जानिए इमरजेंसी फंड क्या है, कितना बनाना चाहिए और कहां रखना सही है? स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के साथ कैसे बनाएं पूरी सुरक्षा? टैक्स समाचार पर पढ़ें आपातकालीन निधि बनाने का पूरा स्टेप-बाय-स्टेप गाइड।

इमरजेंसी फंड प्लानिंग: निवेश से पहले की सबसे जरूरी स्टेप जो 80% लोग भूल जाते हैं
गोल्ड, सिल्वर या म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले एक बार रुक जाइए। क्या आपने अपना इमरजेंसी फंड (आपातकालीन निधि) बनाया है? चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में 80% से अधिक लोग महज एक आपात स्थिति दूर हैं अपनी पूरी बचत और निवेश गंवाने से। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों में काम करने वाले 71% भारतीय अस्पताल के बिल अपनी जेब से भरते हैं, जिससे उनकी सारी बचत खत्म हो जाती है।
आपातकाल सिर्फ मेडिकल नहीं होता। नौकरी चले जाना, कार खराब होना, घर की अचानक मरम्मत, या कोई कानूनी मुसीबत भी आपकी वित्तीय योजना को पल भर में ध्वस्त कर सकती है। इसलिए, किसी भी निवेश पर विचार करने से पहले, आपका पहला सवाल यह होना चाहिए: “मेरा इमरजेंसी फंड कैसे बनेगा?”
सबसे पहला सवाल: इमरजेंसी फंड कितना बड़ा होना चाहिए?
पारंपरिक सलाह है: “6 महीने के खर्च के बराबर राशि रखें।” लेकिन यह जवाब अधूरा है। इमरजेंसी फंड एक व्यक्तिगत (पर्सनल) निर्णय है, जो हर किसी के लिए अलग हो सकता है।
* गलती कहां होती है? अगर आपका कुल मासिक खर्च ₹50,000 है, जिसमें शॉपिंग, रेस्तरां और यात्रा जैसे अनावश्यक खर्च (वांट्स)भी शामिल हैं। नौकरी जाने पर आप इन खर्चों को तुरंत रोक देंगे।
* सही तरीका क्या है? अपने बेसिक जरूरतों के खर्च (नीड्स) को आधार बनाएं। मान लीजिए, ₹50,000 के कुल खर्च में से ₹30,000 किराया, राशन, बिल और EMI जैसे अनिवार्य खर्च हैं। आपका इमरजेंसी फंड इस ₹30,000 के हिसाब से बनेगा।
* अंतिम लक्ष्य क्या है? वह राशि जो आपको और आपके परिवार को मानसिक शांति (पीस ऑफ माइंड) दे। किसी के लिए 6 महीने का फंड (₹30,000 x 6 = ₹1.8 लाख) काफी हो सकता है, तो किसी को 12 महीने (₹3.6 लाख) का फंड चाहिए। यह आपकी नौकरी की स्थिरता और जोखिम सहने की क्षमता पर निर्भर करता है।
इमरजेंसी फंड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा: हेल्थ इंश्योरेंस
आपका इमरजेंसी फंड बड़ी मेडिकल आपात स्थितियों को नहीं संभाल सकता। भारत में 4% से भी कम लोग हेल्थ इंश्योरेंस के दायरे में हैं। कंपनी के हेल्थ इंश्योरेंस पर भरोसा करना खतरनाक है, क्योंकि नौकरी बदलने या छूटने पर यह सुरक्षा खत्म हो जाती है।
* कितना कवर लें? आजकल 5-7 लाख का कवर पर्याप्त नहीं है। मेट्रो शहरों में रहने वालों को कम से कम 20-25 लाख और टियर-2 शहरों में 10-15 लाख का कवर लेना चाहिए।
* कौन सी पॉलिसी लें? एक विश्वसनीय बीमाकर्ता से व्यक्तिगत या फैमिली फ्लोटर पॉलिसी जरूर लें। स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की दो योजनाएं अच्छे विकल्प हैं:
1. सुपरस्टार प्लान:‘फ्रीज योर एज’ फीचर के साथ अनलिमिटेड कवर। क्लेम न करने पर प्रीमियम नहीं बढ़ता।
2. अशोर प्लान: 2 करोड़ तक का कवर, जिसमें 9 परिवार के सदस्य और मातृत्व संबंधी कवर भी शामिल है।
इमरजेंसी फंड कहां रखें? यहाँ है आदर्श आवंटन (Allocation)
इमरजेंसी फंड के लिए तीन गुण जरूरी हैं: स्थिरता (स्टेबिलिटी), तत्काल उपलब्धता (लिक्विडिटी), और मुद्रास्फीति को मात देने वाला रिटर्न। इसलिए, इक्विटी या स्टॉक यहां अच्छे विकल्प नहीं हैं।
आप अपना इमरजेंसी फंड इस तरह विभाजित कर सकते हैं:
