जानें भारत के बजट का अनोखा इतिहास: जब नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने वित्त मंत्री के रहते हुए भी बजट पेश किया। पढ़िए किन विशेष परिस्थितियों में टूटी यह परंपरा।”
बजट दिवस की उम्मीदों और चर्चाओं के बीच एक दिलचस्प सवाल अक्सर उठता है – क्या सिर्फ वित्त मंत्री ही बजट पेश कर सकते हैं? भारत के संसदीय इतिहास में ऐसे कई अवसर रहे हैं जब परिस्थितियों ने प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर बजट पेश करने के लिए मंच पर ला दिया। आज, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कल यानी 1 फरवरी 2026 को अपना नौवां बजट पेश करने जा रही हैं, हम आपको बताते हैं उन ऐतिहासिक पलों के बारे में जब देश के प्रधानमंत्रियों ने यह भूमिका निभाई।

परंपरा से हटकर: तीन प्रधानमंत्री, तीन बजट
भारत में बजट पेश करने की जिम्मेदारी आमतौर पर वित्त मंत्री की होती है। लेकिन राजनीतिक उथल-पुथल, इस्तीफों और विशेष परिस्थितियों ने इस परंपरा को कई बार तोड़ा है।
1. पंडित जवाहर लाल नेहरू (1958-59 का बजट)
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णमाचारी के इस्तीफे के बाद 1958-59 का बजट पेश किया। कृष्णमाचारी का नाम तत्कालीन ‘मुद्रा घोटाले’ में आने के बाद उन्हें 12 फरवरी 1958 को पद छोड़ना पड़ा। ऐसे में नेहरू ने स्वयं बजट की जिम्मेदारी संभाली और इतिहास रच दिया।
2. इंदिरा गांधी (1970 का बजट)
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1970 में बजट पेश किया जब वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक मतभेदों के चलते देसाई का इस्तीफा देना पड़ा, और इंदिरा गांधी ने खुद ही वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला। यह घटना कांग्रेस में बढ़ते अंतर्द्वंद्व का प्रतीक भी थी।
3. राजीव गांधी (1987-88 का बजट)
प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1987-88 का बजट तब पेश किया जब वित्त मंत्री वी.पी. सिंह ने बोफोर्स घोटाले को लेकर मतभेदों के चलते इस्तीफा दे दिया। यह बजट एक ऐसे दौर में पेश किया गया जब सरकार विवादों से घिरी हुई थी और प्रधानमंत्री ने सीधे आर्थिक एजेंडा रखा।
कल का बजट: क्या उम्मीद करें?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाने वाला बजट न केवल उनका नौवां बजट होगा, बल्कि देश की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों और अवसरों को भी दर्शाएगा। अतीत के ये उदाहरण दिखाते हैं कि बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक और आर्थिक कहानी का एक अध्याय होता है।
जैसा कि हम एक नए बजट का इंतजार करते हैं, यह जानना दिलचस्प है कि भारत का बजट इतिहास नेहरू, इंदिरा और राजीव गांधी जैसे प्रधानमंत्रियों के योगदान से भी समृद्ध हुआ है – उन क्षणों में जब परिस्थितियों ने उन्हें सीधे तौर पर इस भूमिका में ला खड़ा किया।
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