
जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेने के बाद क्या करें? 20 जरूरी स्टेप्स, रिटर्न फाइलिंग की डेट, पेनल्टी से बचने के उपाय, इनवॉइसिंग, ITC क्लेम, कंपोजिशन vs रेगुलर स्कीम, और सभी कॉम्प्लायंस टिप्स हिंदी में। जीएसटी पोर्टल लिंक्स के साथ पूरी गाइड।
जीएसटी – एक जिम्मेदारी भरा कदम
जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स। अगर आप कोई माल मैन्युफैक्चर कर रहे हैं, होलसेल या रिटेल में बेच रहे हैं, या कोई सर्विस प्रदान कर रहे हैं, तो आपको जीएसटी भरना पड़ता है। लेकिन कई बार विभिन्न परिस्थितियों में आपको थ्रेशोल्ड लिमिट से पहले ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेना पड़ सकता है। जीएसटी नंबर लेना हंसी-खेल नहीं है – इसे सीरियसली मेंटेन करना पड़ता है।
आज हम आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन के बाद 20 ऐसे जरूरी पॉइंट्स बताएंगे जिनका आपको तुरंत ध्यान रखना है। अगर आप इनमें से किसी भी रूल को तोड़ते हैं, तो जीएसटी डिपार्टमेंट आप पर भारी लेट फीस, इंटरेस्ट और पेनल्टी लगा सकता है।
जरूरी लिंक:
- जीएसटी पोर्टल: https://www.gst.gov.in/
- जीएसटी रिटर्न फॉर्म्स: https://www.gst.gov.in/help/returns
- जीएसटी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट: https://services.gst.gov.in/services/quicklinks/registration
जीएसटी रजिस्ट्रेशन: मूलभूत जानकारी
जीएसटी थ्रेशोल्ड लिमिट क्या है?
जीएसटी लेना या नहीं लेना आपकी टर्नओवर पर निर्भर करता है:
- माल बेचने वालों के लिए: ₹40 लाख से अधिक टर्नओवर (सामान्य राज्य)
- सर्विस प्रोवाइडर के लिए: ₹20 लाख से अधिक टर्नओवर (सामान्य राज्य)
- विशेष श्रेणी राज्य (असम, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, आदि):
- माल बेचने वाले: ₹20 लाख
- सर्विस प्रोवाइडर: ₹10 लाख
कंपोजिशन vs रेगुलर डीलर
- कंपोजिशन स्कीम: ₹1.5 करोड़ तक टर्नओवर वाले व्यवसाय
- माल: 1% GST
- सर्विस: 6% GST
- रेस्टोरेंट: 5% GST
- इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले सकते
- रेगुलर डीलर: कोई भी टर्नओवर
- पूरी रेट से GST
- इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं
- अधिक कॉम्प्लायंस
जीएसटी रजिस्ट्रेशन के बाद 20 जरूरी काम
1. जीएसटी सर्टिफिकेट डाउनलोड और डिस्प्ले
जीएसटी रजिस्ट्रेशन अप्रूव होने के तुरंत बाद:
- सर्टिफिकेट डाउनलोड करें (3 पेज का)
- फ्रेम करवाएं या टेप से लगाएं
- दुकान/ऑफिस/गोडाउन में प्रमुख स्थान पर डिस्प्ले करें
- पेनल्टी: न लगाने पर ₹25,000 तक (आमतौर पर ₹10,000)
जरूरी लिंक:
https://services.gst.gov.in/services/quicklinks/registration
2. व्यापार स्थल पर बोर्ड लगाना
आपकी दुकान, ऑफिस या गोडाउन पर:
- व्यवसाय का नाम
- जीएसटी नंबर
- संपर्क विवरण
- पता