आपातकालीन निधि (इमरजेंसी फंड) को सुरक्षित, तरल और मुद्रास्फीति से सुरक्षित रखने के लिए इसे तीन भागों में बाँटने की सलाह दी जाती है। सबसे बड़ा हिस्सा, यानी 50-60%, आपको एक ऑटो-स्वीप फीचर वाले अलग सेविंग्स अकाउंट में रखना चाहिए। इसका कारण यह है कि इसमें आपको सेविंग्स अकाउंट जैसी तत्काल निकासी की सुविधा मिलती है, साथ ही जब राशि एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाती है तो वह स्वतः ही सावधि जमा (एफडी) में चली जाती है, जिससे एफडी जैसा बेहतर ब्याज मिलता रहता है। आपात स्थिति में इस एफडी को बिना किसी बड़े नुकसान के तुरंत तोड़ा भी जा सकता है।
दूसरा हिस्सा, कुल फंड का 30-35%, लिक्विड फंड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म डेट फंड में निवेश करना चाहिए। ये फंड बहुत ही कम जोखिम (नगण्य अस्थिरता) वाले होते हैं और आमतौर पर बचत खाते या एफडी से बेहतर रिटर्न (वर्तमान में लगभग 7% वार्षिक) देते हैं। इनकी सबसे बड़ी खूबी है तरलता; इनमें से पैसे निकालने की रिक्वेस्ट देने के अगले ही कारोबारी दिन (T+1) में राशि आपके बैंक खाते में वापस आ जाती है, जो ज्यादातर आपात स्थितियों के लिए काफी तेज है।
अंतिम हिस्सा, लगभग 10%, भौतिक नकदी और गोल्ड कॉइंस के रूप में सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। यह हिस्सा सबसे खराब संभव स्थिति के लिए एक अंतिम उपाय है। उदाहरण के लिए, अगर कभी कोई बड़ा साइबर हमला हो या बैंकिंग प्रणाली कुछ समय के लिए पूरी तरह से ठप्प हो जाए, जहाँ डिजिटल लेनदेन असंभव हो जाए, तो यह नकदी और गोल्ड कॉइंस ही काम आएंगे। हालांकि ऐसी स्थिति की संभावना केवल 1% ही हो सकती है, लेकिन चूँकि यह एक आपातकालीन निधि है, इसलिए इस चरम स्थिति के लिए भी तैयार रहना बुद्धिमानी है।
इमरजेंसी फंड बनाने और बनाए रखने का व्यावहारिक तरीका
सैद्धांतिक रूप से इमरजेंसी फंड के बारे में जानने के बाद, इसे वास्तविकता में लाने और प्रभावी ढंग से काम करते रहने के लिए तीन व्यावहारिक कदमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. ऑटोमेशन है कुंजी: ‘पे योरसेल्फ फर्स्ट’ का सिद्धांत अपनाएं
इमरजेंसी फंड बनाने की सबसे बड़ी चुनौती अनुशासन बनाए रखना है। इसे पार करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है पूरी प्रक्रिया को स्वचालित (ऑटोमेट) कर देना।
* क्या करें?अपने वेतन (सैलरी) खाते में एक स्थायी निर्देश (स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन) या ऑटो-डेबिट मैंडेट सेट कर लें।
* कितना और कब? यह निर्देश आपके वेतन प्राप्त होने के 1-2 दिन बाद सक्रिय होना चाहिए, ताकि पैसा खर्च होने से पहले ही बच जाए। एक निश्चित राशि या आपकी मासिक आय का एक प्रतिशत (जैसे 10%, 15% या 20%) स्वचालित रूप से आपके मुख्य खाते से इमरजेंसी फंड के लिए बनाए गए अलग बचत खाते में स्थानांतरित हो जाए।
* फायदा: इस ‘पे योरसेल्फ फर्स्ट’ (सबसे पहले खुद को पैसे दो) के सिद्धांत से आपको बचत के लिए मैन्युअल रूप से याद रखने या महीने के अंत में बचे हुए पैसे की उम्मीद करने की जरूरत नहीं रह जाती। बचत आपकी वित्तीय प्राथमिकता बन जाती है, न कि अंतिम विकल्प।
2. नियमित समीक्षा: फंड को आपकी बदलती जिंदगी के साथ अपडेट रखें
इमरजेंसी फंड ‘एक बार बना लिया और भूल गए’ वाली चीज नहीं है। आपकी जीवनशैली, जिम्मेदारियां और खर्चे समय के साथ बदलते रहते हैं, इसलिए आपकी सुरक्षा राशि भी बदलनी चाहिए।
* कब करें समीक्षा? हर 12 से 24 महीने में या जब भी आपके जीवन में कोई बड़ा बदलाव हो (जैसे शादी, बच्चे का जन्म, नया घर लेना, नौकरी बदलना, वेतन में बड़ी बढ़ोतरी)।
* क्या चेक करें? समीक्षा के दौरान खुद से ये सवाल पूछें:
* क्या मेरे बेसिक जरूरतों का मासिक खर्च (किराया, किराना, EMI) बढ़ गया है?
