लोन दिलाने के नाम पर ठग उड़ा रहे हैं सालों की जमा पूंजी! फर्जी वेबसाइट, नकली लोन ऐप और एडवांस फीस के झांसे से खाली हो रहे बैंक खाते। पहचानें 5 बड़े स्कैम, रेड फ्लैग और बचाव के तरीके, ताकि आपकी निजी जानकारी और मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां एक तरफ एप्स और वेबसाइट्स ने लोन लेने की प्रक्रिया को चुटकियों का काम बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ साइबर ठगों ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। अब ठगी सिर्फ पैसे तक सीमित नहीं है, बल्कि ये धोखेबाज आपकी पर्सनल डिटेल (आधार, पैन, बैंक लॉगिन) चुराकर आपके पूरे जीवन की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं।
यह कोई आम धोखाधड़ी नहीं है; यह एक संगठित साइबर अपराध है जो हर रोज सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना रहा है। “लोन चाहिए?” का झांसा देकर ठग आपको इस कदर उलझाते हैं कि आप खुद ही अपनी बैंक डिटेल उन्हें थमा देते हैं।
तो आइए, टैक्स समाचार के इस विशेष लेख में हम आपको ठगों के उन 5 बड़े जालों से रूबरू करवाते हैं, जिन्हें पहचानना आज के समय में आपकी आर्थिक सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी हो गया है।
1. फर्जी वेबसाइट और ‘गारंटीड लोन’ का झांसा (The Phishing Trap)
कैसे बनता है जाल?
मान लीजिए आपको तुरंत 2 लाख रुपये की जरूरत है। आप गूगल पर “इंस्टेंट पर्सनल लोन” या “लोन विदाउट सिक्योरिटी” सर्च करते हैं। सबसे ऊपर कुछ ऐड्स दिखते हैं – “99.9% अप्रूवल गारंटी”, “बिना क्रेडिट चेक के लोन”, “5 मिनट में खाते में पैसे”। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई कहे “बिना परीक्षा दिए टॉपर बनो”।
ये फर्जी वेबसाइट असली बैंकों की तरह दिखती हैं। लोगो, फॉर्मेट, सब कुछ कॉपी किया हुआ। जैसे ही आप फॉर्म भरते हैं और सबमिट करते हैं, आप असल में अपनी निजी जानकारी ठगों के हाथों में सौंप रहे होते हैं।
रेड फ्लैग्स (पहचान के संकेत):
- वेबसाइट का एड्रेस (URL) गड़बड़ है, जैसे
www.sbigoan.inयाwww.hdfc-personal.net। असली वेबसाइट हमेशा.com,.co.inया सरकारी हो तो.gov.inहोती है। - वेबसाइट पर लॉक सिंबल (HTTPS) नहीं होता।
- “गारंटीड लोन” शब्द का प्रयोग। आरबीआई के नियमों के मुताबिक, कोई भी बैंक बिना जांच के 100% गारंटीड लोन नहीं देता।
सेफ कैसे रहें?
हमेशा वेबसाइट का डोमेन नेम चेक करें। अगर लिंक गलत स्पेलिंग से बना है (जैसे HDFC की जगह HDFCbankloans), तो समझ जाइए यह स्कैम है। कभी भी सर्च इंजन के टॉप ऐड पर भरोसा न करें, सीधे बैंक की ऑफिशियल साइट पर जाएं।
2. एडवांस फीस स्कैम: पहले पैसे दो, फिर लोन भूल जाओ (Advance Fee Fraud)
कैसे बनता है जाल?
यह सबसे पुराना, लेकिन सबसे कारगर स्कैम है। ठग आपको कॉल करता है और बताता है कि आपका 5 लाख का लोन अप्रूव हो गया है। लेकिन खाते में पैसे आने से पहले कुछ फॉर्मेलिटीज हैं।
- पहले 2% प्रोसेसिंग फीस जमा कराओ।
- अब जीएसटी (GST) के 2,500 रुपये और चाहिए।
- अब क्रेडिट स्कोर बढ़ाने के लिए 5,000 रुपये।
आप सोचते हैं, “5 लाख के लिए 5 हजार तो ठीक है”, और पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इसके बाद ठग या तो फोन उठाना बंद कर देते हैं, या फिर नई फीस का नया बहाना बनाते हैं।
रेड फ्लैग्स:
- लोन अप्रूवल के नाम पर पहले पैसे मांगना।
- पेमेंट किसी प्राइवेट पर्सन या किराना स्टोर के खाते में मांगना।
- “ट्रांजैक्शन फेल हो गया, दोबारा भेजो” जैसे बहाने।
सेफ कैसे रहें?
