क्या आपको लगता है न्यू टैक्स रिजीम में कोई बचत नहीं? गलत है! यहाँ जानिए वो 25 डिडक्शन, एक्सेम्पशन और टैक्स बेनिफिट्स जो न्यू रिजीम में भी मिलते हैं। Income Tax Act 2025 के तहत जानें पूरा कैलकुलेशन।

न्यू टैक्स रिजीम 2025 में टैक्स फ्री इनकम: 25 शानदार डिडक्शन और एक्सेम्पशन जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए
अगर आप भी उन लाखों करदाताओं में से हैं जिन्होंने सुना है कि अब ₹12 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं है और साथ ही इनकम टैक्स एक्ट 2025 भी लागू होने वाला है, तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है।
अक्सर लोगों के मन में यह कन्फ्यूजन रहता है कि न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) सिर्फ उन लोगों के लिए है जो कोई डिडक्शन नहीं लेना चाहते। जबकि हकीकत यह है कि न्यू टैक्स रिजीम 2025 में भी बहुत सारी छूट (Exemptions) और कटौतियां (Deductions) मौजूद हैं। ओल्ड टैक्स रिजीम में जहां टैक्स रेट ज्यादा है और टैक्स फ्री सीमा सिर्फ ₹5 लाख है, वहीं न्यू रिजीम में बिना डिडक्शन के ही ₹12 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री हो सकती है ।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन ₹12 लाख के अलावा भी अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं या पेंशनभोगी हैं, तो आपकी टैक्स फ्री इनकम की लिमिट और बढ़ सकती है? इस ब्लॉग में हम उन 25 खास डिडक्शन और एक्सेम्पशन के बारे में बात करेंगे, जो सिर्फ ओल्ड में ही नहीं, बल्कि न्यू टैक्स रिजीम में भी उपलब्ध हैं, ताकि आप कम से कम टैक्स दें और ज्यादा से ज्यादा बचत करें ।
1. न्यू टैक्स रिजीम क्या है? (FY 2025-26 के लिए)
Finance Bill 2025 के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (Assessment Year 2026-27) के लिए न्यू टैक्स रिजीम को और आकर्षक बना दिया गया है। सरकार की मंशा टैक्स सिस्टम को सरल बनाने की है, जिससे लोगों को जटिल हिसाब-किताब से मुक्ति मिल सके ।
ओल्ड रिजीम में जहां 70 से ज्यादा तरह की डिडक्शन मिलती हैं, वहीं न्यू रिजीम में टैक्स रेट बहुत कम कर दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, ओल्ड रिजीम में ₹10 लाख से ज्यादा इनकम पर 30% टैक्स देना पड़ता था, जबकि न्यू रिजीम में अब ₹24 लाख से ज्यादा इनकम पर ही 30% टैक्स लगेगा । आइए जानते हैं उन खास बेनिफिट्स के बारे में।
न्यू टैक्स रिजीम में मिलने वाले 25 बेनिफिट्स (Benefits, Deductions & Exemptions)
1. स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) – सैलरी वालों के लिए सबसे बड़ी राहत
सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण बेनिफिट स्टैंडर्ड डिडक्शन का है। सिर्फ सैलरी पाने वाले व्यक्तियों और पेंशनभोगियों को यह फायदा दिया गया है।
- न्यू रिजीम में: अब आपको ₹75,000 की फ्लैट डिडक्शन मिलेगी।
- ओल्ड रिजीम में: यह सीमा केवल ₹50,000 थी।
इसका मतलब है कि अगर आपकी सैलरी ₹12,75,000 तक है, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख रह जाएगी, जिस पर सेक्शन 87A के तहत रिबेट मिलकर टैक्स जीरो हो जाएगा ।
2. एनपीएस (NPS) में एम्प्लॉयर का कंट्रीब्यूशन – सेक्शन 80CCD(2)
नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में अगर आपका एम्प्लॉयर (Employer) योगदान करता है, तो यह पूरा पैसा आपके लिए टैक्स फ्री है।
- नियम: आपके बेसिक सैलरी और डियरनेस अलाउंस (DA) का 14% तक का योगदान टैक्स फ्री है।
- यह छूट ओल्ड और न्यू दोनों रिजीम में मिलती है, बशर्ते यह एम्प्लॉयर का कंट्रीब्यूशन हो ।
3. होम लोन का ब्याज (किराए पर दिए गए मकान के लिए) – सेक्शन 24
बहुत से लोग सोचते हैं कि होम लोन का बेनिफिट न्यू रिजीम में खत्म हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है।
- नियम: अगर आपने अपना मकान किराए पर उठा रखा है (Let-out Property) और उस पर होम लोन लिया है, तो उस लोन पर दिए गए ब्याज की पूरी रकम (बिना किसी ऊपरी सीमा के) डिडक्ट कर सकते हैं।
- उदाहरण: मान लीजिए आपको सालाना ₹1 लाख किराया मिलता है। इसमें से 30% की स्टैंडर्ड डिडक्शन (मरम्मत के लिए) घटाने के बाद बचता है ₹70,000। अगर आपने होम लोन पर ₹50,000 ब्याज चुकाया है, तो यह पूरा कट जाएगा। आपकी टैक्सेबल इनकम सिर्फ ₹20,000 (70,000 – 50,000) बचेगी ।
4. फैमिली पेंशन (Family Pension) पर छूट
अगर परिवार के किसी सदस्य (जैसे पत्नी) को मृतक कर्मचारी की पेंशन मिल रही है, तो यह राहत दी गई है।
- न्यू रिजीम में: ₹25,000 या पेंशन की 1/3 राशि (जो भी कम हो) टैक्स फ्री है।
- ओल्ड रिजीम में: यह सीमा सिर्फ ₹15,000 थी। इस तरह न्यू रिजीम में फैमिली पेंशनधारकों को ज्यादा फायदा है ।
5. कन्वेंस अलाउंस (विकलांग व्यक्तियों के लिए)
अगर कोई कर्मचारी दिव्यांग (Differently-abled) है, तो उसे ऑफिस और घर के बीच आने-जाने के लिए जो ट्रांसपोर्ट अलाउंस मिलता है, वह पूरी तरह टैक्स फ्री है।
- नियम: ₹3,200 प्रति माह तक की यह राशि टैक्स फ्री है ।
6. ग्रेच्युटी (Gratuity) – रिटायरमेंट का साथी
रिटायरमेंट के समय मिलने वाली ग्रेच्युटी पर टैक्स छूट का प्रावधान न्यू रिजीम में भी बरकरार है।
- प्राइवेट सेक्टर: ₹20 लाख तक की ग्रेच्युटी टैक्स फ्री है।
- सरकारी कर्मचारी: पूरी ग्रेच्युटी टैक्स फ्री होती है ।
7. लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment)
सेवा के दौरान जमा हुई छुट्टियों को रिटायरमेंट पर भुनाने (Encash) पर मिलने वाली राशि भी टैक्स फ्री है।
- नियम: गैर-सरकारी कर्मचारियों के लिए ₹25 लाख तक की राशि टैक्स फ्री है। सरकारी कर्मचारियों के लिए कोई लिमिट नहीं है ।
8. पीपीएफ (PPF) और ईपीएफ (EPF) का ब्याज और मैच्योरिटी
यह सबसे बड़ा कंफ्यूजन का विषय है। न्यू रिजीम में सेक्शन 80C का बेनिफिट नहीं मिलता, लेकिन पीपीएफ और ईपीएफ पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट पूरी तरह टैक्स फ्री है।
- सेक्शन: यह छूट सेक्शन 10(11) और 10(12) के तहत मिलती है, जो दोनों रिजीम में लागू होती है ।
9. सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana)
बेटी के भविष्य के लिए बनाई गई यह योजना न्यू रिजीम में भी उतनी ही प्रभावी है।
- लाभ: इस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि पूरी तरह टैक्स फ्री है। यह छूट सेक्शन 10(11A) के तहत आती है ।
10. कृषि आय (Agricultural Income)
देश की रीढ़ कही जाने वाली कृषि पर मिलने वाली आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। अगर आपकी सिर्फ कृषि आय है, तो वह पूरी तरह टैक्स फ्री है। यह नियम दोनों रिजीम में एक जैसा है ।
