होम लोन ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी क्या है? प्रीपेमेंट का पैसा लॉक न हो, ब्याज बचे और जरूरत पर निकाल सकें। डेली रिड्यूसिंग बैलेंस से लाखों की सेविंग! SBI, HDFC समेत बैंकों की डिटेल्स

होम लोन प्रीपेमेंट में आपकी बचत का पैसा एक बार में लोन में चला जाता है और जरूरत पड़ने पर वापस नहीं मिलता है। इसी समस्या से निपटने के लिए आप होम लोन ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी का इस्तेमाल कर सकते हैं। आज के समय में लाखों लोग बैंक से होम लोन लेकर अपना सपनों का घर खरीद रहे हैं। लोन लेने के बाद हर कोई जल्दी EMI चुकाकर ब्याज बचाना चाहता है, इसलिए प्रीपेमेंट का रास्ता अपनाते हैं। लेकिन प्रीपेमेंट की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि आपका अतिरिक्त पैसा लोन अकाउंट में ‘फंस’ जाता है। अचानक मेडिकल इमरजेंसी या बिजनेस जरूरत पर वह पैसा वापस नहीं मिलता।
यहीं होम लोन ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी काम आती है। यह सुविधा आपको ब्याज बचाने के साथ-साथ लिक्विडिटी (पैसे की उपलब्धता) भी देती है। अगर आप सैलरीड हैं या बिजनेस करते हैं, तो यह आपके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इस आर्टिकल में हम डिटेल से समझेंगे कि ओवरड्राफ्ट होम लोन क्या है, कैसे काम करता है, फायदे-नुकसान, टैक्स बेनिफिट्स और प्रमुख बैंकों की स्कीम्स। टैक्स समाचार के पाठकों के लिए खासतौर पर टैक्स इंप्लिकेशन्स पर फोकस करेंगे। चलिए शुरू करते हैं!
होम लोन ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी क्या है?
होम लोन ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी एक खास तरह का होम लोन है, जहां आपका लोन अकाउंट आपके सेविंग्स या करेंट अकाउंट से लिंक हो जाता है। सामान्य होम लोन में प्रीपेमेंट करने पर पैसा लोन बैलेंस कम करता है, लेकिन निकालना मुश्किल होता है। ओवरड्राफ्ट में ऐसा नहीं।
जब आप अतिरिक्त पैसा (जैसे बोनस, सैलरी एक्स्ट्रा या बचत) जमा करते हैं, तो बैंक उसे प्रीपेमेंट मान लेता है। इससे लोन बैलेंस घटता है और ब्याज भी कम लगता है। खास बात: जरूरत पड़ने पर आप कभी भी उस पैसे को एटीएम, चेक या ट्रांसफर से निकाल सकते हैं। निकालते ही उतनी रकम लोन में वापस जुड़ जाती है और ब्याज फिर शुरू हो जाता है।
यह डेली रिड्यूसिंग बैलेंस पर काम करता है। मतलब, बैंक हर दिन चेक करता है कि आपके अकाउंट में कितना बैलेंस है और लोन कितना बाकी है। अंतर पर ही ब्याज लगता है। उदाहरण: मान लीजिए आपका लोन 50 लाख का है। आप 10 लाख जमा करते हैं, तो बकाया 40 लाख हो जाता है। ब्याज सिर्फ 40 लाख पर लगेगा। अब 5 लाख निकालते हैं, तो बकाया 45 लाख और ब्याज उसी पर।
EMI फिक्स्ड रहती है, लेकिन कम ब्याज के कारण EMI का बड़ा हिस्सा प्रिंसिपल चुकाने में लगता है। नतीजा? लोन टेन्योर कम हो जाता है।