याद रखें: असली बैंक कभी लोन डिसबर्स होने से पहले प्रोसेसिंग फीस नहीं लेते। अगर कोई फीस है, तो वह लोन राशि में से काटी जाती है, अलग से नहीं। आरबीआई ने साफ कहा है कि लोन देने से पहले एडवांस में पैसे लेना धोखाधड़ी है।
3. फर्जी लोन ऐप: आपकी जेब में छिपा जासूस (Fake Loan App Scam)
कैसे बनता है जाल?
गूगल प्ले स्टोर या किसी अन्य स्टोर पर सैकड़ों ऐसे ऐप्स हैं जो “5 मिनट में लोन” का दावा करते हैं। ये ऐप्स न सिर्फ आपको लोन देने में विफल रहते हैं, बल्कि आपके फोन की पूरी कमांड ही ले लेते हैं।
जैसे ही आप ऐप को इंस्टॉल करते हैं, यह आपसे कॉन्टैक्ट्स, कैमरा, फोटो, माइक्रोफोन और यहां तक कि SMS की परमिशन मांगता है। आपको लगता है यह वेरिफिकेशन के लिए है, लेकिन असल में ठग आपकी फोनबुक, गैलरी और बैंक से आए OTP तक चुरा लेते हैं।
सबसे खतरनाक बात: कई फर्जी लोन ऐप्स आपको लोन देने के बाद अप्राकृतिक ब्याज दरें (300% APR तक) वसूलते हैं और जैसे ही आप पेमेंट मिस करते हैं, ये आपके कॉन्टैक्ट लिस्ट में मौजूद सभी लोगों को शर्मनाक मैसेज और फोटो भेजकर ब्लैकमेल करना शुरू कर देते हैं।
रेड फ्लैग्स:
- ऐप को अनावश्यक परमिशन (आपके सारे कॉन्टैक्ट्स पढ़ना) देना।
- ऐप का डेवलपर नाम अजीब हो (जैसे “शिन चैन सोल्यूशंस”) और उसका कोई ऑफिस पता न हो।
- ऐप के रिव्यू में बहुत से 1-स्टार रेटिंग और “फ्रॉड” के कमेंट्स हों।
सेफ कैसे रहें?
- हमेशा ऐप का नाम गूगल पर सर्च करके देखें कि कहीं उसे साइबर सेल ने बैन तो नहीं किया है।
- केवर RBI रजिस्टर्ड NBFC या बैंक के ऑफिशियल ऐप का ही इस्तेमाल करें।
- ऐप को कभी भी आपके फोटो गैलरी या कॉन्टैक्ट्स तक पहुंचने की इजाजत न दें, अगर वह सोशल मीडिया ऐप नहीं है।
4. फर्जी रिकवरी एजेंट: पुलिस बनकर डराने का खेल (Fake Recovery Agents)
कैसे बनता है जाल?
यह स्कैम उन लोगों को डराने के लिए है जिन्होंने कभी लोन लिया था या नहीं भी लिया। आपके पास एक कॉल आती है: “साहब, आपका 50,000 का लोन बकाया है, अभी पैसे नहीं दिए तो पुलिस केस कर देंगे, घर से गिरफ्तारी होगी।”
हैरानी की बात यह है कि इनके पास आपकी आधा-अधूरी जानकारी होती है (पुराना पैन कार्ड, पुराना पता)। ये इतनी आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हैं कि आप डर के मारे उनसे सौदेबाजी करके पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
रेड फ्लैग्स:
- कॉल करने वाला प्राइवेट नंबर से बात कर रहा है, बैंक के टोल-फ्री नंबर से नहीं।
- पेमेंट किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते या UPI ID में मांग रहा है।
- कानूनी नोटिस ईमेल पर भेज रहा है, जो सरकारी डोमेन से नहीं है।
सेफ कैसे रहें?
घबराएं नहीं। असली बैंक कभी व्हाट्सएप या प्राइवेट कॉल पर गाली-गलौज नहीं करते। उनकी एक स्टैंडर्ड रिकवरी प्रोसेस होती है। अगर ऐसा कॉल आए, तो बिना कुछ बताए कॉल काट दें और सीधे अपने बैंक ब्रांच जाकर पूछताछ करें।
5. केवाईसी अपडेट और लिंक स्कैम (KYC Phishing)
कैसे बनता है जाल?
“आपका केवाईसी एक्सपायर हो गया है, लिंक पर क्लिक करके तुरंत अपडेट करें।” यह मैसेज अब तक आपने सैकड़ों बार देखा होगा। ठग जानते हैं कि लोन के लिए केवाईसी जरूरी है, इसलिए वे इसी बहाने आपको एक फर्जी लिंक भेजते हैं।
लिंक पर क्लिक करते ही एक वेबसाइट खुलती है जो बिल्कुल SBI, HDFC या Paytm की कॉपी होती है। यहां आप अपना कार्ड नंबर, CVV, एक्सपायरी डेट और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड डालते हैं। बस फिर क्या, अगले ही सेकंड आपके खाते से पैसे गायब!
