, ऑटो-पॉपुलेशन, हिंदी सपोर्ट।
- उदाहरण: ITR-1 अब 2 पेज का, पहले 5+ था।
ये बदलाव डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देंगे और पेपरवर्क खत्म करेंगे।
1961 से 2025 तक का सफर: कैसे पहुंचे यहां?
इनकम टैक्स एक्ट 1961 ने स्वतंत्र भारत का टैक्स सिस्टम बनाया, लेकिन 60+ सालों में ये जर्जर हो गया। जुलाई 2024 में वित्त मंत्री ने समीक्षा का ऐलान किया। रिकॉर्ड 18 महीनों में इनकम टैक्स एक्ट 2025 तैयार।
- पुरानी समस्याएं: 700+ सेक्शन्स, अस्पष्ट भाषा, बार-बार संशोधन।
- नया विजन: 300+ सेक्शन्स, सरल भाषा, टेक्नोलॉजी-बेस्ड।
- विशेषज्ञों की राय: 100+ कंसल्टेशन, अब पब्लिक इनपुट।
यह रिफॉर्म GST और IBC की तरह क्रांतिकारी होगा।
आपके लिए क्या मायने? प्रैक्टिकल टिप्स और उदाहरण
मान लीजिए आप सैलरीड एम्प्लॉयी हैं। पुराने सिस्टम में 80C डिडक्शन के लिए रसीदें जमा करनी पड़तीं। नए में ऑटो-फिल होगा। सुझाव दें: “रिफंड स्टेटस को ऐप में रियल-टाइम दिखाएं।”
छोटे बिजनेस ओनर के लिए: फॉर्म 3CD में GST डेटा इंटीग्रेट करें, ताकि डुप्लीकेशन न हो।
उदाहरण सुझाव:
- भाषा: “Section 194A को ‘ब्याज पर TDS’ कहें।”
- प्रक्रिया: “PAN-Aadhaar लिंक ऑटो हो।”
अपनी जेब बचाने का मौका—फीडबैक दें और बदलाव देखें!
निष्कर्ष: अभी एक्शन लें, टैक्स आसान बनाएं
इनकम टैक्स नए नियम 2026 आपकी भागीदारी से मजबूत होंगे। पोर्टल पर जाएं, ड्राफ्ट पढ़ें और सुझाव दें। यह न सिर्फ आपकी सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि पूरे सिस्टम को बेहतर बनाएगा। टैक्स समाचार पर अपडेट्स के लिए सब्सक्राइब करें।
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