11. बोनस (Bonus) और अलाउंस
कंपनी की ओर से डेली ड्यूटी या ट्रांसफर के दौरान दिए जाने वाले एक्चुअल एक्सपेंसेज, जैसे टूर अलाउंस या ट्रांसफर अलाउंस, टैक्स फ्री होते हैं। यह वास्तविक खर्चा है, इनकम नहीं ।
12. रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट
- नियम: रिश्तेदारों (Relatives) से मिला कोई भी गिफ्ट (चाहे वह कितनी भी रकम हो) पूरी तरह टैक्स फ्री है। रिश्तेदारों में माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन आदि आते हैं ।
- गैर-रिश्तेदार: अगर किसी गैर-रिश्तेदार से मिला है, तो ₹50,000 तक का गिफ्ट टैक्स फ्री है ।
13. शादी पर मिले गिफ्ट
आपकी शादी के मौके पर आपको जितना भी पैसा या गिफ्ट मिले, वह पूरी तरह टैक्स फ्री है। चाहे वह रिश्तेदार से मिले या दोस्त से ।
14. इनहेरिटेंस (विरासत)
पूर्वजों से मिली संपत्ति या पैसा (Inheritance) टैक्स फ्री होता है। यह आपकी आय नहीं है, बल्कि संपत्ति का हस्तांतरण है ।
15. सेक्शन 80JJAA (नए कर्मचारी हायर करने पर)
यह डिडक्शन सिर्फ बिजनेसमैन के लिए है। अगर कोई बिजनेस नए कर्मचारी हायर करता है, तो उसे अतिरिक्त कटौती का लाभ न्यू रिजीम में भी मिलता है ।
16. सेक्शन 80CCH (अग्निवीर कॉर्पस फंड)
अग्निपथ स्कीम के तहत अग्निवीरों के लिए सरकार का योगदान (Government Contribution) सेक्शन 80CCH के तहत टैक्स फ्री है। यह सुविधा न्यू रिजीम में भी दी गई है ।
17. LIC मैच्योरिटी (सेक्शन 10(10D))
लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर होने पर मिलने वाली रकम टैक्स फ्री है, बशर्ते प्रीमियम सम एश्योर्ड के 10% से अधिक न हो।
- नियम: न्यू रिजीम में यह छूट बरकरार है, लेकिन ध्यान रहे अगर सालाना प्रीमियम ₹5 लाख से ज्यादा है तो मैच्योरिटी अमाउंट टैक्सेबल हो सकता है ।
18. शेयर/म्यूचुअल फंड से LTCG
इक्विटी शेयर या इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड बेचने पर होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर नियम:
- न्यू रिजीम में भी ₹1.25 लाख तक का LTCG टैक्स फ्री है। इसके ऊपर 12.5% टैक्स देना होता है ।
19. सेक्शन 87A के तहत रिबेट
यह न्यू रिजीम की सबसे बड़ी खासियत है। आपकी कुल इनकम (बिना स्पेशल रेट वाली इनकम के) अगर ₹12 लाख तक है, तो सेक्शन 87A के तहत आपको ₹60,000 की छूट (रिबेट) मिलती है, जिससे आपका टैक्स जीरो हो जाता है ।
- महत्वपूर्ण: ओल्ड रिजीम में यह रिबेट सिर्फ ₹5 लाख तक की इनकम पर ही मिलती थी।
20. मार्जिनल रिलीफ (Marginal Relief)
न्यू रिजीम में अगर आपकी इनकम ₹12 लाख से थोड़ी सी ज्यादा है (जैसे ₹12,10,000), तो आपको पूरे पैसे पर टैक्स नहीं देना होगा। मार्जिनल रिलीफ के तहत सिर्फ अतिरिक्त आय (यानी ₹10,000) पर ही टैक्स देना होगा। ओल्ड रिजीम में ₹5,00,001 की इनकम पर भी पूरा टैक्स देना पड़ता था ।
21. वीआरएस (Voluntary Retirement Scheme) – सेक्शन 10(10C)
अगर आप वालंटरी रिटायरमेंट लेते हैं, तो मिलने वाली राशि में से ₹5 लाख तक टैक्स फ्री है। यह सुविधा दोनों रिजीम में उपलब्ध है ।
22. कैपिटल गेन एक्सेम्प्शन (सेक्शन 54/54F)
