नई टैक्स व्यवस्था सरल लगती है, लेकिन होम लोन, HRA, बीमा और निवेश की सभी छूटें खत्म होने से आपका भविष्य खतरे में है। जानिए वे 5 गंभीर नुकसान जिन पर बजट 2026 में होनी चाहिए चर्चा।

बजट 2026 की चर्चाओं के साथ ही एक बार फिर वह पुराना सवाल लौट आया है: “कौन सी टैक्स व्यवस्था चुनूं – नई या पुरानी?” सरकार लगातार नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को प्रोत्साहित कर रही है, जिसमें कम स्लैब और शुरुआती सीमा पर कोई टैक्स नहीं है। सतह पर तो यह आकर्षक लगता है, लेकिन जब आप गहराई में जाते हैं, तो पाते हैं कि यह व्यवस्था केवल आपके वर्तमान कैशफ्लो को ही नहीं, बल्कि आपकी दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और निवेश की आदतों को भी प्रभावित कर रही है।
यह व्यवस्था सरल जरूर है, लेकिन यह “सरलता” की कीमत “सुरक्षा” से चुकाई जा रही है। आइए, उन 5 ‘ ओझल ‘ नुकसानों को समझते हैं, जिन पर अक्सर चर्चा नहीं होती, लेकिन जो आपकी आर्थिक सेहत के लिए गंभीर खतरा हैं।
1. अपने घर के लिए होम लोन ब्याज पर छूट का अंत: सपना महंगा
पुरानी व्यवस्था में, आप जिस घर में रहते हैं (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी), उसके होम लोन के ब्याज पर सालाना ₹2 लाख तक की कर छूट (Section 24) मिलती थी। यह छूट मध्यम वर्ग को अपना सपना घर बनाने में मदद करती थी।
नई व्यवस्था में क्या है? यह छूट पूरी तरह खत्म है। अब आपको अपने रहने के घर के लिए चुकाए गए लाखों रुपये के ब्याज पर कोई टैक्स रिलीफ नहीं मिलेगा। हैरानी की बात यह है कि अगर आपने कोई दूसरा घर किराए पर दिया है और उस पर लोन लिया है, तो उसके ब्याज पर छूट मिल सकती है, क्योंकि उसे ‘हाउस प्रॉपर्टी इनकम’ के खिलाफ एडजस्ट किया जा सकता है। इससे साफ है कि नई व्यवस्था निवेशक को प्रोत्साहित कर रही है, न कि पहली बार घर लेने वाले को।
2. निवेश की आदत पर सीधा प्रहार: धारा 80C का खात्मा
यह सबसे बड़ा और सबसे नुकसानदेह बदलाव है। पुरानी व्यवस्था में धारा 80C के तहत PPF, एलआईसी, बच्चों की स्कूल फीस, ELSS म्यूचुअल फंड, एनएससी आदि में ₹1.5 लाख तक के निवेश पर कर छूट मिलती थी। यह प्रावधान भारतीयों को बचत और निवेश के लिए अनुशासित करने का एक मजबूत टूल था।
नई व्यवस्था का असर: इस छूट के खत्म होने से लोगों का निवेश करने का मोटिवेशन कमजोर हुआ है। जब टैक्स बचाने का फायदा नहीं रहा, तो बहुत से लोग अनियोजित खर्च को प्राथमिकता देने लगे हैं। इससे देश में दीर्घकालिक बचत की दर और व्यक्तिगत वित्तीय सुरक्षा दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। सेवानिवृत्ति के बाद के लिए जमा कोष कमजोर हो रहे हैं।
3. किराएदारों के लिए झटका: HRA (हाउस रेंट अलाउंस) छूट का न होना
सैलरी कमाने वाले एक बड़े वर्ग के लिए, किराए पर घर लेने पर मिलने वाली HRA छूट बहुत बड़ी राहत थी। पुरानी व्यवस्था में वास्तविक किराए के आधार पर एक बड़ी रकम टैक्स-फ्री हो जाती थी।
