कार लोन कैसे लें? एलिजिबिलिटी, लोन अमाउंट, इंटरेस्ट रेट, प्रोसेसिंग फीस और इलेक्ट्रिक कार लोन के नियम क्या हैं? पब्लिक और प्राइवेट बैंक्स के उदाहरण से समझें पूरा प्रोसेस। Tax Samachar पर पढ़ें कार लोन से जुड़े हर सवाल का जवाब।

कार लोन पूरी गाइड: पब्लिक से प्राइवेट बैंक तक, जानें हर डिटेल
कार खरीदने का सपना देख रहे हैं लेकिन लोन के नियम और प्रोसेस को लेकर कन्फ्यूजन है? आप अकेले नहीं हैं। हमने हाल ही में दो कजिन्स को पेट्रोल और इलेक्ट्रिक कार का लोन लेने में मदद की, और इस पूरे अनुभव से मिली जानकारी आपके लिए यहां लेकर आए हैं। कौन सा बैंक बेहतर है? इलेक्ट्रिक कार लोन कैसे अलग है? आपको कितना लोन मिल सकता है? इंटरेस्ट रेट, प्रोसेसिंग चार्ज और लोन टेन्योर से जुड़े हर पहलू को हम प्रमुख पब्लिक और प्राइवेट बैंकों के उदाहरण से समझाएंगे। यह गाइड इतनी व्यापक है कि इसके बाद आपको किसी और आर्टिकल या वीडियो को देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पहला कदम: कार लोन की बेसिक्स समझें
कार लोन एक सिक्योर्ड लोन है, जहां कार ही गिरवी (हाइपोथिकेशन) रहती है। बैंक कार डीलर को पैसा देता है, और आप बैंक को मासिक किस्त (EMI) में वापस करते हैं। अगर आप EMI नहीं भर पाते, तो बैंक को कार बेचकर अपना पैसा वसूलने का अधिकार होता है। आपकी कार की RC बुक में ‘हाइपोथिकेशन’ लिखा रहता है जब तक लोन चुकता नहीं हो जाता।
दूसरा कदम: कार लोन के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
कार लोन के लिए आवेदन करने हेतु विभिन्न प्रकार के आवेदकों के लिए न्यूनतम योग्यता मापदंड निर्धारित हैं। वेतनभोगी कर्मचारियों (सैलरीड एम्प्लॉयी) के लिए न्यूनतम मासिक वेतन ₹25,000 (वार्षिक ₹3 लाख) और आयु सीमा 21 से 70 वर्ष है। स्व-नियोजित या व्यवसायी (सेल्फ एम्प्लॉयड/बिजनेस) व्यक्तियों के लिए न्यूनतम वार्षिक आयकर रिटर्न (ITR) ₹3 लाख और समान आयु सीमा की आवश्यकता है। कृषि से जुड़े आवेदकों के लिए न्यूनतम वार्षिक ITR ₹4 लाख और आयु सीमा 21 से 70 वर्ष है। दोपहिया वाहन (2 व्हीलर) लोन के इच्छुक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन ₹15,000 (वार्षिक ₹1.8 लाख) और समान आयु सीमा है। यदि आप अकेले इन मापदंडों को पूरा नहीं करते हैं, तो आप अपनी कुल पात्रता बढ़ाने के लिए एक सह-आवेदक (को-एप्लिकेंट) जोड़ सकते हैं, क्योंकि उनकी आय भी जुड़ जाएगी। इसके अलावा, हालांकि कई बैंक लोन के लिए अपने यहां वेतन खाता (सैलरी अकाउंट) खुलवाना अनिवार्य बताते हैं, लेकिन यह शर्त अक्सर मोलभाव (नेगोशिएबल) होती है। हमारे व्यावहारिक अनुभव के अनुसार, उच्च क्रेडिट स्कोर और अन्य दस्तावेजों के आधार पर बिना खाता खोले भी लोन मंजूर हो जाता है।
तीसरा कदम: आपको कितना लोन मिल सकता है?
बैंक आमतौर पर कार की ऑन-रोड कीमत का 85% से 90% तक लोन देते हैं। हालाँकि, कुछ खास श्रेणियों में 100% लोन भी संभव है:
1. लॉयल्टी कार लोन: मौजूदा प्रीमियम ग्राहक जिनकी सालाना आय एक निश्चित सीमा से अधिक है।
2. अश्योर्ड कार लोन: जिनके पास उसी बैंक में FD है। FD की राशि, कार की ऑन-रोड कीमत के 15-20% के बराबर होनी चाहिए।
3. चुनिंदा इलेक्ट्रिक कार लोन: टाटा टिआगो EV, नेक्सन EV जैसी कुछ खास इलेक्ट्रिक कारों के लिए। (कुछ अन्य EV मॉडल्स पर 90% ही मिल सकता है)।
बैंक 100% लोन क्यों नहीं देते?