अगर आप कोई पुरानी प्रॉपर्टी बेचकर दूसरी प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स नहीं लगता। यह छूट (Exemption) दोनों रिजीम में एक जैसी है। आप इसमें पैसा लगाकर पूरा टैक्स बचा सकते हैं ।
23. प्रेजम्पटिव टैक्सेशन (Presumptive Taxation)
छोटे कारोबारियों और पेशेवरों (जैसे डॉक्टर, वकील) के लिए प्रेजम्पटिव टैक्सेशन के नियम (सेक्शन 44AD और 44ADA) दोनों रिजीम में एक जैसे हैं। न्यू रिजीम चुनने पर भी आप इस सरल गणना का लाभ उठा सकते हैं ।
24. परक्विजिट्स (Perquisites) में छूट
कुछ परक्विजिट्स जैसे एम्प्लॉयर द्वारा दिया गया टेलीफोन/मोबाइल, क्लब मेंबरशिप, या स्टाफ ग्रुप इंश्योरेंस पर दिया गया प्रीमियम दोनों ही रिजीम में टैक्स फ्री हैं ।
25. सेविंग सर्टिफिकेट का प्रिंसिपल
NSC (National Savings Certificate) या पोस्ट ऑफिस की अन्य सेविंग स्कीम में मैच्योरिटी पर मिलने वाला मूलधन (Principal) टैक्स फ्री होता है। हालांकि, न्यू रिजीम में इस पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होगा, लेकिन मूलधन पर कोई टैक्स नहीं ।
तुलनात्मक विश्लेषण: ओल्ड बनाम न्यू रिजीम (Quick Comparison Table)
यहां हमने कुछ मुख्य अंतरों को स्पष्ट किया है:
| विशेषता (Feature) | ओल्ड टैक्स रिजीम | न्यू टैक्स रिजीम (FY 2025-26) |
|---|---|---|
| बेसिक एक्सेम्प्शन लिमिट | ₹2.5 लाख (कम उम्र), ₹3 लाख (सीनियर) | ₹3 लाख (सभी के लिए समान) |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹50,000 | ₹75,000 |
| टैक्स फ्री इनकम सीमा (रिबेट के साथ) | ~₹5 लाख (लगभग) | ₹12 लाख (सैलरी वालों के लिए ₹12.75 लाख) |
| HRA / LTA | मिलता है | नहीं मिलता |
| सेक्शन 80C (PPF, ELSS, LIC प्रीमियम) | मिलता है (₹1.5 लाख तक) | नहीं मिलता |
| होम लोन ब्याज (सेल्फ-ऑक्युपाइड) | ₹2 लाख तक मिलता है | नहीं मिलता |
| होम लोन ब्याज (लेट-आउट प्रॉपर्टी) | पूरा ब्याज (बिना लिमिट) | पूरा ब्याज (बिना लिमिट) |
| एम्प्लॉयर NPS कंट्रीब्यूशन (80CCD(2)) | 10% बेसिक तक | 14% बेसिक तक |
निष्कर्ष और सलाह
दोस्तों, वीडियो और इस ब्लॉग में हमने स्पष्ट किया कि न्यू टैक्स रिजीम 2025 सिर्फ उन लोगों के लिए नहीं है जो कोई निवेश नहीं करते। बल्कि, यह उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जो रिटायरमेंट बेनिफिट (ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट), कृषि आय, या फैमिली पेंशन जैसी सेक्शन 10 की छूट का लाभ उठाते हैं ।
- अगर आपकी सैलरी ₹15 लाख से कम है और आप ज्यादा निवेश नहीं करते हैं, तो न्यू रिजीम आपके लिए सबसे बढ़िया विकल्प है।
- अगर आप HRA और 80C का भरपूर लाभ उठाते हैं और आपकी डिडक्शन लगभग ₹4-5 लाख से ज्यादा बनती है, तो ओल्ड रिजीम बेहतर हो सकता है ।
हमेशा याद रखें, ITR भरने से पहले दोनों रिजीम का कैलकुलेशन जरूर कर लें। अगर आपको कभी भी किसी टैक्स से जुड़ी जानकारी चाहिए या आप यह जानना चाहते हैं कि आपके लिए कौन सी रिजीम सही है, तो हमें कॉल, मैसेज या व्हाट्सएप जरूर करें।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश या टैक्स संबंधी निर्णय लेने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार या चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से परामर्श अवश्य लें।
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