नई व्यवस्था में स्थिति: HRA पर कोई छूट नहीं है। महंगे शहरों में रहने वाले कर्मचारी, जिनकी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा किराए में चला जाता है, उन्हें अब पूरी रकम पर टैक्स देना होगा। इससे उनकी मासिक नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) पर भारी दबाव पड़ रहा है और उनकी बचत क्षमता कम हो रही है।
4. स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति अनदेखी: हेल्थ इंश्योरेंस पर कोई छूट नहीं
पुरानी व्यवस्था में धारा 80D के तहत स्वयं, पति/पत्नी, बच्चों और माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर ₹25,000 से ₹75,000 तक की छूट मिलती थी। इससे लोगों को स्वास्थ्य बीमा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।
नई व्यवस्था की कमी: इस प्रावधान के अभाव में, विशेषकर युवा और स्वस्थ लोग हेल्थ इंश्योरेंस को एक ‘अनावश्यक खर्च’ मानने लगे हैं। यह एक खतरनाक रुझान है, क्योंकि चिकित्सा आपात स्थिति में परिवार की सारी बचत डूब सकती है। यह व्यवस्था लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा के महत्व से दूर कर रही है।
5. शिक्षा के लिए प्रोत्साहन समाप्त: एजुकेशन लोन ब्याज पर छूट नदारद
पुरानी व्यवस्था में धारा 80Eके तहत उच्च शिक्षा के लिए लिए गए एजुकेशन लोन के ब्याज पर पूरी तरह से कर छूट मिलती थी (कोई अधिकतम सीमा नहीं)। यह युवाओं और उनके माता-पिता को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रेरित करता था।
नई व्यवस्था का नुकसान: इस छूट के हटने से उच्च शिक्षा, खासकर विदेश में पढ़ाई, का वित्तीय बोझ और बढ़ गया है। यह नीति देश के युवाओं को कौशल विकास और उच्च शिक्षा से रोकने का एक अप्रत्यक्ष संदेश देती है।
तो क्या नई टैक्स व्यवस्था पूरी तरह खराब है?
बिल्कुल नहीं। नई व्यवस्था का अपना एक सकारात्मक पक्ष है। यह उन लोगों के लिए बेहतर है, जो:
* न्यूनतम कटौतियां (Deductions) ही कर पाते हैं।
* जिनकी टैक्सेबल इनकम लगभग ₹12.75 लाख तक है (स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद), उन पर प्रभावी कर दर शून्य है।
* जो जटिल निवेश योजनाओं में उलझना नहीं चाहते और सीधे-सादे ढंग से टैक्स देना चाहते हैं।
बजट 2026 से क्या उम्मीद करें?
नई टैक्स व्यवस्था को अपनाने की दर बढ़ाने के लिए सरकार को एक संतुलन बनाने की जरूरत है। बजट 2026 में इन मुद्दों पर चर्चा होने की पूरी संभावना है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार कुछ महत्वपूर्ण छूटों, जैसे धारा 80C (बचत), 80D (स्वास्थ्य बीमा) और सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी के होम लोन ब्याज पर छूट को नई व्यवस्था में भी शामिल करने पर विचार कर सकती है। ऐसा करने से नई व्यवस्था सही मायने में ‘बेहतर विकल्प’ बन सकेगी, जो न केवल वर्तमान बोझ को हल्का करेगी, बल्कि नागरिकों को एक सुरक्षित भविष्य बनाने के लिए भी प्रेरित करेगी।
अंतिम सलाह: किसी भी टैक्स रेजिमी का चुनाव करने से पहले, अपनी कुल आय, संभावित कटौतियों और दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह जरूर लें। केवल कम टैक्स देना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि टैक्स की बचत को ऐसे निवेश में लगाना चाहिए जो आपके भविष्य को सुरक्षित करे।