ओवरड्राफ्ट होम लोन कैसे काम करता है? स्टेप-बाय-स्टेप
ओवरड्राफ्ट सुविधा को समझने के लिए एक सरल उदाहरण लें। मान लीजिए राहुल ने 50 लाख का होम लोन लिया, 9% ब्याज पर, 20 साल के लिए। मासिक EMI करीब 45,000 रुपये।
- अकाउंट लिंकिंग: लोन के साथ सेविंग अकाउंट लिंक होता है।
- एक्स्ट्रा डिपॉजिट: राहुल हर महीने 20,000 रुपये एक्स्ट्रा जमा करता है (सैलरी से बचत)।
- बैलेंस रिडक्शन: लोन बैलेंस घटकर 48 लाख हो जाता है। ब्याज सिर्फ इस पर लगता है।
- उठाव: इमरजेंसी में 10 लाख निकालता है। बैलेंस वापस 50 लाख + निकाला अमाउंट।
- डेली कैलकुलेशन: हर शाम बैंक बैलेंस चेक करता है। औसतन कम बैलेंस = कम ब्याज।
कैलकुलेशन टेबल (उदाहरण):
| महीना | जमा बैलेंस (लाख) | लोन बैलेंस (लाख) | ब्याज (मासिक, 9%) | बचत (रुपये) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 10 | 40 | 30,000 | 7,500 |
| 6 | 15 | 35 | 26,250 | 11,250 |
| 12 | 20 | 30 | 22,500 | 15,000 |
(नोट: ये अनुमानित हैं। असली कैलकुलेटर से चेक करें।)
इससे राहुल को सालाना 1-2 लाख ब्याज बचत हो सकती है। EMI फिक्स्ड रहने से प्रिंसिपल तेजी से घटता है, लोन 15 साल में क्लोज हो सकता है।
ओवरड्राफ्ट vs सामान्य होम लोन: तुलना
| पैरामीटर | ओवरड्राफ्ट होम लोन | सामान्य होम लोन |
|---|---|---|
| ब्याज कैलकुलेशन | डेली रिड्यूसिंग बैलेंस | मासिक रिड्यूसिंग बैलेंस |
| प्रीपेमेंट | कभी भी निकाल सकते हैं | 6-12 महीने लॉक, पेनल्टी हो सकती |
| लिक्विडिटी | हाई (जरूरत पर पैसा उपलब्ध) | लो (पैसा फंस जाता है) |
| EMI | फिक्स्ड, लेकिन प्रिंसिपल तेज रिडक्शन | फिक्स्ड |
| ब्याज दर | 0.25-0.50% ज्यादा (SBI में 8.75-10%) | कम (8.5-9.5%) |
| सर्विस चार्ज | सालाना 0.25-0.50% | कम या निल |
ओवरड्राफ्ट थोड़ा महंगा लगता है, लेकिन लिक्विडिटी से कुल बचत ज्यादा।
ओवरड्राफ्ट होम लोन के फायदे
- ब्याज में भारी बचत: डेली रिड्यूसिंग से औसतन 20-30% ब्याज कम। 50 लाख लोन पर 5-10 लाख कुल सेविंग।
- लिक्विडिटी: पैसा ‘फंसा’ नहीं रहता। बिजनेस वाले या अनियमित इनकम वालों के लिए बेस्ट।
- लोन टेन्योर कम: प्रिंसिपल तेजी से घटता है।
- टैक्स बेनिफिट्स: सेक्शन 24(b) के तहत 2 लाख ब्याज डिडक्शन + 80C में प्रिंसिपल। ओवरड्राफ्ट में प्रीपेमेंट को टैक्स फ्री रखा जाता है।
- कोई प्रीपेमेंट चार्ज नहीं: RBI नियमों से छूट।
- आसान मैनेजमेंट: एक ही अकाउंट से सब कंट्रोल।
उदाहरण: नेहा ने 40 लाख लोन लिया। सालाना 5 लाख जमा किया। 10 साल बाद लोन क्लोज, 8 लाख ब्याज बचत।
ओवरड्राफ्ट होम लोन के नुकसान और जोखिम
हर अच्छी चीज के दो पहलू होते हैं:
- उच्च ब्याज दर: सामान्य से 0.25-1% ज्यादा। लॉन्ग टर्म में चेक करें।
- डिसिप्लिन जरूरी: अगर नियमित जमा न करें, तो ब्याज ज्यादा लगेगा।