रेड फ्लैग्स:
- मैसेज में SMS वाले लिंक होते हैं (tinyurl, bit.ly)।
- आपसे पूरा बैंक डिटेल (कार्ड नंबर, CVV) मांगा जा रहा है। असली केवाईसी के लिए कभी CVV नहीं मांगा जाता।
- तुरंत कार्रवाई न करने पर अकाउंट ब्लॉक होने की धमकी।
सेफ कैसे रहें?
बैंक कभी भी SMS में एक्टिव लिंक भेजकर केवाईसी अपडेट नहीं करवाते। केवाईसी के लिए आपको सीधे बैंक जाना होता है या आधिकारिक ऐप पर जाना होता है। कभी किसी अनजान लिंक पर अपना कार्ड नंबर या पासवर्ड न डालें।
विशेषज्ञ की सलाह: अगर फंस ही गए, तो क्या करें?
यदि आप इनमें से किसी भी स्कैम का शिकार हो चुके हैं, तो समय बर्बाद न करें। यहां तुरंत उठाए जाने वाले कदम बताए जा रहे हैं:
- तुरंत बैंक को सूचित करें: जैसे ही पता चले कि पैसे कट गए हैं, तुरंत अपने बैंक के टोल फ्री नंबर पर कॉल करें और उस ट्रांजैक्शन को रिवर्ट करने का अनुरोध करें।
- नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल: www.cybercrime.gov.in पर तुरंत शिकायत दर्ज करें। यह पोर्टल 24×7 खुला है।
- हेल्पलाइन नंबर: 1930 पर कॉल करें। यह साइबर फ्रॉड के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर है।
- सबूत इकट्ठा करें: ठगों से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट, जिस खाते में पैसे भेजे हैं उसकी डिटेल और फर्जी ऐप का नाम नोट कर लें। यह पुलिस इन्वेस्टिगेशन में बेहद काम आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या सच में कोई कंपनी बिना कागजी कार्रवाई के 5 मिनट में लोन दे सकती है?
हां, कुछ फिनटेक कंपनियां (जैसे गूगल पे, फोनपे) प्री-अप्रूव्ड लोन देती हैं, लेकिन वह भी आपके बैंक स्टेटमेंट और क्रेडिट स्कोर देखने के बाद। बिना किसी जानकारी के सिर्फ नाम और पते पर 5 मिनट में लाखों रुपये देना 99.9% मामलों में स्कैम होता है।
Q2: अगर मैं गलती से किसी फर्जी लोन ऐप को परमिशन दे दूं तो क्या करूं?
तुरंत ऐप को अनइंस्टॉल कर दें। इसके बाद अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर उस ऐप की सभी परमिशन रिवोक कर दें। अपने गूगल अकाउंट से डिवाइस को रिमूव करें। अगर संभव हो तो फोन का डेटा बैकअप लेकर फोन को फैक्ट्री रीसेट कर दें।
Q3: क्या RBI रजिस्टर्ड कंपनी से लोन लेना 100% सुरक्षित है?
अधिकतर हां, लेकिन सिर्फ RBI रजिस्टर्ड होने का मतलब यह नहीं कि उसका हर एजेंट सही है। हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट और ब्रांच से ही संपर्क करें। बाजार में कई सिमीटेड NBFC के नाम से भी फ्रॉड किए जाते हैं।
Q4: लोन एप्रूवल लेटर मिला है, क्या यह असली है?
अगर आपने किसी बैंक में अप्लाई ही नहीं किया और आपको लोन अप्रूवल लेटर मिल रहा है, तो यह सीधा स्कैम है। ऐसे लेटर पर दिए गए नंबर पर कभी कॉल न करें। पहले बैंक की ब्रांच में जाकर वेरिफाई करें।
निष्कर्ष: सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार
डिजिटल अर्थव्यवस्था की यह दौड़ में हर कोई तेज रफ्तार से भाग रहा है, लेकिन ठग आपसे दो कदम आगे हैं। लोन के नाम पर हो रही इस ठगी से बचने का सिर्फ एक ही मंत्र है – “जल्दबाजी न करें, जांच-पड़ताल करें।”
असली बैंक कभी आप पर लोन लेने का दबाव नहीं बनाते। असली बैंक कभी आपके दरवाजे पर पैसे लेकर नहीं आते और न ही वे आपसे आपकी पर्सनल डिटेल फोन पर साझा करने को कहते हैं।
अगर आपको लगता है कि यह जानकारी आपके दोस्त, रिश्तेदार या किसी परिचित के काम आ सकती है, तो इस आर्टिकल को उनके साथ जरूर शेयर करें। हो सकता है आपकी एक सतर्कता से किसी की पूरी जिंदगी की कमाई बच जाए।
याद रखें: मेहनत की कमाई पर किसी ठग का कोई हक नहीं है। जागरूक रहें, सुरक्षित रहें।
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