1. ग्राहक की प्रतिबद्धता: 10-15% डाउन पेमेंट से पता चलता है कि आप गंभीर हैं।
2. अवमूल्यन (डेप्रिशिएशन): कार शोरूम से निकलते ही उसकी कीमत 10-15% गिर जाती है। अगर ग्राहक डिफॉल्ट करे, तो बैंक के लिए 100% राशि वसूलना मुश्किल हो जाता है।
चौथा कदम: ब्याज दर (इंटरेस्ट रेट) और अन्य शुल्क
* ब्याज दर का प्रकार: हमेशा फ्लोटिंग रेट लें। फिक्स्ड रेट न लें, क्योंकि RBI की रेपो दर घटने पर फ्लोटिंग रेट भी घटेगा।
* दरें CIBIL स्कोर पर निर्भर: अधिकांश बैंकों में दो-स्तरीय दरें होती हैं।
* CIBIL 750+: 8.50% – 9.50% प्रति वर्ष से शुरू।
* CIBIL 700-749: 9.00% – 10.50% प्रति वर्ष (0.50%-1.00% अधिक)।
* इलेक्ट्रिक कार छूट: चुनिंदा EV पर 0.10% से 0.50% तक की विशेष छूट मिल सकती है।
> तुलना जरूरी: बाजार में इस समय प्रमुख पब्लिक सेक्टर बैंक 8.20% – 9.00% की रेंज में और प्रमुख प्राइवेट बैंक 8.75% – 10.50% की रेंज में दरें ऑफर कर रहे हैं। दरों की तुलना जरूर करें।
प्रोसेसिंग और अन्य शुल्क (सामान्य नियम):
कार लोन की प्रोसेसिंग फीस लोन राशि के आधार पर तय होती है। 5 लाख रुपये तक के लोन के लिए यह फीस लगभग 1,000 से 2,500 रुपये के बीच हो सकती है। 5 लाख से 10 लाख रुपये के लोन के लिए यह बढ़कर 2,000 से 3,500 रुपये तक जा सकती है। जबकि 10 लाख रुपये से अधिक के ऊँचे टिकट लोन के लिए प्रोसेसिंग फीस 3,000 से 5,000 रुपये तक हो सकती है। ध्यान रखें कि ये राशियाँ जीएसटी से पहले की हैं, जो अतिरिक्त लगेगी। इसके अलावा, अगर आप लोन को समय से पहले चुकाना (प्री-पेमेंट) चाहते हैं, तो अधिकांश बैंक 1 से 2 साल की अवधि से पहले ऐसा करने पर बकाया राशि पर 2% से 5% तक का प्री-पेमेंट चार्ज लगाते हैं। हालाँकि, कुछ बैंक 2 या 3 साल बाद प्री-पेमेंट करने पर इस शुल्क को माफ कर देते हैं।
पाँचवाँ कदम: लोन अवधि (टेन्योर) और EMI
* अधिकतम अवधि: अधिकांश बैंक अधिकतम 7 वर्ष का लोन देते हैं।
* सलाह: कार लोन 4-5 वर्ष से अधिक का न लें। होम लोन की तरह इसमें टैक्स बेनिफिट नहीं मिलता, इसलिए जल्दी चुकाना बेहतर है।
* डिस्बर्समेंट: बैंक सीधे कार डीलर के खाते में राशि ट्रांसफर कर देता है।
* फ्लेक्सी पे ऑप्शन: कुछ बैंक कम EMI से शुरुआत करने का विकल्प देते हैं, लेकिन बाद में EMI बढ़ जाती है। जरूरी नहीं कि इसे चुनें।
छठा कदम: इलेक्ट्रिक कार लोन – क्या है खास?
* उच्च फंडिंग: कुछ बैंक चुनिंदा EV मॉडल्स पर 90-100% तक की फंडिंग ऑफर करते हैं।
* कम ब्याज दर: पेट्रोल/डीजल कारों की तुलना में 0.10% – 0.50% तक कम ब्याज दर मिल सकती है।
* लक्ष्य: सरकार और बैंक EV को बढ़ावा देने के लिए बेहतर शर्तें दे रहे हैं।
अंतिम और महत्वपूर्ण सलाह: दरों की तुलना जरूर करें!
* शॉप अराउंड: कम से कम एक पब्लिक सेक्टर बैंक, एक प्राइवेट बैंक और एक एनबीएफसी से लोन ऑफर प्राप्त करें।
* केवल ब्याज दर नहीं: प्रोसेसिंग फीस, लोन टेन्योर, प्री-पेमेंट चार्ज, फ्लेक्सिबिलिटी और CIBIL स्कोर का प्रभाव – इन सभी पहलुओं की तुलना करें।
* मोलभाव करें: बैंकों से बातचीत करके ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस में छूट पाने की कोशिश करें। आपकी CIBIL स्कोर और नौकरी की स्थिरता आपकी ताकत है।
निष्कर्ष
कार लोन लेना एक सरल प्रक्रिया है, अगर आप नियम जानते हैं। फ्लोटिंग ब्याज दर चुनें, 4-5 साल से ज्यादा की अवधि न लें, और अपनी CIBIL स्कोर को 750+ बनाए रखें। इलेक्ट्रिक कार खरीदने के इच्छुक हैं, तो 100% फंडिंग और कम ब्याज दर के अवसर तलाशें। सबसे महत्वपूर्ण, विभिन्न बैंकों की ऑफर लेटर की तुलना करके ही फैसला लें। थोड़ी रिसर्च और तुलना आपको हजारों रुपये की बचत दिला सकती है।