- अगर कॉमन गेट है तो वहाँ भी बोर्ड लगाएँ
3. करंट अकाउंट खुलवाना
- फर्म के नाम से करंट अकाउंट खुलवाएँ
- सभी बिजनेस ट्रांजैक्शन इसी अकाउंट से करें
- सेविंग अकाउंट में बिजनेस ट्रांजैक्शन न करें
- सभी ट्रांजैक्शन जीएसटी और इनकम टैक्स में दिखाएँ
4. इनवॉइसिंग सिस्टम सेट अप करना
- रेगुलर डीलर: टैक्स इनवॉइस
- कंपोजिशन डीलर: बिल ऑफ सप्लाई
- सॉफ्टवेयर: Tally, Busy, Marg, ERP
- सीरियल नंबर: हर वित्तीय वर्ष के बाद रीसेट या कंटिन्यू
5. परचेज बिल्स का रखरखाव
- सभी खरीद के बिल सुरक्षित रखें
- इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए जरूरी
- टैक्स इनवॉइस/बिल ऑफ सप्लाई संभाल कर रखें
6. एक्सपेंस फाइल मेन्टेन करना
- रेंट, सैलरी, यूटिलिटी बिल्स
- बिजनेस एक्सपेंस के सभी डॉक्युमेंट्स
- अलग फाइल में व्यवस्थित करें
7. फिक्स्ड एसेट्स का रिकॉर्ड
- एसी, मोबाइल, फ्रिज आदि की खरीद
- बिल्स सुरक्षित रखें
- आईटीआर में बैलेंस शीट और डिप्रिसिएशन दिखाएँ
8. पार्टी वाइज स्टेटमेंट
- सप्लायर्स/क्रेडिटर्स की स्टेटमेंट
- महीने/क्वार्टर/सालाना बनाएँ
- बकाया राशि ट्रैक करें
9. बैंक रिकंसिलिएशन स्टेटमेंट
- सभी बैंक ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड करें
- मासिक रिकंसिलिएशन
- अनक्लियर्ड चेक्स ट्रैक करें
जीएसटी रिटर्न फाइलिंग: समय सीमा और प्रक्रिया
10. कंपोजिशन डीलर्स के लिए रिटर्न
- CMP-08: क्वार्टरली (हर 3 महीने बाद 18 तारीख तक)
- जनवरी-मार्च: 18 अप्रैल
- अप्रैल-जून: 18 जुलाई
- जुलाई-सितंबर: 18 अक्टूबर
- अक्टूबर-दिसंबर: 18 जनवरी
- GSTR-4: एनुअल रिटर्न (30 जून तक)
11. रेगुलर डीलर्स के लिए रिटर्न
- GSTR-1 (सेल का विवरण):
- टर्नओवर ₹5 करोड़+ : मासिक (11 तारीख तक)
- टर्नओवर ₹5 करोड़- : क्वार्टरली (13 तारीख तक)
- GSTR-3B (सारांश रिटर्न):
- मासिक: 20 तारीख तक
- क्वार्टरली (QRMP): 22/24 तारीख तक (राज्य अनुसार)
- GSTR-9 (एनुअल रिटर्न):
- टर्नओवर ₹2 करोड़+ : 31 दिसंबर तक
12. IFF (Invoice Furnishing Facility)
- क्वार्टरली रिटर्न फाइल करने वाले
- अगले महीने की 13 तारीख तक
- खरीदार को इनपुट क्रेडिट समय पर मिले
जरूरी लिंक:
https://www.gst.gov.in/help/returns
लेट फीस और पेनल्टी से बचने के उपाय
13. समय पर रिटर्न फाइलिंग
लेट फीस की गणना:
- निल रिटर्न: ₹20 प्रति दिन
- टैक्सेबल रिटर्न: ₹50 प्रति दिन
- मैक्सिमम: टैक्स की राशि का 100%
14. E-Way बिल जनरेशन
- ₹50,000+ की वैल्यू पर
- 10+ किमी ट्रांसपोर्टेशन के लिए
- E-Invoice (अगर एप्लिकेबल हो)
15. डेबिट/क्रेडिट नोट्स का ध्यान रखना
- रिटर्न/कैंसलेशन के मामले में
- समय पर इशू और रिपोर्ट करें
16. इनपुट टैक्स क्रेडिट रिकंसिलिएशन
- GSTR-2A/2B से मैच करें
- मासिक/क्वार्टरली रिकंसिलिएशन
- डिस्क्रिपेंसी का समाधान
अन्य महत्वपूर्ण कॉम्प्लायंस