- सर्विस फीस: सालाना 250-750 रुपये प्रति लाख।
- लिमिट: जमा रकम लोन अमाउंट तक ही।
- क्रेडिट स्कोर इंपैक्ट: ज्यादा उठाव से स्कोर गिर सकता है।
- न सभी बैंकों में उपलब्ध: चुनिंदा स्कीम्स।
टिप: अगर आपकी इनकम स्थिर नहीं, तो अवॉइड करें।
टैक्स समाचार स्पेशल: ओवरड्राफ्ट और इनकम टैक्स बेनिफिट्स
टैक्स सेविंग के शौकीनों के लिए ओवरड्राफ्ट गोल्डमाइन है।
- सेक्शन 24(b): सालाना 2 लाख तक होम लोन ब्याज डिडक्शन। ओवरड्राफ्ट में ब्याज कम लगता है, लेकिन डिडक्शन वैलिड।
- सेक्शन 80C: 1.5 लाख तक प्रिंसिपल रिडक्शन।
- प्रीपेमेंट टैक्स फ्री: जमा पैसा प्रीपेमेंट माना जाता है, कोई TDS नहीं।
- इंटरेस्ट कैलकुलेशन: डेली रिड्यूसिंग से सटीक डिडक्शन क्लेम। ITR-2 में शेड्यूल दिखाएं।
उदाहरण टेबल (FY 2025-26):
| खर्च | अमाउंट (रुपये) | डिडक्शन सेक्शन |
|---|---|---|
| ब्याज (कम OD से) | 1,80,000 | 24(b) |
| प्रिंसिपल | 1,50,000 | 80C |
| कुल बचत | 3,30,000 | 30% टैक्स स्लैब |
नई टैक्स रिजीम में भी कुछ बेनिफिट्स। CA से कंसल्ट करें।
प्रमुख बैंकों की ओवरड्राफ्ट होम लोन स्कीम्स (2026 अपडेट)
- SBI Maxgain: बेस्ट ऑप्शन। ब्याज 8.75-10.05%। सेविंग्स से लिंक। सालाना फीस 7500 रुपये। ऐप से मॉनिटर।
- HDFC Overdraft Linked HL: 8.95-10.25%। नो प्रीपेमेंट चार्ज। बोनस जमा पर फोकस।
- ICICI Bank OD Facility: 9-10.5%। करेंट अकाउंट लिंक। बिजनेस वालों के लिए।
- PNB Home Loan OD: 8.90-9.80%। ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा।
- Axis Bank: 8.75-10%। डिजिटल अप्रूवल।
कैसे अप्लाई करें?
- बैंक ब्रांच/ऑनलाइन जाएं।
- KYC, इनकम प्रूफ दें।
- मौजूदा लोन को OD में कन्वर्ट करवाएं (नो एक्स्ट्रा कॉस्ट)।
ओवरड्राफ्ट होम लोन के लिए योग्यता और जरूरी डॉक्यूमेंट्स
- एलिजिबिलिटी: 21-70 साल। सैलरी 25,000+ या बिजनेस इनकम।
- CIBIL स्कोर: 750+।
- डॉक्यूमेंट्स: आधार, PAN, सैलरी स्लिप, प्रॉपर्टी पेपर्स, बैंक स्टेटमेंट।
कैलकुलेटर टिप: बैंक की वेबसाइट पर OD EMI कैलकुलेटर यूज करें।
ओवरड्राफ्ट होम लोन की सक्सेस स्टोरी और टिप्स
रियल केस: मुंबई के व्यापारी अमित ने 1 करोड़ लोन लिया। OD से 12 लाख ब्याज बचाया। “पैसे की फ्लेक्सिबिलिटी ने बिजनेस बढ़ाया।”
टिप्स:
- हर महीने फिक्स्ड अमाउंट जमा करें।
- ऐप नोटिफिकेशन्स ऑन रखें।
- ब्याज रेट फिक्स्ड चुनें अगर मार्केट ऊपर जा रहा।
- फैमिली के साथ प्लानिंग करें।
निष्कर्ष: क्या आपको OD चुनना चाहिए?
होम लोन ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो प्रीपेमेंट करना चाहते हैं लेकिन लिक्विडिटी नहीं खोना चाहते। ब्याज बचत, टैक्स बेनिफिट्स और आसानी से आपका लोन जल्दी क्लोज हो सकता है। लेकिन उच्च रेट और डिसिप्लिन चेक करें।

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