* क्या मेरी नौकरी की स्थिरता में कोई बदलाव आया है?
* क्या परिवार में नए आश्रित सदस्य (जैसे बुजुर्ग माता-पिता) जुड़े हैं?
* क्या मेरे हेल्थ इंश्योरेंस का कवर अभी भी पर्याप्त है?
* करें क्या? इन सवालों के जवाब के आधार पर, अपने इमरजेंसी फंड के लक्षित लक्ष्य (टारगेट अमाउंट) को अपडेट करें और यदि जरूरत हो तो, स्वचालित स्थानांतरण (ऑटो-डेबिट) की राशि भी बढ़ा दें।
3. उपयोग के बाद तुरंत भरें: सुरक्षा कवच को हमेशा तैयार रखें
इमरजेंसी फंड का उद्देश्य ही है आपातकाल में काम आना। लेकिन इसका इस्तेमाल करने के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम है इसे फिर से भरना।
* प्राथमिकता:अगर किसी आपात स्थिति में आपने अपने इमरजेंसी फंड से पैसे निकाले हैं, तो उस राशि की पूर्ति (रिप्लेनिशमेंट) आपकी सबसे ऊंची वित्तीय प्राथमिकता बन जानी चाहिए।
* तत्काल कार्रवाई: आपात स्थिति के समाधान के तुरंत बाद, एक असाधारण बचत योजना बनाएं। इसका मतलब हो सकता है कि कुछ महीनों के लिए अनावश्यक खर्चों (जैसे बाहर खाना, शॉपिंग) में कटौती करके, या अतिरिक्त आय के स्रोत तलाशकर, खोई हुई राशि को जल्द से जल्द वापस जमा करना।
* कारण: ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि जीवन में एक आपातकाल के बाद दूसरा कभी भी आ सकता है। यदि फंड खाली रहेगा, तो आप फिर से वित्तीय रूप से कमजोर और असुरक्षित हो जाएंगे।
इमरजेंसी फंड बनाना एक सक्रिय और निरंतर प्रक्रिया है। इसे स्वचालित करके शुरुआत करें, नियमित रूप से समीक्षा करके इसे प्रासंगिक बनाए रखें, और इस्तेमाल के बाद तुरंत भरकर इसे हमेशा आपकी रक्षा के लिए तैयार रखें। यही वह अनुशासन है जो एक कागजी योजना को वास्तविक जीवन का सुरक्षा कवच बना देता है।
निष्कर्ष: सुरक्षा जाल बुनें, तभी ऊंची उड़ान भरें
इमरजेंसी फंड आपकी वित्तीय यात्रा की सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण नींव है। यह आपको जोखिम भरे निवेश करने, करियर बदलने या उद्यम शुरू करने की हिम्मत देता है, क्योंकि आप जानते हैं कि पीछे एक सुरक्षा जाल है। स्टार हेल्थ इंश्योरेंस जैसी मजबूत हेल्थ पॉलिसी के साथ, और ऊपर बताए गए 3-तरफा आवंटन मॉडल से आप एक अभेद्य वित्तीय कवच तैयार कर सकते हैं। याद रखें, बिना इमरजेंसी फंड के की गई निवेश योजना, बिना नींव के महल बनाने जैसी है।
Read More :SIP करने से पहले जान लें ये 5 छिपे हुए सच:क्या सच में हर SIP अच्छी होती है?