17. GST पोर्टल पर नोटिसेस चेक करना
- व्यू नोटिसेस रेगुलर चेक करें
- एडिशनल नोटिस का समय पर जवाब
- DRC-01, DRC-03 आदि पर ध्यान
जरूरी लिंक:
https://services.gst.gov.in/services/quicklinks/notices
18. HSN कोड का सही उपयोग
- प्रोडक्ट के अनुसार कोड
- 2, 4, 6 अंकों के कोड
- सही कोड से बिलिंग
19. व्यवसाय में बदलाव अपडेट करना
- पता बदलने पर
- पार्टनरशिप बदलने पर
- बिजनेस नेचर बदलने पर
- GST पोर्टल पर अपडेट करें
20. डिजिटल बैकअप लेना
- सभी परचेज/सेल बिल्स
- बैंक स्टेटमेंट्स
- रिटर्न फाइलिंग प्रूफ
- कम से कम 6 साल तक सुरक्षित रखें
विशेष सुझाव और सावधानियाँ
प्रोफेशनल मदद लें
- चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स कंसलटेंट
- रेगुलर अपडेट्स फॉलो करें
- GST काउंसिल की नोटिफिकेशन्स चेक करें
अनावश्यक ट्रांजैक्शन से बचें
- कैश ट्रांजैक्शन कम करें
- सभी ट्रांजैक्शन बैंक के माध्यम से
- प्रॉपर डॉक्युमेंटेशन
सेल्फ-एजुकेशन
- GST पोर्टल की E-Learning सेक्शन
- वेबिनार और वर्कशॉप अटेंड करें
- अपडेटेड रहें
जरूरी लिंक:
https://www.gst.gov.in/help/e-learning
निष्कर्ष: जीएसटी कॉम्प्लायंस सफलता की कुंजी
दोस्तों, जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेना हाथी खरीदने जैसा है – खरीदना आसान है, पर पालना महंगा। इन 20 पॉइंट्स का ध्यान रखकर आप न केवल पेनल्टी से बच सकते हैं, बल्कि अपने व्यवसाय को सुचारू रूप से चला सकते हैं।
सारांश:
- सर्टिफिकेट डिस्प्ले करें
- बोर्ड लगाएँ
- करंट अकाउंट खुलवाएँ
- इनवॉइसिंग सिस्टम सेट करें
- परचेज बिल्स रखें
- एक्सपेंस फाइल मेन्टेन करें
- फिक्स्ड एसेट्स रिकॉर्ड रखें
- पार्टी स्टेटमेंट बनाएँ
- बैंक रिकंसिलिएशन करें
- रिटर्न समय पर फाइल करें
- रेगुलर डीलर रिटर्न का ध्यान रखें
- IFF का उपयोग करें
- लेट फीस से बचें
- E-Way बिल जनरेट करें
- डेबिट/क्रेडिट नोट्स ट्रैक करें
- ITC रिकंसिलिएशन करें
- नोटिसेस चेक करें
- HSN कोड सही यूज करें
- बदलाव अपडेट करें
- डिजिटल बैकअप लें
अंतिम शब्द:
जीएसटी एक डायनामिक सिस्टम है जिसमें लगातार बदलाव होते रहते हैं। आपको खुद को अपडेटेड रखना होगा। अगर आपको कोई संदेह या प्रश्न है, तो प्रोफेशनल सलाह लें।
याद रखें: सही कॉम्प्लायंस न केवल आपको पेनल्टी से बचाती है, बल्कि आपके व्यवसाय की क्रेडिबिलिटी भी बढ़ाती है।
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नोट: यह ब्लॉग पोस्ट सामान्य जानकारी के लिए है। विशिष्ट मामलों के लिए कृपया अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स कंसलटेंट से सलाह लें। जीएसटी नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं, अतः सरकारी नोटिफिकेशन्स और अपडेट्स ध्यान से फॉलो करें।

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