सोना ₹1.80 लाख/10 ग्राम, चांदी ₹4 लाख/किलो के रिकॉर्ड स्तर पर! जानें क्यों लगी है दोनों धातुओं में आग, क्या कहते हैं एक्सपर्ट और निवेशकों के लिए क्या है सही स्ट्रैटेजी।

सोने-चांदी के बाजार में इन दिनों इतनी तेजी है कि निवेशक और विश्लेषक दोनों हैरान हैं। चांदी ने पहली बार ₹4,00,000 प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर दिया है, वहीं सोना भी ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। क्या है इस तेजी के पीछे का कारण? क्या यह उछाल जारी रहेगा? आइए विस्तार से समझते हैं।
भारतीय बाजार में धमाकेदार उछाल
MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर चांदी के मार्च अनुबंध ₹4,07,456 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए, जो पिछले भाव से लगभग 5.73% की तेजी दर्शाता है। वहीं, सोने के फरवरी अनुबंध ₹1,80,501 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे हैं, जो लगभग 8.8% की वृद्धि को दर्शाता है। यह उछाल केवल एक-दो दिन की बात नहीं है — पिछले कुछ हफ्तों से सोना-चांदी लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्या चल रहा है?
भारत में कीमतें अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड से प्रभावित हैं। COMEX (अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज) पर:
– सोना पहली बार $5,600 प्रति औंस से ऊपर पहुंच गया और अप्रैल अनुबंध $5,626.8 प्रति औंस के नए रिकॉर्ड पर कारोबार कर रहा है।
– चांदी भी $119.51 प्रति औंसके रिकॉर्ड स्तर को छू गई है।
क्यों भड़की आग? 5 प्रमुख कारण
1. सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ता रुझान
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल तनाव और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती की आशंका के चलते निवेशक सोने-चांदी जैसे “सुरक्षित हेवन” एसेट्स की ओर भाग रहे हैं।
2. अमेरिकी डॉलर में नरमी
डॉलर इंडेक्स में कमजोरी ने सोने-चांदी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ता बनाया है, जिससे मांग बढ़ी है।
3. चांदी की औद्योगिक मांग में वृद्धि
सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसने इसकी कीमतों को सोने से भी आगे बढ़ाया है।
4. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी
चीन, रूस और भारत समेत कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमतों को अतिरिक्त सपोर्ट मिल रहा है।
5. फ्यूचर्स और ETF में सट्टेबाजी
बड़े हेज फंड्स और संस्थागत निवेशकों ने सोने-चांदी के फ्यूचर्स में लॉन्ग पोजीशन बढ़ाई है, जिससे तेजी और तेज हुई है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह रैली अभी जारी रह सकती है, क्योंकि:
– चांदी की आपूर्ति सीमित है, जबकि हरित ऊर्जा क्षेत्र में मांग बढ़ने से इसका औद्योगिक महत्व बढ़ा है।
– सोना भू-राजनीतिक तनावों के बीच सुरक्षित पनाहगार बना हुआ है।
– अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना सोने को और आकर्षक बना सकती है।
निवेशकों के लिए सलाह
– लंबी अवधि के निवेशक SIP के जरिए सोने-चांदी में निवेश जारी रख सकते हैं।
– अल्पकालिक निवेशक बहुत अधिक उतार-चढ़ाव के कारण सावधानी बरतें।
– शार्ट-टर्म ट्रेडर्स तकनीकी संकेतकों और वैश्विक खबरों पर नजर रखें।
– भौतिक खरीदार Dhanteras या शादी के मौसम से पहले थोड़ी मात्रा में खरीदारी कर सकते हैं, लेकिन एकमुश्त बड़ी खरीद से बचें।
टैक्स इम्प्लिकेशन
ध्यान रखें: सोने-चांदी में निवेश पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (3 साल बाद) 20% टैक्स (इंडेक्सेशन के साथ) लगता है, जबकि शॉर्ट-टर्म गेन आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल है। SGB (सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड) पर इंटरेस्ट इनकम टैक्स के दायरे में आता है, लेकिन रिडेम्पशन पर LTCG टैक्स से छूट है।
निष्कर्ष
सोने-चांदी की यह तेजी वैश्विक आर्थिक हालात, मांग-आपूर्ति असंतुलन और निवेशक भावनाओं का नतीजा है। हालांकि रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचने के बाद समय-समय पर संशोधन (कॉरेक्शन) आ सकता है, लेकिन मध्यम से लंबी अवधि में दोनों धातुओं का आउटलुक मजबूत बना हुआ है। निवेश से पहले अपना रिस्क प्रोफाइल समझें और जरूरत के हिसाब से ही पोर्टफोलियो में सोने-चांदी को शामिल करें।
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